{"_id":"595fc9ba4f1c1b85608b45f8","slug":"201499449786-champawat-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आपदा के मद्देनजर खतरनाक हैं 27 स्कूल भवन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आपदा के मद्देनजर खतरनाक हैं 27 स्कूल भवन
Updated Fri, 07 Jul 2017 11:19 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
चंपावत। जनपद में 27 स्कूलों के भवन काफी जर्जर बने हुए हैं। इन स्कूलों में पढ़ रहे सैकड़ों विद्यार्थी खतरे के साये पढ़ाई करने को मजबूर हैं। इसके अलावा 64 स्कूल नदी-नालों के समीप और भूस्खलन के लिए संवेदनशील जगहों में बने हुए हैं।
शिक्षा विभाग के मुताबिक चंपावत जिले में प्राइमरी, जूनियर, पूर्व माध्यमिक व इंटर कॉलेज मिलाकर 27 स्कूलों के भवन जीर्णशीर्ण श्रेणी में हैं। इसके अलावा 64 स्कूल नदी-नालों के नजदीक अथवा भूस्खलन की जद वाली जगहों में बने हैं। इन स्कूल भवनों में कहीं दरारें हैं, तो कहीं छत टपक रही है। 1972 में बना दियूरी प्राइमरी स्कूल का भवन बेहद जीर्णशीर्ण है। स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष दीपक नेगी का कहना है कि स्कूल के दो कमरों में जगह-जगह दरारें है। यहां अध्ययनरत बच्चे खौफ के साये बीच पढ़ाई कर रहे हैं। 2004 में बने नए भवन में सभी पांचों कक्षाओं के लिए जगह नहीं है। इस भवन का लिंटर के एक हिस्से के क्षतिग्रस्त होने से बरसात में यह नया भवन भी टपकता है। इस कारण यहां एक कमरे में दो-दो कक्षाएं चल रही हैं।
क्रासर
आपदा के नजरिए से खतरे की आशंका वाले स्कूल भवनों में छात्र-छात्राओं को जर्जर भवनों में नहीं बिठाने के निर्देश दिए गए हैं। वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में क्षतिग्रस्त कमरे को छोड़ दूसरे कमरों में बिठाकर पढ़ाई करने को कहा गया है। जर्जर भवनों के मरम्मत अथवा पुनर्निमाण के प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं।
विज्ञापन
आरसी पुरोहित
मुख्य शिक्षाधिकारी, चंपावत।
चंपावत जिले के खतरे की जद में आने वाले विद्यालय भवन
राजकीय प्राथमिक विद्यालय: सिंग्दा, नेत्र सलान, फिरकोला, बांस, सीमली, देवीधार, मोलनाजाख, मथेलाछाना, पीपलढींग, कार्कीछाना, कैड़ा इजर, दियूरी कठौल, कोट अमोड़ी, बेलखेत, लौडियालसेरा, खिरद्वारी, कुठौल, डुंगरी, धौनी सीलिंग, सुनकुरी।
जूनियर हाइस्कूल: सिब्योली, चम्तोला विरोली, बेलखेत व पंथ्यूड़ा।
उच्चतर माध्यमिक विद्यालय:सिंग्दा और तिमलागूंठ।
राजकीय इंटर कॉलेज: डोबाभागू।
शिक्षा विभाग के मुताबिक चंपावत जिले में प्राइमरी, जूनियर, पूर्व माध्यमिक व इंटर कॉलेज मिलाकर 27 स्कूलों के भवन जीर्णशीर्ण श्रेणी में हैं। इसके अलावा 64 स्कूल नदी-नालों के नजदीक अथवा भूस्खलन की जद वाली जगहों में बने हैं। इन स्कूल भवनों में कहीं दरारें हैं, तो कहीं छत टपक रही है। 1972 में बना दियूरी प्राइमरी स्कूल का भवन बेहद जीर्णशीर्ण है। स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष दीपक नेगी का कहना है कि स्कूल के दो कमरों में जगह-जगह दरारें है। यहां अध्ययनरत बच्चे खौफ के साये बीच पढ़ाई कर रहे हैं। 2004 में बने नए भवन में सभी पांचों कक्षाओं के लिए जगह नहीं है। इस भवन का लिंटर के एक हिस्से के क्षतिग्रस्त होने से बरसात में यह नया भवन भी टपकता है। इस कारण यहां एक कमरे में दो-दो कक्षाएं चल रही हैं।
विज्ञापन
क्रासर
आपदा के नजरिए से खतरे की आशंका वाले स्कूल भवनों में छात्र-छात्राओं को जर्जर भवनों में नहीं बिठाने के निर्देश दिए गए हैं। वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में क्षतिग्रस्त कमरे को छोड़ दूसरे कमरों में बिठाकर पढ़ाई करने को कहा गया है। जर्जर भवनों के मरम्मत अथवा पुनर्निमाण के प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं।
विज्ञापन
आरसी पुरोहित
मुख्य शिक्षाधिकारी, चंपावत।
चंपावत जिले के खतरे की जद में आने वाले विद्यालय भवन
राजकीय प्राथमिक विद्यालय: सिंग्दा, नेत्र सलान, फिरकोला, बांस, सीमली, देवीधार, मोलनाजाख, मथेलाछाना, पीपलढींग, कार्कीछाना, कैड़ा इजर, दियूरी कठौल, कोट अमोड़ी, बेलखेत, लौडियालसेरा, खिरद्वारी, कुठौल, डुंगरी, धौनी सीलिंग, सुनकुरी।
जूनियर हाइस्कूल: सिब्योली, चम्तोला विरोली, बेलखेत व पंथ्यूड़ा।
उच्चतर माध्यमिक विद्यालय:सिंग्दा और तिमलागूंठ।
राजकीय इंटर कॉलेज: डोबाभागू।