{"_id":"6240bbfccbe27b0128470b39","slug":"amarujala-abhiyan-in-champawat-champawat-news-hld4576157174","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्कूल से बच्चे झिझक रहे न शिक्षक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्कूल से बच्चे झिझक रहे न शिक्षक
विज्ञापन
प्रबंधक श्याम सिंह कार्की।
- फोटो : CHAMPAWAT
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंपावत/लोहाघाट। कोरोना से उबरते हुए अब बच्चे स्कूल जाने में न हिचक रहे हैं न झिझक लेकिन उनकी सीखने-समझने की सामर्थ्य में जरूर कमी आई है। इसके पीछे कक्षाओं के लंबे वक्त तक बंद रहने के अलावा ऑनलाइन कक्षाओं से पढ़ाई को समझाने-समझने की सीमा रही। शिक्षकों का कहना है कि इससे ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं है। इन हालात में धीरे-धीरे स्कूली शिक्षण के साथ सुधार हो रहा है और आगे तेजी से होगा। सबसे अच्छी बात यह है कि स्कूलों में उपस्थिति लगातार बढ़ रही है। स्कूल प्रबंधन की ओर से भी बच्चों को इसके लिए अलग तरह से प्रेरित किया जा रहा है। परीक्षा भी बच्चे उत्साह से दे रहे हैं। इससे बच्चे सीखने की प्रक्रिया में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। कुल 15367 में से 13984 (91 प्रतिशत) से अधिक छात्र-छात्राओं ने बिना किसी संशय के स्कूल का रुख किया जबकि वर्चुअल पद्धति से करीब 45 प्रतिशत बच्चे ही पढ़ सके थे।
ऑनलाइन पढ़ाई में गांवों में नेटवर्क बाधा बनी थी। इस कारण बच्चों को बड़ा नुकसान हुआ। हां अब बच्चे पूरे मनोयोग से पढ़ाई कर रहे हैं। अभिभावकों की काउंसिलिंग के बाद पिछले पाठ्यक्रम को समझाने के लिए शिक्षक भी खूब मेहनत कर रहे हैं।
- श्याम सिंह कार्की, प्रबंधक, यूसीएसएस स्कूल, चंपावत।
कोविड से पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई लेकिन अब स्कूल खुलने पर बच्चे उत्साह से पढ़ाई कर रहे हैं। खेल-खेल में शिक्षण पद्धति से बच्चों को सहज तरीके से सीखाया जा रहा है। पढ़ाई के गैप को दूर करने के लिए अतिरिक्त कक्षाओं की मदद ली जा रही है।
विज्ञापन
- देवेंद्र थ्वाल, प्रधानाचार्य, एंजिल्स एकेडमी, चंपावत।
कोविड काल में स्मार्ट कक्षाओं के माध्यम से बच्चों को पढ़ाने पर जोर दिया गया। वर्चुअल पढ़ाई में बच्चों को ऑनलाइन में अधिकतर पाठ्य सामग्री समझने में दिक्कतें आती थीं, वह दिक्कत अब दूर हो रही है। अब बच्चे बेझिझक स्कूल आ रहे हैं।
- संजय मुरारी, प्रधानाचार्य, मल्लिकार्जुन स्कूल, चंपावत।
विज्ञापन
ऑनलाइन पढ़ाई में गांवों में नेटवर्क बाधा बनी थी। इस कारण बच्चों को बड़ा नुकसान हुआ। हां अब बच्चे पूरे मनोयोग से पढ़ाई कर रहे हैं। अभिभावकों की काउंसिलिंग के बाद पिछले पाठ्यक्रम को समझाने के लिए शिक्षक भी खूब मेहनत कर रहे हैं।
विज्ञापन
- श्याम सिंह कार्की, प्रबंधक, यूसीएसएस स्कूल, चंपावत।
कोविड से पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हुई लेकिन अब स्कूल खुलने पर बच्चे उत्साह से पढ़ाई कर रहे हैं। खेल-खेल में शिक्षण पद्धति से बच्चों को सहज तरीके से सीखाया जा रहा है। पढ़ाई के गैप को दूर करने के लिए अतिरिक्त कक्षाओं की मदद ली जा रही है।
विज्ञापन
- देवेंद्र थ्वाल, प्रधानाचार्य, एंजिल्स एकेडमी, चंपावत।
कोविड काल में स्मार्ट कक्षाओं के माध्यम से बच्चों को पढ़ाने पर जोर दिया गया। वर्चुअल पढ़ाई में बच्चों को ऑनलाइन में अधिकतर पाठ्य सामग्री समझने में दिक्कतें आती थीं, वह दिक्कत अब दूर हो रही है। अब बच्चे बेझिझक स्कूल आ रहे हैं।
- संजय मुरारी, प्रधानाचार्य, मल्लिकार्जुन स्कूल, चंपावत।