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Champawat News: बनबसा शारदा बैराज के आज पूरे हो जाएंगे 97 वर्ष
Wed, 10 Dec 2025 11:18 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Wed, 10 Dec 2025 11:18 PM IST
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शारदा बैराज। संवाद
बनबसा (चंपावत)। भारत नेपाल के बीच आवाजाही के लिए सेतु का काम करने वाला शारदा बैराज ने आज 11 दिसंबर को निर्माण के 97 वर्ष पूरे कर लिए हैं। अंग्रेज प्रशासकों के बनाए बैराज को 97 वर्ष पूर्व 11 दिसंबर 1928 को तत्कालीन संयुक्त प्रांत यूपी के गवर्नर सर मैलकम हेली ने 11 दिसंबर 1928 में राष्ट्र को समर्पित किया था। बैराज से निकली शारदा नहर यूपी में लाखों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई करती है। साथ ही खटीमा लोहियाहेड पॉवर हाउस को भी पानी दिया जाता है। उत्तराखंड की भूमि पर बने बैराज पर अभी भी यूपी का ही स्वामित्व है।
बनबसा फुटहिल (जहां से पहाड़ शुरू होते हैं) को नहर निकालने के लिए उपयुक्त पाकर अंग्रेज प्रशासकों ने यहां सिंचाई नहर निर्माण के लिए बैराज का निर्माण कराया था। बैराज से निकाली गई शारदा नहर बनबसा से 500 किमी. दूर रायबरेली तक लगभग 22,08,000 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई करती है। वर्ष 1856-57 में मद्रास इंजीनियर कोर के लेफ्टिनेंट एंडरसन ने फुटहिल बनबसा के लिए नहर निकालने के लिए उपयुक्त पाया और सर्वेक्षण कार्य आरंभ कर दिया। वर्ष 1857 के विद्रोह में उनके सभी अभिलेख नष्ट हो गए थे। केवल उनकी एक डायरी ही बची रही।
सन् 1867 में कैप्टन फारबेस ने एंडरसन के कार्य को आगे बढ़ाया। प्रथम विश्व युद्ध के बाद सर बरनार्ड डायरले ने पुराने सर्वेक्षण कार्य को आगे बढ़ाते हुए शारदा बैराज के निर्माण की डिजाइन तैयार की। वर्ष 1918 में बैराज का निर्माण कार्य आरंभ किया गया, जो दस वर्ष उपरांत 1928 में पूरा हुआ। इस बैराज से निकाली गई नहर सिंचाई तो करती ही है। 1956 में निर्मित 41.5 मेगावाट के लोहियाहेड पॉवर स्टेशन को संचालित करने के लिए पानी भी उपलब्ध कराती है।
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10 साल में तैयार हुआ शारदा बैराज
शारदा बैराज 10 वर्ष की कड़ी मेहनत के बाद बनकर तैयार हुआ था। बैराज निर्माण में करीब साढ़े नौ करोड़ रुपये की लागत आई थी। इसके निर्माण में करीब 25 हजार मजदूरों का श्रम लगा था। इस दौरान करीब एक हजार लोगों ने जान गवाई थीं।
भारत-नेपाल के बीच सेतु भी बना हुआ है बैराज
शारदा बैराज छह लाख क्यूसेक पानी सहने की क्षमता रखता हैष 1934 में पहली बार सर्वाधिक पांच लाख 22 हजार क्यूसेक पानी प्रवाहित हो चुका है। बाद में वर्ष 2013 में बैराज पर से करीब पांच लाख 48 हजार क्यूसेक पानी प्रवाहित हुआ था। बैराज की लंबाई करीब 600 मीटर है और इसमें 34 गेट हैं। बैराज से सिंचाई को निकाली नहर की जल प्रवाह क्षमता 11500 क्यूसेक है। नेपाल चैनल को डेढ़ हजार क्यूसेक पानी दिया जाता है।
बैराज का निर्माण अंग्रेज हुकमरानों ने ग्रेनाइड पत्थरों से कराया था। बैराज का नियमित रखरखाव किया जाता है। इससे बैराज सालों साल काम करेगा। - प्रशांत कुमार, एसडीओ, बनबसा शारदा हेडवर्क्स, यूपी सिंचाई विभाग
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बनबसा फुटहिल (जहां से पहाड़ शुरू होते हैं) को नहर निकालने के लिए उपयुक्त पाकर अंग्रेज प्रशासकों ने यहां सिंचाई नहर निर्माण के लिए बैराज का निर्माण कराया था। बैराज से निकाली गई शारदा नहर बनबसा से 500 किमी. दूर रायबरेली तक लगभग 22,08,000 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई करती है। वर्ष 1856-57 में मद्रास इंजीनियर कोर के लेफ्टिनेंट एंडरसन ने फुटहिल बनबसा के लिए नहर निकालने के लिए उपयुक्त पाया और सर्वेक्षण कार्य आरंभ कर दिया। वर्ष 1857 के विद्रोह में उनके सभी अभिलेख नष्ट हो गए थे। केवल उनकी एक डायरी ही बची रही।
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सन् 1867 में कैप्टन फारबेस ने एंडरसन के कार्य को आगे बढ़ाया। प्रथम विश्व युद्ध के बाद सर बरनार्ड डायरले ने पुराने सर्वेक्षण कार्य को आगे बढ़ाते हुए शारदा बैराज के निर्माण की डिजाइन तैयार की। वर्ष 1918 में बैराज का निर्माण कार्य आरंभ किया गया, जो दस वर्ष उपरांत 1928 में पूरा हुआ। इस बैराज से निकाली गई नहर सिंचाई तो करती ही है। 1956 में निर्मित 41.5 मेगावाट के लोहियाहेड पॉवर स्टेशन को संचालित करने के लिए पानी भी उपलब्ध कराती है।
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10 साल में तैयार हुआ शारदा बैराज
शारदा बैराज 10 वर्ष की कड़ी मेहनत के बाद बनकर तैयार हुआ था। बैराज निर्माण में करीब साढ़े नौ करोड़ रुपये की लागत आई थी। इसके निर्माण में करीब 25 हजार मजदूरों का श्रम लगा था। इस दौरान करीब एक हजार लोगों ने जान गवाई थीं।
भारत-नेपाल के बीच सेतु भी बना हुआ है बैराज
शारदा बैराज छह लाख क्यूसेक पानी सहने की क्षमता रखता हैष 1934 में पहली बार सर्वाधिक पांच लाख 22 हजार क्यूसेक पानी प्रवाहित हो चुका है। बाद में वर्ष 2013 में बैराज पर से करीब पांच लाख 48 हजार क्यूसेक पानी प्रवाहित हुआ था। बैराज की लंबाई करीब 600 मीटर है और इसमें 34 गेट हैं। बैराज से सिंचाई को निकाली नहर की जल प्रवाह क्षमता 11500 क्यूसेक है। नेपाल चैनल को डेढ़ हजार क्यूसेक पानी दिया जाता है।
बैराज का निर्माण अंग्रेज हुकमरानों ने ग्रेनाइड पत्थरों से कराया था। बैराज का नियमित रखरखाव किया जाता है। इससे बैराज सालों साल काम करेगा। - प्रशांत कुमार, एसडीओ, बनबसा शारदा हेडवर्क्स, यूपी सिंचाई विभाग