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फ्यूंलानारायण मंदिर के आज खुलेंगे कपाट
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उर्गम घाटी में स्थित भगवान फ्यूंलानारायण मंदिर के कपाट शुक्रवार को (आज) श्रावण संक्रांति पर्व पर विधि विधान के साथ भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे। इस बार भगवान फ्यूंलानारायण के शृंगार की जिम्मेदारी उर्गम घाटी की गोदांबरी देवी को सौंपी गई है, जबकि मंदिर में पूजा-अर्चना हरीश सिंह चौहान की ओर से कराई जाएगी। मंदिर के कपाट खोलने को लेकर ग्रामीणों ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
उर्गम घाटी में करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई पर बुग्यालों के बीच भगवान फ्यूंलानारायण का मंदिर है। यहां पौराणिक परंपरा है कि महिलाएं भगवान नारायण का शृंगार करतीं हैं। कपाट खुलने के बाद भगवान नारायण का स्नान के बाद फूलों से शृंगार किया जाता है। स्थानीय निवासी उजागर सिंह फरस्वाण ने बताया कि इस बार भगवान फ्यूंलानारायण का शृंगार गोदांबरी देवी करेंगी। इसके बाद भगवान नारायण को दूध और मक्खन का भोग लगाया जाएगा। फ्यूंलानारायण फ्रेंड्स क्लब की ओर से मंदिर को फूलों से सजाया गया है। परंपरा के अनुसार मंदिर के कपाट श्रवण संक्रांति पर खुलते हैं और डेढ़ माह बाद नंदा अष्टमी पर बंद कर दिए जाते हैं। मंदिर में भेटा, भर्की, ग्वाणा, अरोशी सहित उर्गम घाटी के दर्जनों गांव मंदिर में हक हकूकधारी हैं।
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उर्गम घाटी में करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई पर बुग्यालों के बीच भगवान फ्यूंलानारायण का मंदिर है। यहां पौराणिक परंपरा है कि महिलाएं भगवान नारायण का शृंगार करतीं हैं। कपाट खुलने के बाद भगवान नारायण का स्नान के बाद फूलों से शृंगार किया जाता है। स्थानीय निवासी उजागर सिंह फरस्वाण ने बताया कि इस बार भगवान फ्यूंलानारायण का शृंगार गोदांबरी देवी करेंगी। इसके बाद भगवान नारायण को दूध और मक्खन का भोग लगाया जाएगा। फ्यूंलानारायण फ्रेंड्स क्लब की ओर से मंदिर को फूलों से सजाया गया है। परंपरा के अनुसार मंदिर के कपाट श्रवण संक्रांति पर खुलते हैं और डेढ़ माह बाद नंदा अष्टमी पर बंद कर दिए जाते हैं। मंदिर में भेटा, भर्की, ग्वाणा, अरोशी सहित उर्गम घाटी के दर्जनों गांव मंदिर में हक हकूकधारी हैं।
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