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और बंद हो गया तल्लादेश का आईटीआई...
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
Updated Sun, 10 Dec 2017 10:27 PM IST
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तल्लादेश आईटीआई का निर्माणाधीन भवन।
- फोटो : अमर उजाला
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नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश का औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) सिर्फ दो साल में बंद हो गया। मंच गांव के जीआईसी के दो कमरों में चलने वाले इस संस्थान में पहली दिसंबर से बाकायदा ताला लटक गया है। इस बार न तो यहां नए प्रवेश की अनुमति थी और नहीं कोई छात्र यहां दाखिले के लिए आया।
मंच के 6 छात्रों ने इलैक्ट्रिशियन ट्रेड के दूसरे वर्ष की नवंबर में टनकपुर आईटीआई के परीक्षा केंद्र में परीक्षा दी। इस परीक्षा के बाद से अब पहली दिसंबर से मंच का आईटीआई पूरी तरह से छात्रविहीन हो चुका है। अलबत्ता सामान व उपकरणों की हिफाजत के लिए एक चतुर्थ श्रेणी कर्मी को अभी भी यहां तैनात किया गया है। आईटीआई तो बंद हो चुका है। इलैक्ट्रिशियन, मशीनिष्ट और कंप्यूटर ऑफ प्रोग्रामिंग एप्लीकेशन (कोपा) तीन ट्रेड स्वीकृत थे, लेकिन संचालित एक ही हो सका, और तो और दो साल में यहां एक भी अनुदेशक की नियुक्ति नहीं हुई है। अलबत्ता कुछ वक्त के लिए चंपावत से एक अनुदेशक विष्णु कुमार को मंच जरूर भेजा गया।
तल्लादेश में 26 सितंबर 2015 को आईटीआई खुलने से नौजवानों में खासा उत्साह था। उम्मीद थी कि तल्लादेश के कई गांवों के छात्र-छात्राओं को आईटीआई के लिए घर से दूर दूसरे शहर नहीं जाना पड़ेगा। गांव के पास ही पढ़ाई की सुविधा के साथ ही अभिभावकों की जेब पर बोझ भी नहीं पड़ेगा। लेकिन यहां के युवकों का ये सपना फिलहाल टूट चुका है। ग्राम प्रधान पूजा महरा सहित यहां के प्रतिनिधियों का कहना है कि पढ़ाने वालों की कमी के चलते छात्र यहां प्रवेश लेने से कन्नी काट रहे हैं।
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1.95 करोड़ के भवन का क्या होगा उपयोग
तल्लादेश आईटीआई भले ही बदहाली के चलते बंद हो गया है, लेकिन यहां इसका भवन तेजी से बन रहा है। 195.47 लाख रुपये से बनने वाली इस इमारत का भूतल व पहली मंजिल बन भी चुकी है। ऐसे में लोग इस इमारत के उपयोग पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।
छात्र संख्या के 50 प्रतिशत से ज्यादा प्रवेश जरूरी: नोडल अधिकारी
चंपावत जिले के सभी सात आईटीआई का नोडल कार्यालय टनकपुर में है। टनकपुर आईटीआई के प्रभारी आरएस बिष्ट का कहना है कि तल्लादेश का आईटीआई फिलहाल बंद कर दिया गया है। इसमें एक भी छात्र नहीं है। उनका कहना है कि पिछले साल सितंबर में निदेशक द्वारा जारी आदेश के क्रम में ये निर्णय लिया गया है। आदेश में कहा गया था कि किसी भी ट्रेड में नए प्रवेश तभी हो सकेंगे, जब पिछले साल की छात्र संख्या के 50 प्रतिशत से ज्यादा प्रवेश होने के साथ ही संबंधित ट्रेड के अनुदेशक की तैनाती भी हो। तल्लादेश के आईटीआई में न तो दाखिले ही हुए और नहीं अनुदेशक थे।
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मंच के 6 छात्रों ने इलैक्ट्रिशियन ट्रेड के दूसरे वर्ष की नवंबर में टनकपुर आईटीआई के परीक्षा केंद्र में परीक्षा दी। इस परीक्षा के बाद से अब पहली दिसंबर से मंच का आईटीआई पूरी तरह से छात्रविहीन हो चुका है। अलबत्ता सामान व उपकरणों की हिफाजत के लिए एक चतुर्थ श्रेणी कर्मी को अभी भी यहां तैनात किया गया है। आईटीआई तो बंद हो चुका है। इलैक्ट्रिशियन, मशीनिष्ट और कंप्यूटर ऑफ प्रोग्रामिंग एप्लीकेशन (कोपा) तीन ट्रेड स्वीकृत थे, लेकिन संचालित एक ही हो सका, और तो और दो साल में यहां एक भी अनुदेशक की नियुक्ति नहीं हुई है। अलबत्ता कुछ वक्त के लिए चंपावत से एक अनुदेशक विष्णु कुमार को मंच जरूर भेजा गया।
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तल्लादेश में 26 सितंबर 2015 को आईटीआई खुलने से नौजवानों में खासा उत्साह था। उम्मीद थी कि तल्लादेश के कई गांवों के छात्र-छात्राओं को आईटीआई के लिए घर से दूर दूसरे शहर नहीं जाना पड़ेगा। गांव के पास ही पढ़ाई की सुविधा के साथ ही अभिभावकों की जेब पर बोझ भी नहीं पड़ेगा। लेकिन यहां के युवकों का ये सपना फिलहाल टूट चुका है। ग्राम प्रधान पूजा महरा सहित यहां के प्रतिनिधियों का कहना है कि पढ़ाने वालों की कमी के चलते छात्र यहां प्रवेश लेने से कन्नी काट रहे हैं।
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1.95 करोड़ के भवन का क्या होगा उपयोग
तल्लादेश आईटीआई भले ही बदहाली के चलते बंद हो गया है, लेकिन यहां इसका भवन तेजी से बन रहा है। 195.47 लाख रुपये से बनने वाली इस इमारत का भूतल व पहली मंजिल बन भी चुकी है। ऐसे में लोग इस इमारत के उपयोग पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।
छात्र संख्या के 50 प्रतिशत से ज्यादा प्रवेश जरूरी: नोडल अधिकारी
चंपावत जिले के सभी सात आईटीआई का नोडल कार्यालय टनकपुर में है। टनकपुर आईटीआई के प्रभारी आरएस बिष्ट का कहना है कि तल्लादेश का आईटीआई फिलहाल बंद कर दिया गया है। इसमें एक भी छात्र नहीं है। उनका कहना है कि पिछले साल सितंबर में निदेशक द्वारा जारी आदेश के क्रम में ये निर्णय लिया गया है। आदेश में कहा गया था कि किसी भी ट्रेड में नए प्रवेश तभी हो सकेंगे, जब पिछले साल की छात्र संख्या के 50 प्रतिशत से ज्यादा प्रवेश होने के साथ ही संबंधित ट्रेड के अनुदेशक की तैनाती भी हो। तल्लादेश के आईटीआई में न तो दाखिले ही हुए और नहीं अनुदेशक थे।