{"_id":"5cbdebcebdec22145e4838eb","slug":"121555950542-chamoli-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आज घांघरिया के लिए रवाना होंगे सेना के इंजीनियरिंग कोर के 40 जवान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आज घांघरिया के लिए रवाना होंगे सेना के इंजीनियरिंग कोर के 40 जवान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
जोशीमठ। प्रसिद्घ हेमकुंड साहिब और आस्था पथ से बर्फ हटाने के लिए मंगलवार को गोविंदघाट से सेना की इंजीनियरिंग कोर के 40 जवान गोविंदघाट से घांघरिया के लिए रवाना होंगे। सोमवार को जवानों ने गोविंदघाट के गुरुद्वारे में मत्था टेककर गुरुवाणी का पाठ किया।
गोविंदघाट गुरुद्वारे के मुख्य प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने बताया कि सेना की 418वीं इंजीनियरिंग कोर बीते कई वर्षों से हेमकुंड साहिब के बर्फीले मार्ग को खोलने की सेवा कर रही है। जवानों की इस टीम का नेतृत्व सूबेदार मेजर सुखदर्शन सिंह व सूबेदार परवान सिंह कर रहे हैं। टीम में शामिल जवान पंजाब और देश के विभिन्न प्रांतों के रहने वाले हैं।
इंजीनियरिंग कोर के ही सैनिक थे सरदार मोदन सिंह
गोपेश्वर। वर्ष 1923 में हेमकुंड की खोज करने वाले सरदार मोदन सिंह भी सेना की इंजीनियरिंग कोर के सैनिक थे। पूर्व में हेमकुंड साहिब का पैदल ट्रेक भ्यूंडार से ही बर्फ से ढका रहता था, जिसे खोलने के लिए पंजाब और अन्य प्रांतों से इंजीनियरिंग कोर के जवान यहां पहुंचते थे। पवित्र पुस्तक ‘विचित्र नाटक’ में उल्लेख है कि गुरु गोविंद सिंह साहब की तपस्थली हेमकुंड साहिब की खोज करने वाले सरदार मोदन सिंह सेना की इंजीनियरिंग कोर के ही सैनिक थे। ब्यूरो
विज्ञापन
गोविंदघाट गुरुद्वारे के मुख्य प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने बताया कि सेना की 418वीं इंजीनियरिंग कोर बीते कई वर्षों से हेमकुंड साहिब के बर्फीले मार्ग को खोलने की सेवा कर रही है। जवानों की इस टीम का नेतृत्व सूबेदार मेजर सुखदर्शन सिंह व सूबेदार परवान सिंह कर रहे हैं। टीम में शामिल जवान पंजाब और देश के विभिन्न प्रांतों के रहने वाले हैं।
विज्ञापन
इंजीनियरिंग कोर के ही सैनिक थे सरदार मोदन सिंह
गोपेश्वर। वर्ष 1923 में हेमकुंड की खोज करने वाले सरदार मोदन सिंह भी सेना की इंजीनियरिंग कोर के सैनिक थे। पूर्व में हेमकुंड साहिब का पैदल ट्रेक भ्यूंडार से ही बर्फ से ढका रहता था, जिसे खोलने के लिए पंजाब और अन्य प्रांतों से इंजीनियरिंग कोर के जवान यहां पहुंचते थे। पवित्र पुस्तक ‘विचित्र नाटक’ में उल्लेख है कि गुरु गोविंद सिंह साहब की तपस्थली हेमकुंड साहिब की खोज करने वाले सरदार मोदन सिंह सेना की इंजीनियरिंग कोर के ही सैनिक थे। ब्यूरो
विज्ञापन