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ब्रिटिश सरकार ने बोहरा को किया था सम्मानित
Champawat
Updated Sun, 16 Dec 2012 05:30 AM IST
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लोहाघाट। कालीकुमांऊ की धरती में खतेड़ा गांव के स्व. कैप्टन मोहन सिंह बोहरा कुमांऊ क्षेत्र के पहले व्यक्ति थे, जिन्हें उनके शौर्य, पराक्रम एवं दिलेरी के लिए ओबीआई जैसे सम्मान से ब्रिटिश सरकार ने सम्मानित किया था। स्व. श्री बोहरा ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हांगकांग में जापान एवं जर्मनी के बीच हुए युद्ध में भारतीय सेना की टुकड़ी का नेतृत्व करते हुए जो पराक्रम दिखाया, उससे प्रभावित होकर उन्हें सिकत्तर एवं जमींदार की पदवी भी दी गई। यह ब्रिटिश शासनकाल में सबसे बड़ा सम्मान माना जाता था। यही नहीं कैप्टन बोहरा की इस जांबाजी पर उन्हें ब्रिटिश सरकार ने अल्मोड़ा जिले के अयारतोली मल्ला कत्यूर दानपुर में 100 नाली भूमि भी इनाम स्वरूप दी थी तथा डिप्टी कमिश्नर अल्मोड़ा के हस्ताक्षराें से इन्हें भूमि का पट्टा दिया गया था।
कैप्टन बोहरा आजादी के बाद जनरल करिअप्पा को भी कुमांऊ के दौरे पर लाए थे तथा लोहाघाट में उन्होंने प्रवास किया था। कैप्टन बोहरा ने सेवानिवृत्ति के बाद क्षेत्र के गरीब बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया तथा लोहाघाट स्थित उनके आवास में दर्जनों गरीब बच्चे निशुल्क पढ़ा करते थे। जो बाद में ऊंचे ओहदों में पहुंचे। उन्हें विरासत में मिली भूमि की जानकारी उनके एकमात्र पुत्र रिटायर्ड रेडियो इंस्पेक्टर विक्रम सिंह बोहरा को छह माह पूर्व दस्तावेजों को देखने के बाद हुई है।
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कैप्टन बोहरा आजादी के बाद जनरल करिअप्पा को भी कुमांऊ के दौरे पर लाए थे तथा लोहाघाट में उन्होंने प्रवास किया था। कैप्टन बोहरा ने सेवानिवृत्ति के बाद क्षेत्र के गरीब बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया तथा लोहाघाट स्थित उनके आवास में दर्जनों गरीब बच्चे निशुल्क पढ़ा करते थे। जो बाद में ऊंचे ओहदों में पहुंचे। उन्हें विरासत में मिली भूमि की जानकारी उनके एकमात्र पुत्र रिटायर्ड रेडियो इंस्पेक्टर विक्रम सिंह बोहरा को छह माह पूर्व दस्तावेजों को देखने के बाद हुई है।
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