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बालपाटा में पूजा-अर्चना के मां नंदा को किया विदा
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बालपाटा में मां नंदा की कैलाश विदाई से पूर्व हुई विशेष पूजाएं। इस दौरान सैकड़ों भक्त उमड़े।
- फोटो : GOPESHWAR
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अपने भक्तों से विदा लेकर मां नंदा कैलाश के लिए विदा हो गई। नंदा सप्तमी के मौके पर बालपाटा बुग्याल में पूजा-अर्चना करने के बाद मां नंदा को भक्तों ने विदाई दी। अपनी आराध्य देवी मां नंदा से भक्तों ने अपने परिवारों की कुशलता की मनौतियां मांगी।
सोमवार को लोकजात यात्रा के अंतिम पड़ाव रामणी गांव में मां नंदा की विशेष पूजाएं हुई। पंडित मुंशी चंद्र ने मां नंदा का श्रृंगार किया। महिलाओं ने जागर और मांगल गीत गाकर मां नंदा का आह्वान किया। सुबह करीब दो बजे मां नंदा की डोली ने बालपाटा बुग्याल के लिए प्रस्थान किया। बालपाटा में पूजा-अर्चना के बाद मां नंदा को प्रतीक के रूप में कैलाश के लिए विदा किया जाता है। अपराह्न तीन बजे मां नंदा की डोली रात्रि प्रवास के लिए रामणी गांव पहुंची। ग्राम प्रधान सूरज पंवार ने बताया कि ग्रामीणों के साथ ही महिलाओं व ध्याणियों (विवाहित बेटियां) ने मां नंदा को श्रृंगार सामग्री के साथ ही नया अनाज, ककड़ी, मक्की भेंट की। थराली की विधायक मुन्नी देवी शाह ने भी मां नंदा से मनौतियां मांगी।
बामणी गांव में तीन दिवसीय नंदा लोकोत्सव शुरू
जोशीमठ। नीलकंठ पर्वत से मां नंदा ब्रह्म कमल के रूप में बदरीनाथ के बामणी गांव पहुंच गई हैं। इसी के साथ गांव में तीन दिवसीय नंदा लोकोत्सव शुरू हो गया है। बामणी गांव को मां नंदा का मायका माना जाता है। नंदा अष्टमी को यानि मंगलवार को बदरीनाथ धाम के गर्भगृह में बदरीश पंचायत में विराजमान कुबेर भी नंदा लोकोत्सव में पहुंचेंगे। 12 सितंबर को बामणी गांव से दो फुलारी (ब्रह्म कमल लाने वाले) मां नंदा को मायके में बुलाने के लिए नीलकंठ पर्वत की तलहटी में गए। सोमवार को नंदा सप्तमी पर फुलारी मां नंदा के प्रतीक के रूप में ब्रह्म कमल लेकर बामणी गांव पहुंचे। मान्यता है कि ब्रह्म कमल के रूप में मां नंदा बामणी गांव पहुंचती हैं। 16 सितंबर को मां नंदा को कैलाश के लिए विदा किया जाएगा। संवाद
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सोमवार को लोकजात यात्रा के अंतिम पड़ाव रामणी गांव में मां नंदा की विशेष पूजाएं हुई। पंडित मुंशी चंद्र ने मां नंदा का श्रृंगार किया। महिलाओं ने जागर और मांगल गीत गाकर मां नंदा का आह्वान किया। सुबह करीब दो बजे मां नंदा की डोली ने बालपाटा बुग्याल के लिए प्रस्थान किया। बालपाटा में पूजा-अर्चना के बाद मां नंदा को प्रतीक के रूप में कैलाश के लिए विदा किया जाता है। अपराह्न तीन बजे मां नंदा की डोली रात्रि प्रवास के लिए रामणी गांव पहुंची। ग्राम प्रधान सूरज पंवार ने बताया कि ग्रामीणों के साथ ही महिलाओं व ध्याणियों (विवाहित बेटियां) ने मां नंदा को श्रृंगार सामग्री के साथ ही नया अनाज, ककड़ी, मक्की भेंट की। थराली की विधायक मुन्नी देवी शाह ने भी मां नंदा से मनौतियां मांगी।
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बामणी गांव में तीन दिवसीय नंदा लोकोत्सव शुरू
जोशीमठ। नीलकंठ पर्वत से मां नंदा ब्रह्म कमल के रूप में बदरीनाथ के बामणी गांव पहुंच गई हैं। इसी के साथ गांव में तीन दिवसीय नंदा लोकोत्सव शुरू हो गया है। बामणी गांव को मां नंदा का मायका माना जाता है। नंदा अष्टमी को यानि मंगलवार को बदरीनाथ धाम के गर्भगृह में बदरीश पंचायत में विराजमान कुबेर भी नंदा लोकोत्सव में पहुंचेंगे। 12 सितंबर को बामणी गांव से दो फुलारी (ब्रह्म कमल लाने वाले) मां नंदा को मायके में बुलाने के लिए नीलकंठ पर्वत की तलहटी में गए। सोमवार को नंदा सप्तमी पर फुलारी मां नंदा के प्रतीक के रूप में ब्रह्म कमल लेकर बामणी गांव पहुंचे। मान्यता है कि ब्रह्म कमल के रूप में मां नंदा बामणी गांव पहुंचती हैं। 16 सितंबर को मां नंदा को कैलाश के लिए विदा किया जाएगा। संवाद
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