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माता मूर्ति से मिलकर धाम में विराजमान हुए बदरीनाथ
ब्यूरो/अमर उजाला, चमोली (गोपेश्वर)
Updated Tue, 13 Sep 2016 09:39 PM IST
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माणा गांव स्थित माता मूर्ति के मंदिर में पहुंची भगवान उद्घव जी की यात्रा।
- फोटो : Amar Ujala
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बामन द्वादशी पर्व पर भगवान बदरीनाथ अपने हजारों भक्तों के साथ अपनी माता मूर्ति से मिलने के बाद पुन: बदरीनाथ धाम में विराजमान हो गए हैं। माता मूर्ति मंदिर में दिनभर जय बदरीनाथ के जयकारे गूंजते रहे। इस दौरान बदरीनाथ धाम के कपाट भी छह घंटे तक बंद रहे।
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शाम को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद माणा गांव में माता मूर्ति मेला भी संपन्न हो गया। भगवान उद्धव, घंटाकरण (क्षेत्रपाल) और माता मूर्ति के अद्भुत मिलन को देखने के लिए तीर्थयात्रियों के साथ ही धाम में स्थानीय श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
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मंगलवार को बदरीनाथ धाम में बाल भोग लगने के बाद सुबह दस बजे बदरीश पंचायत से भगवान बदरीनाथ के प्रतिनिधि के रुप में उद्धव की उत्सव डोली ने हजारों भक्तों के साथ माणा गांव स्थित माता मूर्ति मंदिर के लिए प्रस्थान किया।
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इस दौरान बदरीनाथ से रावल ईश्वरन नंबूदरी, धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, बीकेटीसी के सीईओ बीडी सिंह, मंदिर समिति के अधिकारी भूपेंद्र मैठाणी, अजय सती, राजेंद्र चौहान, एमपी सती, दरवान भंडारी, राजेश मेहता, पीतांबर मोल्फा, माता मूर्ति के पुजारी हनुमान प्रसाद डिमरी ने उद्धव जी के साथ माणा गांव स्थित माता मूर्ति मंदिर के लिए प्रस्थान किया।
माता मूर्ति मंदिर में बदरीनाथ रावल ईश्वरन नंबूदरी ने पूजा-अर्चना संपन्न की।
बदरीनाथ धाम में अपराह्न में लगने वाला भोग भी माता मूर्ति मंदिर में लगाया गया। यहां देव डोलियों के अद्भुत मिलन के बाद अपराह्न तीन बजे उद्धव जी बदरीनाथ धाम में विराजमान हुए। मेले के दौरान आईटीबीपी, गढ़वाल स्काउट और बीकेटीसी की ओर से माता मूर्ति मंदिर में भंडारे का आयोजन किया।
आज भी माता को दिए वचन का निर्वहन कर रहे बदरीनाथ
बदरीकाश्रम क्षेत्र में माता मूर्ति मंदिर नारायण पर्वत की तलहटी पर स्थित है। मान्यता है कि आदिकाल में भगवान बदरीनाथ जब बदरीकाश्रम क्षेत्र में तपस्यारत थे तो अपने बेटे को मिलने के लिए माता मूर्ति और पिता धर्म भी बदरीनाथ धाम पहुंचे।
तब भगवान बदरीनाथ ने प्रतिवर्ष बामन द्वादशी को माता मूर्ति से मिलने के लिए आने का वचन दिया था। आज भी बदरीनाथ अपनी माता को दिए वचन का निर्वहन करते आ रहे हैं। धाम में नारायण पर्वत की तलहटी को माता मूर्ति तो भीम पुल से बसुधारा तक के क्षेत्र को धर्म क्षेत्र कहा जाता है।
प्रतिनिधि के रुप में उद्धव जी जाते हैं माता मूर्ति से मिलने
बदरीनाथ। बदरीनाथ धाम में भगवान बदरीनाथ काले पत्थर की शिला पर पद्मासन में तपस्यारत हैं। लिहाजा बदरीनाथ के प्रतिनिधि के रुप में भगवान उद्धव जी महाराज उत्सव डोली में बैठकर माता मूर्ति से मिलने के लिए जाते हैं। दिनभर माता के साथ रहकर शाम को बदरीनाथ धाम में विराजमान हो जाते हैं।
अनूठी धार्मिक परंपरा से अभिभूत
देश का अंतिम गांव माणा मंगलवार को बदरीविशाल के जयकारों से गुंजायमान रहा। बदरीश भजन मंडली के कार्यकर्ताओं की ओर से कीर्तन-भजन का आयोजन किया गया। बदरीनाथ धाम से माता मूर्ति मंदिर तक करीब तीन किमी पैदल यात्रा चली।
करीब तीन हजार तीर्थयात्री और हजारों स्थानीय श्रद्धालु यात्रा में शामिल हुए। गुजरात से अपने परिवार के साथ पहुंचे तीर्थयात्री मधुकर, दिनकर भाई और मालती का कहना था कि बदरीनाथ की यह तीर्थयात्रा उम्रभर याद रहेगी। माता मूर्ति मंदिर तक तीन किमी की यात्रा पैदल तय की, लेकिन इतना चलने के बाद भी थकान नहीं लगी। दिल्ली के तीर्थयात्री त्रिभुवन बाजपेई का कहना है कि बदरीनाथ में यह अनूठी धार्मिक परंपरा देख मन अभिभूत हो गया।
माणा गांव में भोटिया जनजाति के परिवार निवास करते हैं। ग्रामीण मेले को लेकर काफी उत्साहित दिखे। गांव की महिलाएं हाथ में हरियाली लेकर माता मूर्ति मंदिर पहुंची। जैसे ही बदरीनाथ की उत्सव डोली माता मूर्ति मंदिर पहुंची तो महिलाओं ने मांगल गीत गाकर मंदिर परिसर में मौजूद हजारों भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया। लामबगड़, बिनायक चट्टी, बैनाकुली, पांडुकेश्वर और जोशीमठ क्षेत्र से भी सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण वाहनों और पैदल बदरीनाथ धाम पहुंचे।