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वन अधिनियम में फंसी तीन ब्लाक की 45 सड़कें
ब्यूरो/ अमर उजाला चमोली
Updated Wed, 03 Feb 2016 09:31 PM IST
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गांवों की लाइफ लाइन मानी जाने वाली सड़कें वन अधिनियम में फंसी हैं और ग्रामीण दशकों से पैदल दूरी नाप रहे हैं। जिले की कर्णप्रयाग और आसपास की 45 से अधिक सड़कें पिछले 11 माह से वन अधिनियम के क्लीयरेंस का इंतजार कर रही हैं।
गैरसैंण ब्लाक के चौरासैंण-भटक्वाली सड़क पीएमजीएसवाई के पास है। कर्णप्रयाग ब्लाक की ढमढमा भी इसी विभाग के पास है। पीएमजीएसवाई के अधिकारियों के अनुसार दोनों सड़कें वन अधिनियम में हैं। चौरसैंण के ग्रामीणों ने आंदोलित होकर एक किमी सड़क खुद ही बना ली थी। तब पीएमजीएसवाई के अधिकारियों ने तीन माह में मामला सुझाने का आश्वासन दिया था लेकिन चार माह बीत जाने के बाद भी सड़क वन अधिनियम के जाल से बाहर नहीं निकल सकी। यही नहीं लंगासू से उत्तरों-चमाली-स्वर्का हो कोटी-पैंखोली, कोटी-घतौड़ा, मार्च 2015 में ऑनलाइन हुई सड़कें वन विभाग से स्वीकृति का इंतजार कर रही हैं। स्थिति यह है कि लोनिवि गैरसैंण की 16, गौचर की 15 और कर्णप्रयाग डिवीजन की 14 सड़कों पर वन अधिनियम का रोड़ा है। दशमद्वार विकास मंच के अध्यक्ष जीबी पंत का कहना है कि गांवों में रोजगार सहित अन्य संसाधन जुटाने के लिए सड़कें होना जरूरी हैं, लेकिन सड़कों के निर्माण में देरी से गांव पलायन के चलते खाली हो रहे हैं।
कोट
वन अधिनियम जटिल प्रक्रिया है, लेकिन सरकार सड़कों के निर्माण के प्रति सजग है। लगातार वन विभाग और शासन के अधिकारियों के साथ बैठक कर सड़कों को स्वीकृति दी जा रही है। गौचर, कर्णप्रयाग और गैरसैंण सहित जिले की तमाम सड़कों की डिटेल लेकर देहरादून में वन विभाग और शासन के उच्चाधिकारियों के साथ बैठक कर मामलों का निस्तारण किया जाएगा। - डा. अनुसूया प्रसाद मैखुरी, उपाध्यक्ष विधानसभा उत्तराखंड और विधायक कर्णप्रयाग।
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गैरसैंण ब्लाक के चौरासैंण-भटक्वाली सड़क पीएमजीएसवाई के पास है। कर्णप्रयाग ब्लाक की ढमढमा भी इसी विभाग के पास है। पीएमजीएसवाई के अधिकारियों के अनुसार दोनों सड़कें वन अधिनियम में हैं। चौरसैंण के ग्रामीणों ने आंदोलित होकर एक किमी सड़क खुद ही बना ली थी। तब पीएमजीएसवाई के अधिकारियों ने तीन माह में मामला सुझाने का आश्वासन दिया था लेकिन चार माह बीत जाने के बाद भी सड़क वन अधिनियम के जाल से बाहर नहीं निकल सकी। यही नहीं लंगासू से उत्तरों-चमाली-स्वर्का हो कोटी-पैंखोली, कोटी-घतौड़ा, मार्च 2015 में ऑनलाइन हुई सड़कें वन विभाग से स्वीकृति का इंतजार कर रही हैं। स्थिति यह है कि लोनिवि गैरसैंण की 16, गौचर की 15 और कर्णप्रयाग डिवीजन की 14 सड़कों पर वन अधिनियम का रोड़ा है। दशमद्वार विकास मंच के अध्यक्ष जीबी पंत का कहना है कि गांवों में रोजगार सहित अन्य संसाधन जुटाने के लिए सड़कें होना जरूरी हैं, लेकिन सड़कों के निर्माण में देरी से गांव पलायन के चलते खाली हो रहे हैं।
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वन अधिनियम जटिल प्रक्रिया है, लेकिन सरकार सड़कों के निर्माण के प्रति सजग है। लगातार वन विभाग और शासन के अधिकारियों के साथ बैठक कर सड़कों को स्वीकृति दी जा रही है। गौचर, कर्णप्रयाग और गैरसैंण सहित जिले की तमाम सड़कों की डिटेल लेकर देहरादून में वन विभाग और शासन के उच्चाधिकारियों के साथ बैठक कर मामलों का निस्तारण किया जाएगा। - डा. अनुसूया प्रसाद मैखुरी, उपाध्यक्ष विधानसभा उत्तराखंड और विधायक कर्णप्रयाग।
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