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पुस्तकालय को 21 माह से स्टाफ का इंतजार
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
Updated Thu, 12 Jan 2017 10:44 PM IST
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चंपावत का जिला पुस्तकालय नहीं खुला
- फोटो : अमर उजाला
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चंपावत। इंटरनेट के दौर में भी किताबें अच्छी और सच्ची मित्र होती हैं, यह बात आज भी सच है। चंपावत में जिला पुस्तकालय भी खुला और लाखों रुपए की किताबें भी हैं लेकिन इसके लिए पदों का सृजन, तैनाती न होने से लोगों को पुस्तकालय का लाभ नहीं मिल सका है।
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शिक्षा मंत्री मंत्रीप्रसाद नैथानी ने मई 2015 में चंपावत में जिला पुस्तकालय का उद्घाटन किया। करीब 47 लाख रुपए की लागत से पुस्तकालय भवन बना। इसमें 2000 से अधिक किताबें हैं। ये किताबें विज्ञान, पर्यावरण, राजनीति, इतिहास, साहित्य, समाज, संस्कृति, दर्शन, नैतिक शिक्षा से लेकर विविध क्षेत्रों की हैं।
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साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित किताबें भी उपलब्ध हैं। जिला पुस्तकालय में एक साथ करीब 100 लोगों के बैठकर पढ़ने की क्षमता है लेकिन यहां पढ़ने के शौकीन इस सुविधा का खास लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। कंप्यूटर, इंटरनेट के दौर में अब भी कई लोगों में परंपरागत तरीके से किताब पढ़ने की चाहत है जबकि कई युवा सूचना प्रौद्योगिकी के दौर में ई-बुक्स भी पढ़ना चाहते हैं लेकिन समुचित स्टाफ न होने से यहां फर्श से लेकर मेज तक में धूल पड़ी है। छात्रों का कहना है कि पुस्तकालय के अक्सर बंद रहने से उन्हें पढ़ने को किताबें नहीं मिल पाती हैं।
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चंपावत जिला पुस्तकालय को शुरू हुए 21 माह से अधिक हो चुके हैं। इसके बावजूद न तो किसी पद का सृजन हुआ और न ही किसी की स्थायी तैनाती। मेज की धूल पोंछने वाला तक कोई नहीं। पुस्तकालय प्रभारी से लेकर तमाम दूसरी जिम्मेदारी यहां संबद्ध किए गए लिपिक विकास वर्मा पर है। लाइब्रेरियन, कनिष्ठ सहायक, चतुर्थ श्रेणी कर्मी, स्वच्छक के पदों का अभी सृजन होना है।