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डैसली गांव में शुरू हुआ 132 केवी उप केंद्र का काम
अमर उजाला ब्यूरो, चंपावत।
Updated Sun, 10 Dec 2017 10:33 PM IST
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डैसली के 132 केवी सब स्टेशन में काम करते मजदूर।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में132 किलोवाट उप केेंद्र (सब स्टेशन) का काम डैसली में शुरू हो गया है। फिलहाल सब स्टेशन के टावरों की बुनियाद खोदी जा रही है। उप केंद्र के अलावा 45 किलोमीटर लंबी लाइन का निर्माण किया जाएगा। मई 2019 तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
टनकपुर-बनबसा को छोड़ जिले के समूचे पर्वतीय हिस्सों की बिजली आपूर्ति इस वक्त पिथौरागढ़ की 33 केवी लाइन से होती है। पिथौरागढ़ से आने वाली ये लाइन घने जंगलों से होकर आती है। जंगल से गुजरने से इस लाइन में बारिश, बर्फबारी, अंधड़ आदि कारणों से अक्सर खामी आती रहती है। गड़बड़ी होने पर लाइन में आने वाली खामी को ठीक करने में काफी वक्त लग जाता है।
इस परेशानी को देखते हुए फरवरी 2011 में चंपावत दौरे पर आए तत्कालीन मुख्यमंत्री व मौजूदा सांसद डा.रमेश पोखरियाल निशंक ने जिले में 132 केवी सब स्टेशन निर्माण की घोषणा की थी। सब स्टेशन और बिजलीघर के लिए डैसली गांव में करीब 50 नाली जमीन को पॉवर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) के नाम पिछले साल हस्तांतरित कर लिया गया था। मगर काफी समय तक वन अनापत्ति नहीं मिलने से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा था। अलबत्ता पिछले महीने सभी बाधाएं दूर हो गई और अब बाकायदा काम शुरू हो गया है।
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उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड चंपावत डिवीजन के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार ने बताया कि निर्माण कार्य शुरू हो गया है। उप केंद्र और पिथौरागढ़ तक 45 किमी लंबी बिजली लाइन में कुल 158 टावर बनाए जाएंगे। 42 करोड़ रुपये से सब स्टेशन और 30 करोड़ रुपये से बिजली लाइन बनाई जाएगी।
खंभों की ऊंचाई से कम होते हैं खतरे
132 किलोवाट के सब स्टेशन के बनने के बाद से बिजली की दुश्वारी काफी कम हो जाएगी। खासकर आंधी-तूफान या लाइन में पेड़ गिरने के वक्त गुल होने वाली बिजली से निजात मिलेगी। इसकी मुख्य वजह 132 केवी के लिए बिछने वाली लाइन के खंभों की ऊंचाई का अधिक होना है। ये खंभे 40 मीटर ऊंचे होते हैं, जबकि 33 केवी के एक पोल की ऊंचाई 11.5 मीटर होती है।
ये होंगे लाभ
1.लो-वोल्टेज से निजात मिलेगी।
2.ब्रेक डाउन नहीं लेना पड़ेगा।
3.लाइन लॉस में कमी आएगी।
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टनकपुर-बनबसा को छोड़ जिले के समूचे पर्वतीय हिस्सों की बिजली आपूर्ति इस वक्त पिथौरागढ़ की 33 केवी लाइन से होती है। पिथौरागढ़ से आने वाली ये लाइन घने जंगलों से होकर आती है। जंगल से गुजरने से इस लाइन में बारिश, बर्फबारी, अंधड़ आदि कारणों से अक्सर खामी आती रहती है। गड़बड़ी होने पर लाइन में आने वाली खामी को ठीक करने में काफी वक्त लग जाता है।
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इस परेशानी को देखते हुए फरवरी 2011 में चंपावत दौरे पर आए तत्कालीन मुख्यमंत्री व मौजूदा सांसद डा.रमेश पोखरियाल निशंक ने जिले में 132 केवी सब स्टेशन निर्माण की घोषणा की थी। सब स्टेशन और बिजलीघर के लिए डैसली गांव में करीब 50 नाली जमीन को पॉवर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) के नाम पिछले साल हस्तांतरित कर लिया गया था। मगर काफी समय तक वन अनापत्ति नहीं मिलने से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा था। अलबत्ता पिछले महीने सभी बाधाएं दूर हो गई और अब बाकायदा काम शुरू हो गया है।
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उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड चंपावत डिवीजन के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार ने बताया कि निर्माण कार्य शुरू हो गया है। उप केंद्र और पिथौरागढ़ तक 45 किमी लंबी बिजली लाइन में कुल 158 टावर बनाए जाएंगे। 42 करोड़ रुपये से सब स्टेशन और 30 करोड़ रुपये से बिजली लाइन बनाई जाएगी।
खंभों की ऊंचाई से कम होते हैं खतरे
132 किलोवाट के सब स्टेशन के बनने के बाद से बिजली की दुश्वारी काफी कम हो जाएगी। खासकर आंधी-तूफान या लाइन में पेड़ गिरने के वक्त गुल होने वाली बिजली से निजात मिलेगी। इसकी मुख्य वजह 132 केवी के लिए बिछने वाली लाइन के खंभों की ऊंचाई का अधिक होना है। ये खंभे 40 मीटर ऊंचे होते हैं, जबकि 33 केवी के एक पोल की ऊंचाई 11.5 मीटर होती है।
ये होंगे लाभ
1.लो-वोल्टेज से निजात मिलेगी।
2.ब्रेक डाउन नहीं लेना पड़ेगा।
3.लाइन लॉस में कमी आएगी।