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16.20 लाख लीटर की जरूरत, मिल रहा सिर्फ 5.35 लाख लीटर पानी
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट (चंपावत)
Updated Tue, 31 Jan 2017 10:10 PM IST
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16.20 लाख लीटर की जरूरत, मिल रहा सिर्फ 5.35 लाख लीटर पानी
- फोटो : अमर उजाला
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राज्य गठन के 16 साल बाद भी लोहाघाट क्षेत्र के लोगों को पेयजल किल्लत से निजात नहीं मिल पाई है। सर्दी हो या बरसात सालभर लोगों को गाड़-गधेरों से पानी ढोकर प्यास बुझाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अवकाश के दिनों बच्चे दिनभर हाथों में बाल्टियां या फिर छोटे-छोटे बर्तन लिए देखे जा सकते हैं।
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राज्य गठन से पहले नगर के लिए चौड़ी लिफ्ट योजना, बनस्वाड़ और फोर्ती पेयजल योजना का निर्माण किया गया था, लेकिन उसके बाद कोई पेयजल योजना नहीं बनी। हालांकि कुछ साल पहले ऋषेश्वर मंदिर के पास एक नलकूप लगाया गया, लेकिन उसके जल स्तर में लगातार कमी आ रही है। वर्तमान में इन पेयजल योजनाओं के जल स्रोतों में कमी आ रही है। इसके चलते लोगों को पेयजल के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नगर के लिए हर रोज 16.20 लाख लीटर पानी चाहिए। लेकिन मात्र 5.35 लाख लीटर पानी मिल पा रहा है।
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नगर के लिए बनी बनस्वाड़ पेयजल योजना से प्रतिदिन 75 किलो लीटर, चौड़ी लिफ्ट पेयजल योजना से 400 केएल, फोर्ती से 25 केएल और ऋषेश्वर स्थित नलकूप से 35 केएल पानी ही मिल पा रहा है। हथरंगिया में 400 केएल, जीजीआईसी में 200 केएल, हथरंगिया में 50 केएल और अमल क्वाटर में विधायक निधि से 70 केएल का पेयजल टैंक का निर्माण किया गया है।
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चंपावत जल संस्थान डिवीजन के अधिशासी अभियंता विशाल सक्सेना का कहना है कि पेयजल स्रोतों में कमी आने से पेयजल आपूर्ति सुचारु करने में दिक्कतें आ रही हैं। पेयजल किल्लत को देखते हुए ऋषेश्वर मंदिर के पास एक ट्यूबवेल प्रस्तावित किया गया है।
ठोस पहल करें जन प्रतिनिधि
हथरंगिया मुहल्ले के बुजुर्ग गणेश दत्त राय का कहना है कि नलों में दूसरे या तीसरे दिन पानी आता है। जरूरत के हिसाब से नलों में पानी न आने से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। पेयजल समस्या का स्थायी समाधान करने की दिशा में जन प्रतिनिधियों को पहल करनी चाहिए।
पानी को लाइन लगाना मजबूरी
बजरंगबली मुहल्ले के जगदीश मेहता का कहना है कि पेयजल की कमी के चलते लोग परेशानी का सामना करना पड़ता है। घंटों नर्सरी गधेरे, अक्कलधारे और शिवालय मंदिर में पेयजल के लिए लाइन में लगना पड़ता है। नलों में तीन से चार दिनों बाद पानी आने से लोगों को काफी दिक्कतें होती हैं। पेयजल समस्या का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाना चाहिए।