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जोशीमठ-मलारी हाईवे फिर हुआ बंद
ब्यूरो/अमर उजाला गोपेश्वर
Updated Wed, 17 Aug 2016 10:33 PM IST
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जोशीमठ-मलारी हाईवे बुधवार को भूस्खलन होने से फिर बंद हो गया है। इससे आईटीबीपी और सेना को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी बाधित हो गई है। बदरीनाथ हाईवे लामबगड़ में लगातार पांचवें दिन भी अवरुद्ध रहा। दिनभर बारिश के चलते लामबगड़ भूस्खलन जोन में बीआरओ की मशीनें पत्थर और मलबा हटाने का काम भी शुरू नहीं कर पाई।
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जोशीमठ-मलारी हाईवे बुधवार सुबह रैणी गांव के पास भूस्खलन से फिर अवरुद्ध हो गया, जिससे सीमा क्षेत्र में आईटीबीपी और सेना के साथ ही नीती घाटी के ग्रामीणों की आवाजाही बाधित हो गई है। हाईवे के बार-बार बंद होने से आईटीबीपी और सेना को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।
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नीती घाटी में बीती सोमवार से लगातार बारिश हो रही है। बुधवार को भी दिनभर घाटी में बारिश रही, जिससे हाईवे को आवाजाही के लिए नहीं खोला जा सका। हाईवे तमक गांव के पास भी खतरनाक बना हुआ है। बीआरओ के कमान अधिकारी कर्नल आर सुब्रमण्यम का कहना है कि बारिश के कारण हाईवे को सुचारु रख पाना मुश्किल बना हुआ है। बारिश थमने के बाद ही हाईवे को पूरी तरह से सुचारु किया जा सकता है। बृहस्पतिवार को सुबह दस बजे तक वाहनों की आवाजाही सुचारु करा ली जाएगी।
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उधर बदरीनाथ हाईवे पर लामबगड़ में चट्टान से दिनभर रह-रहकर पत्थर छिटक रहे हैं। विगत दिवस मंगलवार को जैसे ही बीआरओ का डोजर भूस्खलन क्षेत्र में मलबा हटाने गया, तभी मात्र तीन मीटर की दूरी पर चट्टान से बड़े-बड़े बोल्डर छिटक कर अलकनंदा में जा गिरे।
जेसीबी चालक ने तेजी दिखाते हुए मशीन को पीछे की ओर मोड़ दिया। यहां काम कर रहे मजदूर भी बाल-बाल बचे। बीआरओ के द्वितीय कमान अधिकारी प्रदीप का कहना है कि तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को भूस्खलन क्षेत्र से पैदल आवाजाही के लिए भी मना किया गया है, बावजूद इसके जान जोखिम में डालकर लोग भूस्खलन क्षेत्र से आवाजाही कर रहे हैं। कई बार लोग पत्थरों की चपेट में आते-आते बचे हैं। जब तक लामबगड़ भूस्खलन क्षेत्र का स्थायी ट्रीटमेंट नहीं हो जाता, तब तक यहां वाहनों की आवाजाही खतरे का सबब बनी रहेगी।