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इलाज और जज्बे से गले के कैंसर को पछाड़ा तो बंद आवाज भी फिर से शुरू हुई
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Alert For Cansar in Champawat
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चंपावत। कैंसर का नाम हर किसी को खौफ में डाल सकता है। इससे होने वाली पीड़ा बेहद खतरनाक है लेकिन जिले में कुछ लोग बहादुरी से इसका मुकाबला भी कर रहे हैं। इस तकलीफ के बीच भी वे सहज रूप से जी रहे हैं। ये जज्बा दिखाया है रोडवेज के एक सेवानिवृत्ति कर्मी ने। गले के कैंसर से बोलने में असमर्थ होने के बावजूद वे रोजमर्रा के काम को बखूबी कर रहे हैं।
चंपावत ब्लॉक के एक रोडवेज कार्मिक को सात साल पहले गले में फुंसी हुई। उन्होंने इसे मामूली समझा। दर्द कम न होने पर परीक्षण कराए बगैर सामान्य दवा से काम चलाया। वह रोजमर्रा के काम करते रहे लेकिन इस दवा से कोई असर नहीं हुआ और दर्द भी बढ़ता गया। हालात बिगड़ने पर दिल्ली के एक निजी अस्पताल पहुंचे और जांच हुई तो गले के कैंसर का पता चला। दो साल तक दवा चलने और अन्य उपचार के बाद हालात में कुछ सुधार हुआ। इस बीच 59 साल के कैंसर पीड़ित व्यक्ति ने काउसंलिग का सहारा लिया।
योग और प्राकृतिक जीवन शैली अपनाई। अब वह स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। रोडवेज कर्मी ने बताया कि कठिन परेशानी के बीच उन्होंने खानपान में परहेज, संयमित जीवन, कठोर दिनचर्या का पालन कर कैंसर को काफी हद तक काबू किया। उन्हें इस बात की पीड़ा है कि इस काम में समाज खास सहयोग के बजाय मुंह मोड़ लेता है। परिवार और नाते-रिश्तेदारों ने इस कठिन मौके पर भावनात्मक सहयोग दिया। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि कैंसर रोग से लड़ने के लिए इलाज के साथ ही मजबूत इच्छा शक्ति भी चाहिए।
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लक्षण मिलने पर निशुल्क हो रही जांच
चंपावत। समय पर रोग का पता चलने पर कैंसर से लड़ना आसान है। जिला अस्पताल में गैर संक्रामक रोग निवारण और नियंत्रण कार्यक्रम (एनसीडीसीपी) के जरिये ऐसी ही पहल की जा रही है। पीएमएस डॉ. एचएस ऐरी का कहना है कि प्रचार-प्रसार के अलावा एनसीडीसीपी कार्यक्रम के जरिये कैंसर के शुरुआती लक्षण वाले रोगी की मदद मुमकिन है। ऐसे लोगों को सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी रेफर किया जाता है। बीते एक साल में 37 कैंसर के मरीज रेफर किए जाते हैं। वैसे चार साल से शुरू इस कार्यक्रम के तहत कैंसर के शुरुआती लक्षण मिलने से जिले से 93 लोगों को हल्द्वानी के मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।
पीएमएस का कहना है कि योजना के तहत 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए निशुल्क सुविधाएं हैं। कैंसर के अलावा उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदयरोग से संबंधित रोगों का भी पता लगाया जा रहा है। ऐसे रोगों के अंदेशे वाले लोगों के ब्लड शुगर, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, ईसीजी की जांच की जा रही है। रोग होने पर इलाज और परामर्श के अलावा विशेषज्ञ इलाज की जरूरत होने पर रोगी को मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी भेजा जाता है।
ऐसे बचे कैंसर से...
चंपावत। किसी रोग का लंबे समय तक ठीक न होने, अचानक वजन घटने, भूख न लगने, पेट, छाती में दर्द के कारणों का पता न लगने पर आगाह हो जाना चाहिए। ये कैंसर के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं, ऐसे में तुरंत परीक्षण कराया जाना चाहिए। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल कहते हैं कि शुरुआत में कैंसर का पता न चलने से इसके शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने के खतरे बढ़ जाते हैं। देरी से इलाज भी कठिन हो जाता है। लक्षणों को जान कैंसर की जांच के लिए बायोप्सी से पता लगाया जा सकता है। बायोप्सी में शरीर से कोशिकाएं या ऊतक निकालकर जांच की जाती है।
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चंपावत ब्लॉक के एक रोडवेज कार्मिक को सात साल पहले गले में फुंसी हुई। उन्होंने इसे मामूली समझा। दर्द कम न होने पर परीक्षण कराए बगैर सामान्य दवा से काम चलाया। वह रोजमर्रा के काम करते रहे लेकिन इस दवा से कोई असर नहीं हुआ और दर्द भी बढ़ता गया। हालात बिगड़ने पर दिल्ली के एक निजी अस्पताल पहुंचे और जांच हुई तो गले के कैंसर का पता चला। दो साल तक दवा चलने और अन्य उपचार के बाद हालात में कुछ सुधार हुआ। इस बीच 59 साल के कैंसर पीड़ित व्यक्ति ने काउसंलिग का सहारा लिया।
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योग और प्राकृतिक जीवन शैली अपनाई। अब वह स्वस्थ जीवन जी रहे हैं। रोडवेज कर्मी ने बताया कि कठिन परेशानी के बीच उन्होंने खानपान में परहेज, संयमित जीवन, कठोर दिनचर्या का पालन कर कैंसर को काफी हद तक काबू किया। उन्हें इस बात की पीड़ा है कि इस काम में समाज खास सहयोग के बजाय मुंह मोड़ लेता है। परिवार और नाते-रिश्तेदारों ने इस कठिन मौके पर भावनात्मक सहयोग दिया। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल का कहना है कि कैंसर रोग से लड़ने के लिए इलाज के साथ ही मजबूत इच्छा शक्ति भी चाहिए।
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लक्षण मिलने पर निशुल्क हो रही जांच
चंपावत। समय पर रोग का पता चलने पर कैंसर से लड़ना आसान है। जिला अस्पताल में गैर संक्रामक रोग निवारण और नियंत्रण कार्यक्रम (एनसीडीसीपी) के जरिये ऐसी ही पहल की जा रही है। पीएमएस डॉ. एचएस ऐरी का कहना है कि प्रचार-प्रसार के अलावा एनसीडीसीपी कार्यक्रम के जरिये कैंसर के शुरुआती लक्षण वाले रोगी की मदद मुमकिन है। ऐसे लोगों को सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी रेफर किया जाता है। बीते एक साल में 37 कैंसर के मरीज रेफर किए जाते हैं। वैसे चार साल से शुरू इस कार्यक्रम के तहत कैंसर के शुरुआती लक्षण मिलने से जिले से 93 लोगों को हल्द्वानी के मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।
पीएमएस का कहना है कि योजना के तहत 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए निशुल्क सुविधाएं हैं। कैंसर के अलावा उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदयरोग से संबंधित रोगों का भी पता लगाया जा रहा है। ऐसे रोगों के अंदेशे वाले लोगों के ब्लड शुगर, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, ईसीजी की जांच की जा रही है। रोग होने पर इलाज और परामर्श के अलावा विशेषज्ञ इलाज की जरूरत होने पर रोगी को मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी भेजा जाता है।
ऐसे बचे कैंसर से...
चंपावत। किसी रोग का लंबे समय तक ठीक न होने, अचानक वजन घटने, भूख न लगने, पेट, छाती में दर्द के कारणों का पता न लगने पर आगाह हो जाना चाहिए। ये कैंसर के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं, ऐसे में तुरंत परीक्षण कराया जाना चाहिए। सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल कहते हैं कि शुरुआत में कैंसर का पता न चलने से इसके शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने के खतरे बढ़ जाते हैं। देरी से इलाज भी कठिन हो जाता है। लक्षणों को जान कैंसर की जांच के लिए बायोप्सी से पता लगाया जा सकता है। बायोप्सी में शरीर से कोशिकाएं या ऊतक निकालकर जांच की जाती है।