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जोशीमठ क्षेत्र का भूगर्भीय व पर्यावरणीय सर्वे की मांग
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जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति ने बीते अक्तूबर में हुई बारिश बारिश से जोशीमठ क्षेत्र में जगह-जगह हुए भू-धंसाव व भूस्खलन को देखते हुए शीघ्र जोशीमठ का भूगर्भीय व पर्यावरणीय सर्वेक्षण करने की मांग उठाई है। संघर्ष समिति ने इस संबंध में उपजिलाधिकारी जोशीमठ के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।
नगर पालिका जोशीमठ के पूर्व अध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, अतुल सती, कमल रतूड़ी, कांग्रेस ओबीसी प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष विक्रम भुजवाण, जय प्रकाश भट्ट, हरीश भंडारी, सभासद अमित सती, अतुल बहुगुणा, रोहित परमार आदि ने सीएम को भेजे ज्ञापन में कहा कि जोशीमठ क्षेत्र पूर्व से ही आपदाग्रस्त रहा है। जोशीमठ के बारे में 1976 की मिश्रा कमेटी की रिपोर्ट ने इस क्षेत्र को आपदा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील बताया था। रिपोर्ट के अनुसार जोशीमठ क्षेत्र मोरेन (ग्लेशियर का मलबा) पर बसा है। लिहाजा यहां निर्माण व विकास गतिविधियों के संबंध में पर्यावरणीय संवेदनशीलता अपनाने की जरूरत है। 17 से 19 अक्तूबर को हुई भारी बारिश से जोशीमठ क्षेत्र में कई जगहों भू-धंसाव शुरू हो गया है। जोशीमठ के प्रवेश द्वार से ही भूस्खलन हो रहा है, जिसका मलबा सीधे अलकनंदा में जा रहा है। जोशीमठ की तलहटी में अलकनंदा बेहद संकरी घाटी से होकर गुजरती है। नदी से भी लगातार भू कटाव हो रहा है, जिससे कई बस्तियों को खतरा बना हुआ है। संघर्ष समिति ने जोशीमठ क्षेत्र का व्यापकस्तर पर भूगर्भीय और पर्यावरणीय सर्वेक्षण की मांग उठाई है, जिससे भविष्य में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा सकें।
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नगर पालिका जोशीमठ के पूर्व अध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, अतुल सती, कमल रतूड़ी, कांग्रेस ओबीसी प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष विक्रम भुजवाण, जय प्रकाश भट्ट, हरीश भंडारी, सभासद अमित सती, अतुल बहुगुणा, रोहित परमार आदि ने सीएम को भेजे ज्ञापन में कहा कि जोशीमठ क्षेत्र पूर्व से ही आपदाग्रस्त रहा है। जोशीमठ के बारे में 1976 की मिश्रा कमेटी की रिपोर्ट ने इस क्षेत्र को आपदा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील बताया था। रिपोर्ट के अनुसार जोशीमठ क्षेत्र मोरेन (ग्लेशियर का मलबा) पर बसा है। लिहाजा यहां निर्माण व विकास गतिविधियों के संबंध में पर्यावरणीय संवेदनशीलता अपनाने की जरूरत है। 17 से 19 अक्तूबर को हुई भारी बारिश से जोशीमठ क्षेत्र में कई जगहों भू-धंसाव शुरू हो गया है। जोशीमठ के प्रवेश द्वार से ही भूस्खलन हो रहा है, जिसका मलबा सीधे अलकनंदा में जा रहा है। जोशीमठ की तलहटी में अलकनंदा बेहद संकरी घाटी से होकर गुजरती है। नदी से भी लगातार भू कटाव हो रहा है, जिससे कई बस्तियों को खतरा बना हुआ है। संघर्ष समिति ने जोशीमठ क्षेत्र का व्यापकस्तर पर भूगर्भीय और पर्यावरणीय सर्वेक्षण की मांग उठाई है, जिससे भविष्य में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा सकें।
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