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बनबसा की आशा बनी बंगाल टाइगर्स की कोच
Updated Fri, 16 Jun 2017 10:55 PM IST
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बनबसा की आशा बनीं बंगाल टाइगर्स की कोच
बनबसा के देशीफार्म गांव निवासी आशा पांडेय को भारत में पहली बार आयोजित हो रहे आधी आबादी वॉलीबाल कप 2017 में प्रतिभाग कर रही बंगाल टाइगर्स टीम का कोच बनाया गया है। आशा का चयन उक्त टीम के कोच के रूप में किए जाने से क्षेेत्र के खेल प्रेमियों में खुशी की लहर है। आशा को पिछले साल भारतीय खेल प्राधिकरण (एनआईएस) से नेशनल वॉलीबाल कोच का दर्जा भी मिल चुका है। इन दिनों वह केंद्रीय विद्यालय क्रमांक एक और मिनी स्टेडियम बनबसा में प्रशिक्षक की भूमिका निभा रही हैं।
आशा बनबसा केे देशीफार्म निवासी पूर्व फौजी गिरीश चंद्र पांडेय की पुत्री हैं। उत्तराखंड वॉलीबाल एसोसिएशन के महासचिव कमलेश कुमार काला ने बताया कि आधी आबादी फाउंडेशन के सीईओ दिनेश के सिंह ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है। काला ने चंपावत जिला क्रीड़ाधिकारी को भेजे पत्र में यह जानकारी दी है। पत्र में उन्होंने आशा पांडेय से 20 जून तक उक्त जिम्मेदारी निभाने का अनुरोध किया है। बताया है कि महिला वॉलीबाल लीग 9 जून से नागपुर में शुरू हो गई है। यह प्रतियोगिता नागपुर के अलावा पटना, पुणे, बंगलूरू में आयोजित होगी।
चैंपियनशिप के लिए देश की उत्कृष्ट महिला खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों का चयन किया गया है। चैंपियनशिप में बंगाल टाइगर्स, बिहार चैलेंजर्स, चेन्नई क्वीन्स, दिल्ली पैंथर्स, हरियाणा स्ट्राइकर्स, मराठा वारियर्स, उत्तराखंड स्मैशर्स और यूपी थंडर्स की टीमें प्रतिभाग कर रही हैं।
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महिला वॉलीबाल टीम की नेशनल कोच रह चुकी हैं आशा
आशा ने वर्ष 2014 में हल्द्वानी के एमबी पीजी कॉलेज से स्नातक, वर्ष 2015 में बीपीएड, वर्ष 2016 में एनआईएस से वॉलीबाल कोच का प्रमाण पत्र हासिल किया। वह उत्तराखंड की वॉलीबाल स्टेट रेफरी, उत्तराखंड से नेशनल वॉलीबाल खिलाड़ी, महिला वॉलीबाल टीम की नेशनल चीफ कोच भी रह चुकी हैं। वर्ष 2007-08 में केवि संगठन का बेस्ट एथलीट आफ स्कूल अवार्ड हासिल किया। चार बार उत्तराखंड स्टेट वॉलीबाल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक, तीन बार साउथ जोन यूनिवर्सिटी से स्वर्ण और चार बार स्कूल नेशनल स्वर्ण पदक प्राप्त किया।
बनबसा के देशीफार्म गांव निवासी आशा पांडेय को भारत में पहली बार आयोजित हो रहे आधी आबादी वॉलीबाल कप 2017 में प्रतिभाग कर रही बंगाल टाइगर्स टीम का कोच बनाया गया है। आशा का चयन उक्त टीम के कोच के रूप में किए जाने से क्षेेत्र के खेल प्रेमियों में खुशी की लहर है। आशा को पिछले साल भारतीय खेल प्राधिकरण (एनआईएस) से नेशनल वॉलीबाल कोच का दर्जा भी मिल चुका है। इन दिनों वह केंद्रीय विद्यालय क्रमांक एक और मिनी स्टेडियम बनबसा में प्रशिक्षक की भूमिका निभा रही हैं।
आशा बनबसा केे देशीफार्म निवासी पूर्व फौजी गिरीश चंद्र पांडेय की पुत्री हैं। उत्तराखंड वॉलीबाल एसोसिएशन के महासचिव कमलेश कुमार काला ने बताया कि आधी आबादी फाउंडेशन के सीईओ दिनेश के सिंह ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है। काला ने चंपावत जिला क्रीड़ाधिकारी को भेजे पत्र में यह जानकारी दी है। पत्र में उन्होंने आशा पांडेय से 20 जून तक उक्त जिम्मेदारी निभाने का अनुरोध किया है। बताया है कि महिला वॉलीबाल लीग 9 जून से नागपुर में शुरू हो गई है। यह प्रतियोगिता नागपुर के अलावा पटना, पुणे, बंगलूरू में आयोजित होगी।
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चैंपियनशिप के लिए देश की उत्कृष्ट महिला खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों का चयन किया गया है। चैंपियनशिप में बंगाल टाइगर्स, बिहार चैलेंजर्स, चेन्नई क्वीन्स, दिल्ली पैंथर्स, हरियाणा स्ट्राइकर्स, मराठा वारियर्स, उत्तराखंड स्मैशर्स और यूपी थंडर्स की टीमें प्रतिभाग कर रही हैं।
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महिला वॉलीबाल टीम की नेशनल कोच रह चुकी हैं आशा
आशा ने वर्ष 2014 में हल्द्वानी के एमबी पीजी कॉलेज से स्नातक, वर्ष 2015 में बीपीएड, वर्ष 2016 में एनआईएस से वॉलीबाल कोच का प्रमाण पत्र हासिल किया। वह उत्तराखंड की वॉलीबाल स्टेट रेफरी, उत्तराखंड से नेशनल वॉलीबाल खिलाड़ी, महिला वॉलीबाल टीम की नेशनल चीफ कोच भी रह चुकी हैं। वर्ष 2007-08 में केवि संगठन का बेस्ट एथलीट आफ स्कूल अवार्ड हासिल किया। चार बार उत्तराखंड स्टेट वॉलीबाल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक, तीन बार साउथ जोन यूनिवर्सिटी से स्वर्ण और चार बार स्कूल नेशनल स्वर्ण पदक प्राप्त किया।