{"_id":"5f4f5dca8ebc3e5475368f41","slug":"champawat1599036874","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"आपदा में अवसर : याद आया जय जवान-जय किसान का नारा","category":{"title":"Local","title_hn":"लोकल","slug":"local"}}
आपदा में अवसर : याद आया जय जवान-जय किसान का नारा
विज्ञापन
पाटी ब्लाक में खेती करते प्रवासी।
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंद्रशेखर जोशी
विज्ञापन
चंपावत। अर्थव्यवस्था की भारी तबाही के बीच खेेती ने राह दिखाई है। कोरोना महामारी के बीच कृषि क्षेत्र ने आपदा में नए अवसर पैदा किए हैं। इस बार खरीफ फसल की बुवाई का रकवा बढ़ा है। बीते साल की अपेक्षा इसमें करीब 4.55 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी मडुवे की खेती में हुई है।
कोरोना काल में वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर शून्य से 23.90 फीसदी नीचे रही। इसमें सभी छह कोर सेक्टर में नकारात्मक ग्रोथ रही। सिर्फ कृषि क्षेत्र की विकास दर तीन फीसदी से बढ़कर 3.40 फीसदी रही। खेती में देश का ये ट्रेंड चंपावत जिले में भी नजर आया। यहां खरीफ सीजन में इस बार 583 हेक्टेयर अधिक यानि 13407.92 हेक्टेयर बुवाई हुई है।
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष नवीन करायत का कहना है कि कोरोना काल में खेती में हुए इजाफे में सर्वाधिक भूमिका दूसरे राज्यों से आए प्रवासियों की रही। कृषि विभाग के मुताबिक करीब 270 प्रवासियों ने खेती में हाथ आजमाए। इनमें से चल्थिया, बमोरा, बिनवाल गांव में बंजर भूमि पर भी खेती की गई। दयाकृष्ण, महेश चंद्र, भुवन, दुर्गादत्त सहित ज्यादातर प्रवासियों ने आसानी से बिकने वाले मडुवे की खेती को सबसे अधिक पसंद किया।
विज्ञापन
-::-
बंजर जमीन पर बोई गई मूंगफली :
चंपावत। बाराकोट ब्लाक के बैड़ा बैड़वाल गांव में दो दशक बाद फिर से मूंगफली की खेती शुरू हुई। जलागम की पहल से प्रवासियों ने इस काम को शुरू किया। जलागम के यूनिट अधिकारी अशोक अधिकारी का कहना है कि यहां बंजर पड़ी जमीन को आबाद कर 200 नाली क्षेत्रफल में मूंगफली बोई गई है। इस काम के लिए प्रधान मीनाक्षी जोशी व नवीन जोशी ने भी प्रवासियों को प्रेरित किया।
-::- अदरक की सामूहिक खेती भी लहलहाई
चंपावत। महामारी के बीच सूखीढांग क्षेत्र ने खेती को नई राह दिखाई है। यहां 200 नाली खाली पड़ी जमीन पर राज्य समेकित योजना के तहत अदरक की खेती की गई। सहकारी समिति के अध्यक्ष महेश चौड़ाकोटी ने बताया कि जैविक खादों के प्रयोग से यहां अदरक बोया गया। सहकारिता विभाग ने इसके अलावा गैडाख्याली में भी 200 नाली में अदरक की खेती की है।
-::-
कोरोना महामारी का खेती के क्षेत्र पर सकारात्मक असर पड़ा है। इस बार खेती को लेकर लोगों का रूझान बढ़ा है। खासकर प्रवासियों ने इसमें बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया है। इसके चलते खरीफ की खेती के रकवे में इजाफा हुआ है।
राजेंद्र उप्रेती, मुख्य कृषि अधिकारी, चंपावत।
विज्ञापन
विज्ञापन
मूंगफली की खेती करते ग्रामीण।
- फोटो : Amar Ujala
मूंगफली की खेती करते ग्रामीण।