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भोजनमाता विवाद प्रकरण: नियुक्ति विवाद खत्म, सोमवार को सभी छात्रों ने साथ बैठकर खाया खाना

Mon, 27 Dec 2021 08:05 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, टनकपुर (चंपावत)
संवाद न्यूज एजेंसी, टनकपुर (चंपावत) Published by: हल्द्वानी ब्यूरो Updated Mon, 27 Dec 2021 08:05 PM IST
सार

सूखीढांग जीआईसी में भोजनमाता नियुक्ति प्रकरण की जांच सोमवार को पूरी हो गई। मुख्य शिक्षाधिकारी आरसी पुरोहित के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति ने कॉलेज पहुंच जांच की।

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Bhojanmata controversy in Uttarakhand: Appointment of Bhojanmata in Gic Sukhidhang
सभी छात्र-छात्राओं ने साथ में खाया खाना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंपावत जिले के सूखीढांग जीआईसी में सामने आया भोजनमाता नियुक्ति विवाद अब सुलझता दिखाई दे रहा है। सोमवार को जीआईसी में 66 में से 61 छात्र-छात्रा उपस्थित थे। जिन्होंने साथ में भोजन किया।

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भोजनमाता नियुक्ति विवाद के बीच सोमवार को जीआईसी सूखीढांग का माहौल खुशनुमा और रोज की तरह सामान्य था। पहले सवर्ण छात्रों द्वारा, फिर शुक्रवार को अनुसूचित छात्रों द्वारा एमडीएम (मध्यान्ह भोजन योजना) के खाने के विरोध से माहौल में कड़ुवाहट थी। लेकिन प्रशासन और ग्रामीणों की पहल से शनिवार को विवाद निपटा लिया गया। इसके चलते छठीं से आठवीं कक्षा तक के ६६ छात्र-छात्राओं में से सोमवार को उपस्थित सभी ६१ छात्र-छात्राओं ने एक साथ सौहार्दपूर्ण माहौल में भोजन किया। जांच को पहुंची अधिकारियों की टीम ने भी छात्रों के साथ ही खाना खाया। टनकपुर के एसडीएम हिमांशु कफल्टिया ने हालात का जायजा लेने के लिए तहसीलदार पिंकी आर्या को भी स्कूल भेजा। उन्होंने छात्र-छात्राओं की काउंसलिंग भी की।
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सीईओ आरसी पुरोहित, बीईओ अंशुल बिष्ट, तहसीलदार पिंकी आर्या ने कहा कि छात्र-छात्राओं के साथ भोजन करने से एकजुटता और सकारात्मकता का संदेश देने में मदद मिली। २६ से १०० छात्र होने पर दो भोजनमाता रखे जाने का प्रावधान है। फिलहाल यहां एक ही भोजनमाता विमलेश उप्रेती तैनात हैं। सीईओ ने कहा कि दूसरी भोजनमाता की तैनाती नियमों के मुताबिक की जाएगी।

तीन सदस्यीय समिति ने पूरी की जांच, दस्तावेज जांचने के साथ बयान भी लिए
सूखीढांग जीआईसी में भोजनमाता नियुक्ति प्रकरण की जांच सोमवार को पूरी हो गई। मुख्य शिक्षाधिकारी आरसी पुरोहित के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति ने कॉलेज पहुंच जांच की। दस्तावेजों की पड़ताल के साथ भोजनमाता, एसएमसी, पीटीए के अलावा स्कूल के संबंधित कर्मी-शिक्षकों के बयान लिए गए। डीएम विनीत तोमर ने तीन सदस्यीय जांच समिति को एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे।


जांच अधिकारी सीईओ आरसी पुरोहित, जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी राजेश कुमार और सहायक परियोजना निदेशक विम्मी जोशी की टीम जांच के लिए पहुंची। दो घंटे से अधिक समय तक मध्यान्ह भोजन योजना के दस्तावेजों की जांच के अलावा मामले से संबंधित पक्षों के बयान लिए गए। सीईओ ने बताया कि जांच पूरी कर ली गई है। रिपोर्ट बुधवार तक जिलाधिकारी को सौंप दी जाएगी। बता दें कि जीआईसी में भोजनमाता की तैनाती के लिए नवंबर और दिसंबर में दो बार विज्ञप्ति निकाली गई। भोजनमाता के लिए दो नामों पुष्पा भट्ट और सुनीता देवी के बीच विवाद की स्थिति बनी रही।

ये है विवाद की वजह
सूखीढांग जीआईसी में दूसरी भोजनमाता की नियुक्ति के लिए पहली बैठक १५ नवंबर को हुई। प्रधानाचार्य प्रेम सिंह ने बताया कि बैठक में कुल ११ आवेदन आए। लेकिन एक आवेदन विमला देवी का बेटा अंकित भट्ट ११वीं कक्षा का छात्र होने से आवेदन पत्र खारिज हो गया। बचे १० आवेदनों में ५ अनुसूचित जाति और ५ सवर्ण जाति के थे। पुष्पा भट्ट और सुनीता देवी के नाम में विवाद होने से इस बैठक में अंतिम चयन नहीं हो सका। नियुक्ति के लिए दूसरी बैठक ४ दिसंबर को रखी गई। जिसमें चयन समिति ने सुनीता देवी के आवेदन को नियम के अनुरूप पाया। लेकिन कुछ लोगों के विरोध के चलते नियुक्ति विवाद फिर भी नहीं थमा। इस बीच कई छात्र-छात्राओं ने एससी भोजनमाता का बनाया खाना नहीं खाया। प्रतिक्रिया स्वरूप २४ दिसंबर को एससी जाति के २३ छात्रों ने सवर्ण भोजनमाता का बनाया खाना छोड़ दिया।

भोजनमाता की तैनाती के ये हैं दिशा-निर्देश
भोजनमाता के आवेदक का बच्चा अनिवार्य रूप से स्कूल में पढ़ता हो।
सबसे छोटी कक्षा में पढ़ने वाले छात्र-छात्रा की मां को वरीयता दी जाएगी।
एससी-एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग को वरीयता।
भोजनमाता का बीपीएल होना अनिवार्य है।

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