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Chamoli News: टिमरू की खेती के प्रति बढ़ा काश्तकारों का रुझान
Sat, 23 Aug 2025 04:50 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Sat, 23 Aug 2025 04:50 PM IST
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ज्योतिर्मठ। चमोली जिले में टिमरू की खेती के प्रति काश्तकारों का रुझान बढ़ रहा है। कई गांवों में काश्तकार इसकी खेती कर रहे हैं। सगंध पौधा केंद्र (कैप) के सहयोग से काश्तकारों को इसकी निशुल्क पौध उपलब्ध कराई जा रही है।
कैप की ओर चमोली जिले के दशोली और ज्योतिर्मठ ब्लॉक के कई गांवों के काश्तकारों को टिमरू की खेती से जोड़ा गया है जिसमें किरुली, नौरख, श्रीकोट, पाबौ, टंगड़ी, द्विंग, पोखनी, हेलंग सहित कई गांवों के काश्तकार इसकी खेती से जुड़े हैं। कैप के जिला प्रभारी महेंद्र सिंह ने बताया कि योजना के तहत काश्तकारों को प्रति परिवार 100 पौधे दिए गए जिनको लगाकर काश्तकार अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। बताया कि टिमरू दंतमंजन बनाने में काम आता है साथ ही इसकी लकड़ी का पूजा में उपयोग किया जाता है। इसके बीज से इत्र तैयार किया जाता है। खाने को स्वादिष्ट बनाने लिए भी इसके बीजों का उपयोग किया जाता है। टिमरू का पौधा एक बार लगाने पर कई वर्षों तक खराब नहीं होता। साथ ही जंगली जानवर भी इसे नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। यह काश्तकारों के लिए अच्छा विकल्प है। संवाद
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कैप की ओर चमोली जिले के दशोली और ज्योतिर्मठ ब्लॉक के कई गांवों के काश्तकारों को टिमरू की खेती से जोड़ा गया है जिसमें किरुली, नौरख, श्रीकोट, पाबौ, टंगड़ी, द्विंग, पोखनी, हेलंग सहित कई गांवों के काश्तकार इसकी खेती से जुड़े हैं। कैप के जिला प्रभारी महेंद्र सिंह ने बताया कि योजना के तहत काश्तकारों को प्रति परिवार 100 पौधे दिए गए जिनको लगाकर काश्तकार अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। बताया कि टिमरू दंतमंजन बनाने में काम आता है साथ ही इसकी लकड़ी का पूजा में उपयोग किया जाता है। इसके बीज से इत्र तैयार किया जाता है। खाने को स्वादिष्ट बनाने लिए भी इसके बीजों का उपयोग किया जाता है। टिमरू का पौधा एक बार लगाने पर कई वर्षों तक खराब नहीं होता। साथ ही जंगली जानवर भी इसे नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। यह काश्तकारों के लिए अच्छा विकल्प है। संवाद
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