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Chamoli News: चारा पत्ती के लिए लगाए थे बांज के पौधे आज बन गया जंगल

Mon, 17 Apr 2023 01:28 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 17 Apr 2023 01:28 AM IST
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Oak plants were planted for fodder leaves, today it has become a forest
बंजियाणी तोक में 70 साल पहले चारा पत्ती के लिए लगाए गए बांज के पौधे आज जंगल का रूप धारण कर चुके हैं। उस समय जरूरत थी चारापत्ती की मगर ग्रामीणों के प्रयास से आज करीब दो किलोमीटर क्षेत्र में यहां बांज का जंगल बन गया है। वर्तमान में जंगल की सुरक्षा का जिम्मा वन पंचायत के पास है। पूरे गांव की महिलाएं अपने बच्चों की तरह इस जंगल की सुरक्षा करते हैं। गर्मियों में आग से बचाव के लिए जंगल की निगरानी भी करती हैं।
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बंजियाणी के नाम से मशहूर गोपेश्वर गांव के इस जंगल में पानी के छोटे-छोटे कई स्रोत सैकड़ों लोगों की प्यास बुझा रहे हैं। बंजियाणी तोक में शहर के पास डेढ़ लाख से अधिक बांज के पेड़ रोजाना लगभग 20 लाख लीटर पानी का वाष्पीकरण कर क्षेत्र के लिए पर्याप्त बारिश और शुद्ध हवा प्रदान कर रहे हैं। गांव की महिला मंगल दल अध्यक्ष सुशीला सेमवाल ने कहा कि 1954 में इस क्षेत्र में विषम जलवायु के कारण पशुओं के लिए चारा पत्ती के पेड़ कम संख्या में थे। इस समस्या को देखते हुए उस दौर में गांव की श्यामा देवी, इंद्रा देवी, जेठी देवी, जयंती देवी सहित 10-12 महिलाओं ने दूसरे जंगलों से बांज के बीच एकत्र किए और यहां उन्हें रोपा। पौधों को पानी देकर उनको बड़ा किया और धीरे-धीरे जंगल का दायरा बढ़ता गया। उसके बाद पर्यावरणविद चंडीप्रसाद भट्ट ने गांव वालों के सहयोग से इस जंगल के विस्तार के लिए लोगों को जागरूक किया और खुद मुहिम में जुट गए। वर्तमान में पूरे गोपेश्वर गांव की महिलाएं अपने बुजुर्गों की इस विरासत को संजोए हैं। कहा कि जंगल की निगरानी के लिए महिलाएं तत्पर रहती हैं। गर्मियों के सीजन में सुबह से शाम तक आग से बचाव के लिए जंगल की निगरानी करती हैं।
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महिलाओं ने श्रमदान कर बनाई सुरक्षा दीवार

गोपेश्वर गांव के क्रांति भट्ट, उमेश भट्ट, हरीश भट्ट व सुनील भट्ट ने कहा कि ग्रामीणों की चारा पत्ती व जलावनी लकड़ी की आवश्यकता भी इसी जंगल से पूरी होती है। बताया कि वर्ष 2016 में इस जंगल की सुरक्षा के लिए गांव की 125 से अधिक महिलाओं ने दो माह तक श्रमदान कर जंगल के चारों तरफ सुरक्षा दीवार बनाई। महिलाओं का कहना है कि सरकार जंगल के अधिक विस्तार के लिए अनुदान दे और चारों तरफ तारबाड़ करवाए।
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- बंजियाणी का यह बांज का जंगल यहां के लोगों के लिए अनमोल विरासत है। गांव की महिलाएं यहां के पेड़-पौधों को अपने बच्चों की तरह पालती हैं। वर्तमान में पूरे विश्व में जिस तेजी से पर्यावरण में वायु प्रदूषण बढ़ रहा है यह चिंता का विषय है। पर्यावरण संरक्षण के लिए चौड़ी पत्ती वाले पेड़ पौधों के जंगलों के विस्तार कर जंगलों बचाने के लिए वृहद स्तर पर जागरूक करने की जरूरत है। - चंडी प्रसाद भट्ट पर्यावरणविद गोपेश्वर।
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