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खनिज निकासी के लिए दून की टीम ने किया सर्वे
Updated Thu, 01 Nov 2018 11:55 PM IST
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टनकपुर (चंपावत)। शारदा से खनिज निकासी की कार्यदायी एजेंसी वन निगम खनन प्रभाग निकासी गेट खोलने की तैयारी पूरी कर चुका है। देहरादून से आई जल एवं मृदा आयोग की टीम ने भी बृहस्पतिवार को खनन क्षेत्र का सर्वे किया, लेकिन वन विभाग द्वारा खनन क्षेत्र का सीमांकन नहीं करने से निकासी अधर में लटकी है।
हर साल जून में शारदा से खनिज निकासी बंद हो जाती है और फिर अक्तूबर से खनन खोलने की कवायद होने लगती है, लेकिन इस बार नवंबर शुरू होने के बाद भी खनिज निकासी नहीं खुल पाई है। वन निगम के खनन प्रभारी हरीश पाल का कहना है कि विभाग की ओर से पूरी तैयारी कर ली गई है। खनन क्षेत्र के अप एवं डाउन स्ट्रीम निकासी गेट पर लगे तौल कांटों में कंप्यूटर सिस्टम लगाकर दुरुस्त कर लिया गया है, लेकिन वन विभाग द्वारा सीमांकन नहीं करने से खनन में अवरोध बना है।
इधर, बृहस्पतिवार को देहरादून से आई जल एवं मृदा आयोग की चार सदस्यीय टीम ने नदी के खनन क्षेत्र का सर्वे किया। खनन प्रभारी हरीश पाल ने बताया कि आंतरिक सर्वे के बाद टीम ने करीब चार लाख घनमीटर खनिज निकासी पर सहमति दे दी है। नवंबर में फाइनल सर्वे के बाद खनिज निकासी की मात्रा चार लाख से बढ़कर छह लाख घनमीटर होने का अनुमान है। जल एवं मृदा आयोग की टीम में मुख्य अभियंता फिरमाली, निदेशक ओजस्वी, सहायक निदेशक एसके शर्मा एवं भाटिया शामिल थे।
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हर साल जून में शारदा से खनिज निकासी बंद हो जाती है और फिर अक्तूबर से खनन खोलने की कवायद होने लगती है, लेकिन इस बार नवंबर शुरू होने के बाद भी खनिज निकासी नहीं खुल पाई है। वन निगम के खनन प्रभारी हरीश पाल का कहना है कि विभाग की ओर से पूरी तैयारी कर ली गई है। खनन क्षेत्र के अप एवं डाउन स्ट्रीम निकासी गेट पर लगे तौल कांटों में कंप्यूटर सिस्टम लगाकर दुरुस्त कर लिया गया है, लेकिन वन विभाग द्वारा सीमांकन नहीं करने से खनन में अवरोध बना है।
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इधर, बृहस्पतिवार को देहरादून से आई जल एवं मृदा आयोग की चार सदस्यीय टीम ने नदी के खनन क्षेत्र का सर्वे किया। खनन प्रभारी हरीश पाल ने बताया कि आंतरिक सर्वे के बाद टीम ने करीब चार लाख घनमीटर खनिज निकासी पर सहमति दे दी है। नवंबर में फाइनल सर्वे के बाद खनिज निकासी की मात्रा चार लाख से बढ़कर छह लाख घनमीटर होने का अनुमान है। जल एवं मृदा आयोग की टीम में मुख्य अभियंता फिरमाली, निदेशक ओजस्वी, सहायक निदेशक एसके शर्मा एवं भाटिया शामिल थे।
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