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बढ़ गई बंद रोडों को खोलने वाली टीमें
Updated Thu, 13 Jul 2017 12:24 AM IST
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चंपावत। आपदा से बचाव के लिए पिछली बार की तुलना में मात्र एक अंतर आया है। मुख्य मोटर मार्गों को तत्काल खोलने वाली टीमें बढ़ाई गई है। इसके चलते अब तक टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) को कम वक्त में खोलने में प्रशासन को जरूर कामयाबी मिली। मगर ग्रामीण संपर्क मार्गों को खोलने के लिए अभी भी पुख्ता व्यवस्था नहीं है। जिसके चलते बुधवार को भी 15 ग्रामीण संपर्क मार्ग बंद हैं।
जिला आपदा अधिकारी मनोज पांडेय का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के बनबसा से लेकर घाट तक के करीब 135 किलोमीटर हिस्से में इस बार 28 जेसीबी रखे हैं। इनकी संख्या पिछली बार से दो ज्यादा हैं। 19 अति संवेदनशील और संवेदनशील जगहों को चिन्हित कर ये उपकरण रखे गए। इस वजह से अब तक राष्ट्रीय राजमार्ग कम समय में खुल गया। लेकिन ग्रामीण सड़क मार्ग को खोलने के लिए व्यवस्था पिछले साल से अलग नहीं है। जिस कारण अभी भी इन मार्गों को खोलने में वक्त लग रहा है। वहीं खोज व बचाव दल के सदस्यों की संख्या भी पांच से बढ़ाकर सात की गई है। जिला मुख्यालय में स्थित ये टीम सूचना पर आपदाग्रस्त क्षेत्र भेजी जाती हैं। आपदा राहत के रूप में जिले की सभी पांचों तहसीलों को फिलहाल 20-20 लाख रुपये दिए गए हैं। पिछले वर्ष आपदा से चार लोगों की मौत हुई। सभी मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये दिए गए। वहीं पांच घायलों में से प्रत्येक को 12700 रुपये दिए गए।
जिला आपदा अधिकारी मनोज पांडेय का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के बनबसा से लेकर घाट तक के करीब 135 किलोमीटर हिस्से में इस बार 28 जेसीबी रखे हैं। इनकी संख्या पिछली बार से दो ज्यादा हैं। 19 अति संवेदनशील और संवेदनशील जगहों को चिन्हित कर ये उपकरण रखे गए। इस वजह से अब तक राष्ट्रीय राजमार्ग कम समय में खुल गया। लेकिन ग्रामीण सड़क मार्ग को खोलने के लिए व्यवस्था पिछले साल से अलग नहीं है। जिस कारण अभी भी इन मार्गों को खोलने में वक्त लग रहा है। वहीं खोज व बचाव दल के सदस्यों की संख्या भी पांच से बढ़ाकर सात की गई है। जिला मुख्यालय में स्थित ये टीम सूचना पर आपदाग्रस्त क्षेत्र भेजी जाती हैं। आपदा राहत के रूप में जिले की सभी पांचों तहसीलों को फिलहाल 20-20 लाख रुपये दिए गए हैं। पिछले वर्ष आपदा से चार लोगों की मौत हुई। सभी मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये दिए गए। वहीं पांच घायलों में से प्रत्येक को 12700 रुपये दिए गए।
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