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वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट के लिए मछली उत्पादन का चयन
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चमोली जनपद में वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट (एक जिला एक उत्पाद) योजना के लिए प्रशासन की ओर से मत्स्य उत्पादन पर जोर दिया जा रहा है। अभी तक लगभग 600 काश्तकारों को मत्स्य उत्पादन से जोड़ा जा चुका है, जबकि 122 ग्राम समितियों की ओर से मत्स्य पालन के लिए तालाबों का निर्माण किया जा रहा है। जनपद में प्रतिवर्ष 232 क्विंटल मछली का उत्पादन हो रहा है।
चमोली जिले में मत्स्य पालन में काश्तकार अच्छी दिलचस्पी ले रहे हैं। इसी का नतीजा है कि वर्ष 2017 में जहां मत्स्य उत्पादन से मात्र 60 लाख की आय अर्जित हो रही थी, वहीं चार साल बाद यानी 2021 में मत्स्य पालन से जुड़े काश्तकारों को डेढ़ करोड़ रुपये की आय अर्जित हो गई है। मत्स्य पालन विभाग के सहायक निदेशक जगदंबा का कहना है कि जिले में मत्स्य पालन से मौजूदा समय में लगभग 600 लोग जुड़े हुए हैं। फिस आउटलेट योजना के तहत काश्तकारों को फिसलेट वैन की सुविधा भी दी गई है, जिससे वे मछलियां बेच सकते हैं। जिले में बैरागना, वांण, सुतोल, सितेल, तांगला, सुरांईथोटा क्षेत्रों में मछली उत्पादन बेहतर हो रहा है। अब वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट योजना के तहत मछली पालन पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
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चमोली जिले में मत्स्य पालन में काश्तकार अच्छी दिलचस्पी ले रहे हैं। इसी का नतीजा है कि वर्ष 2017 में जहां मत्स्य उत्पादन से मात्र 60 लाख की आय अर्जित हो रही थी, वहीं चार साल बाद यानी 2021 में मत्स्य पालन से जुड़े काश्तकारों को डेढ़ करोड़ रुपये की आय अर्जित हो गई है। मत्स्य पालन विभाग के सहायक निदेशक जगदंबा का कहना है कि जिले में मत्स्य पालन से मौजूदा समय में लगभग 600 लोग जुड़े हुए हैं। फिस आउटलेट योजना के तहत काश्तकारों को फिसलेट वैन की सुविधा भी दी गई है, जिससे वे मछलियां बेच सकते हैं। जिले में बैरागना, वांण, सुतोल, सितेल, तांगला, सुरांईथोटा क्षेत्रों में मछली उत्पादन बेहतर हो रहा है। अब वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट योजना के तहत मछली पालन पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
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