{"_id":"3cbf5eef781e86a124188559923c11aa","slug":"bhai-duj-fair-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हजारों लोग बने शोभायात्रा और जत्थों के साक्षी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हजारों लोग बने शोभायात्रा और जत्थों के साक्षी
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट
Updated Fri, 13 Nov 2015 10:24 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नेपाल सीमा के मडलक गांव में हजारों लोग मां भगवती की शोभायात्रा और जत्थों के साक्षी बने। भैय्यादूज के अवसर पर यहां के 12 गांवों के लोग सामूहिक रूप से वैष्णवी देवी मंदिर में एकत्रित होकर मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। मुख्य अतिथि ब्लॉक प्रमुख योगेश मेहता ने लोगों को पर्व की बधाई दी।
विज्ञापन
बगोटी गांव में रातभर देवडांगर अवतरित हुए। मोहनी देवी में महाकाली अवतरित हुई। बाद में डोला मजपीपल गांव के जत्थे में शामिल हो गया, जहां ब्लॉक प्रमुख ने जत्थों की अगवानी की। मजपीपल, मडलक गांवों से मां भगवती की शोभायात्रा एवं बगोटी और सैलपेडू से जत्थे निकले। मजपीपल के डोले में खीम सिंह और मडलक के डोले में शीषपाल देवी के रूप में विराजमान थे। सागर के सेल्ला लोगों ने परंपरागत रूप से मां भगवती की आवभगत की। शोभायात्रा ने देवी मैत एवं मुख्य मंदिर की परिक्रमा की। मान्यता है कि आज ही के दिन मां वैष्णवी देवी अपने माइके देवीमैत आकर भाइयों का पूजन करती हैं।
विज्ञापन
जत्थों के पीछे बड़ी संख्या में लोग मां का जयकारा करते हुए चल रहे थे। इस आयोजन में पवन जोशी, डा.सतीश पांडेय, भुवन भट्ट, शंकर पांडेय, संतोक रावत, बद्री सिंह सौन, आनंद जोशी, गणेश बोहरा, पूरन पंत, राजपाल सामंत, जोगा सिंह, दीनानाथ, मोहन पांडेय, भीम पंत, अनिल पांडेय, भवान सिंह धौनी आदि जुटे रहे। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पंचेश्वर कोतवाली के कोतवाल राजेश पांडेय पूरे दिन मेले में रहे।
विज्ञापन
खडनौला मंदिर से निकली शोभायात्रा
भैय्यादूज के अवसर पर गुमदेश के खडनौला मंदिर से भी मां भगवती की शोभायात्रा निकली, जिसमें भगवती के अवतार पूरन सिंह सामंत चंवर झुलाते हुए सभी को आशीर्वाद देते चल रहे थे। बाद में यह शोभायात्रा दो किमी दूर भगवती मंदिर में पहुंची। शोभायात्रा के पीछे महिलाएं मांगलिक गीत गाते हुए चल रही थीं। इस मेले में धौनीशिलिंग, नेवलटुकरा, चौपता, बसकुनी आदि समीपवर्ती गांवों के लोग भी शामिल होते हैं।