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कदम-कदम पर भाजपा के खेवनहार रहे मोहन प्रसाद
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बीकेटीसी के निवर्तमान अध्यक्ष मोहन प्रसाद थपलियाल और ओबीसी मोर्चा जिलाध्यक्ष कुलदीप चौहान को श?
- फोटो : GOPESHWAR
भुवन शाह
पीपलकोटी। मोहन प्रसाद थपलियाल चमोली जिले में कदम-कदम पर भाजपा के खेवनहार रहे। उनके असामयिक निधन से हर कोई दुखी है। उनका ग्राम प्रधान से लेकर दर्जा राज्यमंत्री तक का सफर बेहद संजीदा रहा। वे वर्ष 1988 से 1996 तक जोशीमठ ब्लाक के तपोवन ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान रहे। इसके बाद बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अंतिम अध्यक्ष रहे।
श्रीनगर के कमल किशोर थपलियाल ने बताया कि तपोवन के तप्तकुंड के सौंदर्यीकरण से लेकर गांव में पंचायत भवन का निर्माण, पॉलीटेक्निक की स्थापना आदि में उनका विशेष योगदान रहा। वर्ष 1996 में जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित होने के बाद उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली। उन्होंने हर मोर्चे पर पार्टी की मजबूती के लिए कार्य किया। गोपेश्वर में भाजपा के जिला कार्यालय की स्थापना में उनका खास योगदान रहा है। बूथ लेबल से लेकर जिलास्तरीय पदाधिकारियों के साथ उनका व्यवहार एक समान रहा।
पार्टी में उनकी निष्ठा को देखते हुए वर्ष 2018 में उन्हें बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (राज्यमंत्री स्तर) का अध्यक्ष बनाया गया। अपने कार्यकाल में दोनों धामों के विकास के लिए उन्होंने अपने प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखे। वर्ष 2020 में उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड के अस्तित्व में आने के बाद बीकेटीसी अस्तित्व में नहीं रही। इस प्रकार वे समिति के अंतिम अध्यक्ष रहे।
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पीपलकोटी। मोहन प्रसाद थपलियाल चमोली जिले में कदम-कदम पर भाजपा के खेवनहार रहे। उनके असामयिक निधन से हर कोई दुखी है। उनका ग्राम प्रधान से लेकर दर्जा राज्यमंत्री तक का सफर बेहद संजीदा रहा। वे वर्ष 1988 से 1996 तक जोशीमठ ब्लाक के तपोवन ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान रहे। इसके बाद बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अंतिम अध्यक्ष रहे।
श्रीनगर के कमल किशोर थपलियाल ने बताया कि तपोवन के तप्तकुंड के सौंदर्यीकरण से लेकर गांव में पंचायत भवन का निर्माण, पॉलीटेक्निक की स्थापना आदि में उनका विशेष योगदान रहा। वर्ष 1996 में जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित होने के बाद उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली। उन्होंने हर मोर्चे पर पार्टी की मजबूती के लिए कार्य किया। गोपेश्वर में भाजपा के जिला कार्यालय की स्थापना में उनका खास योगदान रहा है। बूथ लेबल से लेकर जिलास्तरीय पदाधिकारियों के साथ उनका व्यवहार एक समान रहा।
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पार्टी में उनकी निष्ठा को देखते हुए वर्ष 2018 में उन्हें बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (राज्यमंत्री स्तर) का अध्यक्ष बनाया गया। अपने कार्यकाल में दोनों धामों के विकास के लिए उन्होंने अपने प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखे। वर्ष 2020 में उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड के अस्तित्व में आने के बाद बीकेटीसी अस्तित्व में नहीं रही। इस प्रकार वे समिति के अंतिम अध्यक्ष रहे।
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