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रेल लाइन से गांव को नहीं नुकसान
ब्यूरो/अमर उजाला कर्णप्रयाग
Updated Wed, 17 Aug 2016 10:35 PM IST
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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के सामाजिक समाघात प्रभाव को प्रोजेक्टर के माध्यम से जनप्रतिनिधियों को बताया गया। क्षेत्र पंचायत की हुई बैठक में जानकारी दी गई कि रेल लाइन का अधिकतर हिस्सा भूमिगत है इसलिए समाज पर इसका कुप्रभाव न्यून है।
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बुधवार को ब्लाक सभागार में हुई बैठक में जनप्रतिनिधियों को बताया गया कि पहाड़ में श्रीनगर और कर्णप्रयाग सिवाई रेलवे लाइन से सबसे बड़े स्टेशन होंगे। बैठक में रेल विकास निगम (भूमि अध्यप्ति) के उप परियोजना प्रबंधक डा. एसके बरनवाल ने बताया कि ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक करीब 12 स्टेशन बनेंगे। 16 हजार करोड़ से बिछने वाली रेल लाइन सात साल में बनकर तैयार हो जाएगी।
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मुख्य विकास अधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने बताया कि अब जनसुनवाई का काम शुरू होगा। उन्होंने लोगों से सुझाव भी मांगे। इस मौके पर विधानसभा उपाध्यक्ष डा. अनुसूया प्रसाद मैखुरी, जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन, डा. बीपी देवली, डा. अनिल सैनी, रेल परियोजना के गोविंद प्रसाद आर्य, हरि सिंह रावत, गबर सिंह नेगी, ईश्वरी मैखुरी, महिपाल नेगी आदि मौजूद थे।
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सुरंग में बनेगा स्टेशन
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन 16 सुरंगों और 16 पुलों से होकर गुजरेगी। रेल लाइन की सबसे लंबी सुरंग टिहरी और पौड़ी जिले को जोड़ने वाली होगी। करीब साढ़े 15 किमी लंबी यह सुरंग देवप्रयाग के जनासू में बनेगी। जिसमें सुरक्षा की दृष्टि से एक स्टेशन का निर्माण किया जाएगा। सुरंग के भीतर पौड़ी जिले के सौड़ गांव में यह स्टेशन बनेगा।