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Chamoli News: बदरीनाथ धाम में बंद हुआ वेद ऋचाओं का वाचन
Thu, 16 Nov 2023 07:31 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Thu, 16 Nov 2023 07:31 PM IST
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पूजा-अर्चना के बाद गर्भगृह में रखी गईं खडग पुस्तक
आज लक्ष्मी मंदिर में होगा कढ़ाई भोग का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
जोशीमठ। बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की प्रक्रिया के तहत चल रही पंच पूजाओं के तीसरे दिन बृहस्पतिवार को खडक पुस्तक की पूजा की गई। इसके बाद धाम में छह माह के लिए वेद ऋचाओं का वाचन बंद कर दिया गया और खडग पुस्तक गर्भगृह में रखी गईं। शुक्रवार को लक्ष्मी मंदिर में कढ़ाई भोग का आयोजन होगा और बदरीनाथ धाम के कपाट 18 नवंबर को अपराह्न 3 बजकर 33 मिनट पर बंद कर दिए जाएंगे।
कपाट बंद होने की प्रक्रिया 14 नवंबर से पंच पूजाओं के साथ शुरू हुई। पहले दिन गणेश मंदिर और दूसरे दिन आदिकेदारेश्वर मंदिर व शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद हुए। वहीं तीसरे दिन बृहस्पतिवार को विधि-विधान के साथ खडग पुस्तक पूजन किया गया और वेद ऋचाओं का पाठ बंद हो गया। शुक्रवार को लक्ष्मी जी की पूजा होगी और कढ़ाई भोग लगाया जाएगा। 18 नवंबर को रावल स्त्री वेष धारण कर लक्ष्मी माता की प्रतिमा को भगवान बदरीनाथ के सानिध्य में रखेंगे। इसके बाद अपराह्न 3 बजकर 33 मिनट पर विधि-विधान के साथ मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे।
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आज लक्ष्मी मंदिर में होगा कढ़ाई भोग का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
जोशीमठ। बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की प्रक्रिया के तहत चल रही पंच पूजाओं के तीसरे दिन बृहस्पतिवार को खडक पुस्तक की पूजा की गई। इसके बाद धाम में छह माह के लिए वेद ऋचाओं का वाचन बंद कर दिया गया और खडग पुस्तक गर्भगृह में रखी गईं। शुक्रवार को लक्ष्मी मंदिर में कढ़ाई भोग का आयोजन होगा और बदरीनाथ धाम के कपाट 18 नवंबर को अपराह्न 3 बजकर 33 मिनट पर बंद कर दिए जाएंगे।
कपाट बंद होने की प्रक्रिया 14 नवंबर से पंच पूजाओं के साथ शुरू हुई। पहले दिन गणेश मंदिर और दूसरे दिन आदिकेदारेश्वर मंदिर व शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद हुए। वहीं तीसरे दिन बृहस्पतिवार को विधि-विधान के साथ खडग पुस्तक पूजन किया गया और वेद ऋचाओं का पाठ बंद हो गया। शुक्रवार को लक्ष्मी जी की पूजा होगी और कढ़ाई भोग लगाया जाएगा। 18 नवंबर को रावल स्त्री वेष धारण कर लक्ष्मी माता की प्रतिमा को भगवान बदरीनाथ के सानिध्य में रखेंगे। इसके बाद अपराह्न 3 बजकर 33 मिनट पर विधि-विधान के साथ मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे।
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