{"_id":"6ae4810abbd9c7639c0442b8","slug":"last-rites-of-naib-subedar-vishwanath-pratap-singh-performed-in-haridwar-karnpryag-news-c-48-1-sdrn1013-127589-2026-10-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamoli News: नायब सूबेदार विश्वनाथ प्रताप सिंह का हरिद्वार में किया अंतिम संस्कार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chamoli News: नायब सूबेदार विश्वनाथ प्रताप सिंह का हरिद्वार में किया अंतिम संस्कार
Fri, 30 Oct 2026 05:05 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Fri, 30 Oct 2026 05:05 PM IST
विज्ञापन
फोटो
देवाल। जम्मू-कश्मीर के बारामूला में 11वीं गढ़वाल के नायब सूबेदार विश्वनाथ प्रताप सिंह का ड्यूटी के दौरान दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को हरिद्वार में सैन्य सम्मान के साथ किया गया।
विश्वनाथ प्रताप सिंह (41) देवाल विकासखंड के हरमल गांव के निवासी थे। वह वर्ष 2002 में सेना में भर्ती हुए थे। बुधवार को बारामूला में ड्यूटी के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा। उनका पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार शाम को देहरादून स्थित उनके निवास पर लाया गया। वह अपने पीछे माता, पत्नी और दो बच्चे छोड़ गए हैं। सैनिक के निधन से उनके पैतृक गांव हरमल में शोक का माहौल है। दिवाली की खुशियां परिवार के लिए दुखों में बदल गई हैं। विश्वनाथ ने कुछ दिन पहले ही घर पर फोन किया था। उन्होंने दिवाली साथ मनाने और 21 नवंबर को भतीजी के विवाह की तैयारी करने का वादा किया था। रमेश गड़िया, पुष्कर गड़िया, हरिश सिंह आदि ने बताया कि विश्वनाथ मिलनसार और सरल स्वभाव के थे। संवाद
विज्ञापन
देवाल। जम्मू-कश्मीर के बारामूला में 11वीं गढ़वाल के नायब सूबेदार विश्वनाथ प्रताप सिंह का ड्यूटी के दौरान दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को हरिद्वार में सैन्य सम्मान के साथ किया गया।
विश्वनाथ प्रताप सिंह (41) देवाल विकासखंड के हरमल गांव के निवासी थे। वह वर्ष 2002 में सेना में भर्ती हुए थे। बुधवार को बारामूला में ड्यूटी के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा। उनका पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार शाम को देहरादून स्थित उनके निवास पर लाया गया। वह अपने पीछे माता, पत्नी और दो बच्चे छोड़ गए हैं। सैनिक के निधन से उनके पैतृक गांव हरमल में शोक का माहौल है। दिवाली की खुशियां परिवार के लिए दुखों में बदल गई हैं। विश्वनाथ ने कुछ दिन पहले ही घर पर फोन किया था। उन्होंने दिवाली साथ मनाने और 21 नवंबर को भतीजी के विवाह की तैयारी करने का वादा किया था। रमेश गड़िया, पुष्कर गड़िया, हरिश सिंह आदि ने बताया कि विश्वनाथ मिलनसार और सरल स्वभाव के थे। संवाद
विज्ञापन