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जंगली जानवरों के बाद अब प्रकृति की मार
नवल जोशी/अमर उजाला, लोहाघाट (चंपावत)
Updated Thu, 29 Dec 2016 10:21 PM IST
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पाला
- फोटो : अमर उजाला
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एक ओर जहां किसान जंगली जानवरों और लावारिस पशुओं के आतंक से परेशान हैं, वहीं अब प्रकृति भी किसानों पर कहर ढाने लगी है। बारिश न होने से किसानों ने हाड़तोड़ मेहनत कर नौलों-गधेरों से पानी लाकर सब्जियों को लगाया था, लेकिन जब उनकी सब्जियां तैयार होने को है तो पाला उनकी मेहनत पर पानी फेर रहा है।
जंगली और लावारिस जानवर किसानों की फसलों को तो लगातार चौपट करते आ रहे हैं। वहीं, अब लगातार गिर रहे भारी पाले से किसानों की सब्जियां खराब होती जा रही है। इस मौसम में किसान राई, पालक, मेथी, मूली आदि बेचकर आजीविका चलाते थे, लेकिन अब पाले ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है। पाले के चलते उनकी फसलें पीली होकर बर्बाद होती जा रही हैं।
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पाले के कारण हरी सब्जियां चौपट
रायनगर चौड़ी के प्रगतिशील किसान बल्देव राय का कहना है कि वे इस मौसम में करीब 20-30 हजार रुपए की सब्जी बेच लिया करते थे। पाले के चलते उनकी सारी फसल चौपट हो गई है। इससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। पालक, मेथी, राई पाले की चपेट में आ गई है। उनका कहना है कि इस वर्ष भारी पाला गिर रहा है। इससे फसल पीली पड़ जा रही है।
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करीब 80 फीसदी फसल बर्बाद
किसान गणेश दत्त राय का कहना है कि वे सर्दियों में करीब 30 हजार रुपए तक की सब्जी का कारोबार करते हैं। वर्षा न होने से बड़ी मुश्किल से पानी लाकर खेतों में सब्जियां लगाई गई। लेकिन अब भारी मात्रा में पाला गिरने से उनकी करीब 80 फीसदी सब्जी की फसल बर्बाद हो गई है।
किसान खेतों में नमी बनाए रखें
एडीओ उद्यान भूपेंद्र प्रकाश जोशी का कहना है कि अत्यधिक पाला गिरने से फसल खराब हो जाती है। उन्होंने किसानों को सुझाव दिया कि वे खेतों में नमी बनाए रखें। हर दूसरे-तीसरे दिन खेतों की सिंचाई करने के बाद निराई-गुड़ाई करें। उनका कहना है कि यदि जमीन शुष्क रहेगी तो पाले का प्रभाव अधिक प्रभाव पड़ेगा।