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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Chamoli News ›   The exile with Sita and Lakshman Sriram

सीता और लक्ष्मण के साथ वनवास गए श्रीराम

Wed, 23 Mar 2016 09:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला गोपेश्वर
ब्यूरो/अमर उजाला गोपेश्वर Updated Wed, 23 Mar 2016 09:26 PM IST
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डिम्मर गांव में आयोजित रामलीला के चौथे दिन कलाकारों ने राम वनवास का भाव पूर्ण मंचन किया। मंगलवार रात को डिम्मर गांव में आयोजित रामलीला में महाराजा दशरथ राम के राज्याभिषेक करने के विषय में मंत्रणा करतेे हैं और राम के राज्याभिषेक की तैयारियों को अंतिम रूप देने का निर्देश देते हैं। मंथरा को इस बात का पता चलता है तो वह महारानी कैकेई को इसके बारे में बताती है। कैकेई उसकी बातों में आकर कोप भवन में चली जाती है।

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राजा दशरथ कैकेई को मनाने का प्रयास करते हैं तो कैकेई उनसे राम को 14 वर्ष का वनवास और भरत को अयोध्या का राजा बनाने का वरदान मांगती है। दशरथ के बहुत समझाने पर भी नहीं मानने पर वह उन्हें दुखी मन से वरदान देते हैं और मूर्छित हो जाते हैं।
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राम को इस बात की जानकारी मिलती है तो वे पिता की आज्ञा मानकर वनवास के लिए तैयार हो जाते हैं। सीता और लक्ष्मण भी उनके साथ जाने की बात कहते हैं और राजा दशरथ, माता कौशल्या, कैकेई तथा सुमित्रा से वन जाने की आज्ञा लेते हैं और वन पहुंचते हैं।
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रामलीला में कलाकारों के मार्मिक अभिनय ने दर्शकों को भाव विह्वल कर दिया। इस मौके पर रामलीला कमेटी अध्यक्ष शैलेंद्र प्रसाद डिमरी, सचिव केशव प्रसाद, द्वारिका प्रसाद डिमरी, योगेंद्र प्रसाद, जगदीश चंद्र, मोहन प्रसाद, सत्य प्रसाद खंडूड़ी आदि श्रद्धालु मौजूद थे।

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