उत्तराखंड में ये कैसा विकास?: बीमार महिला को तीन किमी कंधे पर सड़क तक लाए लोग, छह साल पहले हुआ था सड़क का एलान
बागेश्वर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। सोमवार को दोबाड़ निवासी 68 वर्षीय तुलसी देवी की अचानक तबीयत बिगड़ने पर ग्रामीणों को उन्हें तीन किलोमीटर पैदल डंडी-कंडी के सहारे सड़क तक पहुंचाना पड़ा।
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विकास के तमाम दावों के बीच बागेश्वर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव आज भी बना हुआ है। सोमवार को दोबाड़ निवासी 68 वर्षीय तुलसी देवी पत्नी स्वरूप सिंह देव की अचानक तबीयत बिगड़ने पर ग्रामीणों को उन्हें तीन किलोमीटर पैदल डंडी-कंडी के सहारे सड़क तक पहुंचाना पड़ा।
ग्रामीण चंचल देव ने बताया कि तुलसी देवी को तेज पेट दर्द और बुखार की शिकायत थी। सड़क मार्ग न होने के कारण ग्रामीण मोहन सिंह, लक्ष्मण सिंह और कल्याण सिंह ने उन्हें कंधे पर डंडी-कंडी के सहारे सड़क तक पहुंचाया, जिसके बाद उन्हें वाहन से जिला अस्पताल लाया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है। दोबाड़ गांव कारगिल युद्ध के शहीद मोहन सिंह दानू का पैतृक गांव है, जिन्हें मरणोपरांत वीरता पुरस्कार से नवाजा गया था। वर्ष 2021 में तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गांव के लिए सड़क निर्माण की घोषणा की थी। ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण के लिए कई बार सर्वे भी हो चुके हैं, लेकिन धरातल पर निर्माण कार्य आज तक शुरू नहीं हो सका। सुविधाओं के अभाव में दोबाड़ गांव से कई परिवार पलायन कर चुके हैं और रोजगार की तलाश में युवा शहरों की ओर रुख कर चुके हैं। गांव में केवल बुजुर्ग ही बचे हैं जो पुश्तैनी घरों को संभाले हुए हैं। ऐसे में किसी के बीमार पड़ने पर आपात स्थिति बन जाती है। ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2015-16 में गांव का जूनियर हाईस्कूल भी बंद हो गया, जिसके कारण अब मासूम बच्चों को पढ़ाई के लिए 8 से 10 किलोमीटर दूर पैदल जाना पड़ता है।
सड़क निर्माण का यह प्रस्ताव पीएमजीएसवाई के फेज चार में शामिल है। वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद केंद्र सरकार से स्वीकृति मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। हमारी सरकार प्रत्येक गांव को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
-सुरेश गढ़िया, विधायक, कपकोट