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ग्वालदम में गढ़, कुमाऊं संस्कृति का संगम
ब्यूरो/अमर उजाला, चमोली (गोपेश्वर)
Updated Tue, 18 Oct 2016 09:56 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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जीआईसी मैदान में तीन दिवसीय उत्तराखंड काश्तकार एवं शिल्पी मेले के अंतिम दिन रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। गढ़वाल तथा बागेश्वर की सांस्कृतिक संस्थाओं ने गढ़वाली और कुमाऊंनी लोकगीत और नृत्यों की प्रस्तुतियां दीं।
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मेले में लगे कृषि, उद्यान एवं पशुपालन सहित अन्य विभागों के स्टॉलों से किसानों ने कृषि उपकरण, बीज सहित कृषि विज्ञान केंद्र के स्टॉल पर तैनात विशेषज्ञों से विभिन्न जानकारियां जुटाईं।
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समारोह में बागेश्वर के विधायक चंदन रामदास ने कहा कि इस मेले ने प्रदेश की दो संस्कृतियों को जोड़ने की भूमिका निभाई है। इससे पूर्व सोमवार को आयोजित सांस्कृतिक संध्या में बधाणी संस्था ने पांडव नृत्य सहित नंदा की झांकी और अन्य कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दीं।
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सांस्कृतिक संध्या का उद्घाटन कपकोट के विधायक ललित फर्स्वाण ने किया। मेला समापन पर प्रतिभागियों को आयोजकों ने सम्मानित किया। समापन समारोह के दौरान ग्राम प्रधान मीनू टम्टा, व्यापार संघ अध्यक्ष अनिल नेगी, युवक मंगल दल अध्यक्ष प्रदीप बुटोला, हरीश जोशी, सुंदर परिहार, कुंदन परिहार, त्रिलोक रावत, विवेक शाह, भावना रावत, कला देवी, उर्मिला गड़िया और दयाल टम्टा आदि मौजूद थे।