{"_id":"5c13f1c2bdec2253ad6ee0d7","slug":"61544810946-champawat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बुजुर्ग दंपति के मजबूत इरादों से लहलहाया फलों का बगीचा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बुजुर्ग दंपति के मजबूत इरादों से लहलहाया फलों का बगीचा
Updated Fri, 14 Dec 2018 11:39 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पाटी (चंपावत)। पाटी विकासखंड के जौलामेल गांव में एक खूबसूरत बगीचा दूर से ही लोगों का ध्यान खींचता है। सहकारिता विभाग से सेवानिवृत्त बहादुर सिंह मेहता और उनकी पत्नी भैरवी देवी ने बिना किसी सरकारी इमदाद के अपने मजबूत इरादे और मेहनत से 40 नाली क्षेत्र में फलों का बगीचा लहलहाया है। इससे वे सालाना 60 हजार से ज्यादा की आय कमाते हैं।
पाटी तहसील मुख्यालय से कुछ दूरी पर स्थित जौलाड़ी गांव में बगीचे में सेब, माल्टा, नाशपाति, आड़ू, खुमानी, प्लम, अनार और अखरोट के कुल 310 पेड़ के अलावा बांज का जंगल भी विकसित किया है। बगीचे के मालिक मेहता बताते हैं कि सालभर में वे इन पेड़ों से औसतन 300 कुंतल से अधिक फलों का उत्पादन कर लेते हैं। पूरी तरह जैविक और ताजगी से भरपूर इन फलों के लिए बाजार की कोई दिक्कत नहीं है। चंपावत, पिथौरागढ़ और नैनीताल जिले के लोग इन फलों को हाथोंहाथ लेते हैं। वर्षभर में इन फलों से 60 हजार रुपये से अधिक की आय कमाते हैं।
वह बताते हैं कि बगीचों को विकसित करना आसान नहीं था। चार दशक पूर्व उन्होंने यहां सड़क विहीन गांव में बंजर जमीन खरीदी। खुद नौकरी में होने के चलते पत्नी भैरवी देवी ने इस जमीन का उपयोग पशुपालन के रूप में किया। डेढ़ दशक पूर्व कुछ पौधों से शुरू यह सफर अब फलों के शानदार बगीचे में बदल गया है। इस शानदार बगीचे में भैरवी देवी गड्ढे बनाने से लेकर खाद के छिड़काव में हाथ बंटातीं थीं। दो साल पूर्व रिटायरमेंट के बाद मेहता ने बगीचे को संवार इसमें बढ़ोत्तरी करने को अपना लक्ष्य ही बना लिया। इलाके की शान इस बगीचे को अबतक कोई सरकारी इमदाद नहीं मिली है।
विज्ञापन
परंपरागत खेती के नुकसान से बागवानी में आजमाए हाथ
सहकारी समिति में सचिव रहे बहादुर सिंह मेहता और उनकी पत्नी भैरवी देवी ने परंपरागत कृषि में नुकसान के बाद बागवानी में हाथ आजमाए। फलों के बगीचे को निर्मित करने से पूर्व उन्होंने इसकी बारीकियों को समझा। उम्दा श्रेणी के पौधों से लेकर खाद और पौधों को विकसित करने के लिए हर कदम पर पूरी तवज्जो दी। मेहता बताते हैं कि बगीचे से न केवल आमदनी हो रही है, बल्कि पर्यावरण भी बेहतर हो रहा है।
विज्ञापन
पाटी तहसील मुख्यालय से कुछ दूरी पर स्थित जौलाड़ी गांव में बगीचे में सेब, माल्टा, नाशपाति, आड़ू, खुमानी, प्लम, अनार और अखरोट के कुल 310 पेड़ के अलावा बांज का जंगल भी विकसित किया है। बगीचे के मालिक मेहता बताते हैं कि सालभर में वे इन पेड़ों से औसतन 300 कुंतल से अधिक फलों का उत्पादन कर लेते हैं। पूरी तरह जैविक और ताजगी से भरपूर इन फलों के लिए बाजार की कोई दिक्कत नहीं है। चंपावत, पिथौरागढ़ और नैनीताल जिले के लोग इन फलों को हाथोंहाथ लेते हैं। वर्षभर में इन फलों से 60 हजार रुपये से अधिक की आय कमाते हैं।
विज्ञापन
वह बताते हैं कि बगीचों को विकसित करना आसान नहीं था। चार दशक पूर्व उन्होंने यहां सड़क विहीन गांव में बंजर जमीन खरीदी। खुद नौकरी में होने के चलते पत्नी भैरवी देवी ने इस जमीन का उपयोग पशुपालन के रूप में किया। डेढ़ दशक पूर्व कुछ पौधों से शुरू यह सफर अब फलों के शानदार बगीचे में बदल गया है। इस शानदार बगीचे में भैरवी देवी गड्ढे बनाने से लेकर खाद के छिड़काव में हाथ बंटातीं थीं। दो साल पूर्व रिटायरमेंट के बाद मेहता ने बगीचे को संवार इसमें बढ़ोत्तरी करने को अपना लक्ष्य ही बना लिया। इलाके की शान इस बगीचे को अबतक कोई सरकारी इमदाद नहीं मिली है।
विज्ञापन
परंपरागत खेती के नुकसान से बागवानी में आजमाए हाथ
सहकारी समिति में सचिव रहे बहादुर सिंह मेहता और उनकी पत्नी भैरवी देवी ने परंपरागत कृषि में नुकसान के बाद बागवानी में हाथ आजमाए। फलों के बगीचे को निर्मित करने से पूर्व उन्होंने इसकी बारीकियों को समझा। उम्दा श्रेणी के पौधों से लेकर खाद और पौधों को विकसित करने के लिए हर कदम पर पूरी तवज्जो दी। मेहता बताते हैं कि बगीचे से न केवल आमदनी हो रही है, बल्कि पर्यावरण भी बेहतर हो रहा है।