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तो भिरतघातियों ने डुबाई भाजपा की नैय्या
Updated Fri, 23 Nov 2018 12:37 AM IST
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बागेश्वर। नगर पंचायत कपकोट में मतदान के ठीक एक दिन पहले तक तेजी से चली भाजपा की लहर अचानक मतदान के दिन ढीली कैसे हो गई यह सवाल क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भितरघातियों ने भाजपा की नैय्या डुबाई है। पार्टी को मिली करारी हार को लेकर निष्ठावान कार्यकर्ताओं का गुस्सा सामने आने लगा है। उन्होंने हाईकमान से हार के कारणों को लेकर शीघ्र बैठक बुलाने की मांग की है।
राज्य के अधिकांश निकायों के चुनाव परिणाम भाजपा के पक्ष में गए। लेकिन कपकोट में कांग्रेेेेस ने भाजपा का गढ़ ध्वस्त कर अपना परचम फहरा दिया। इतना ही नहीं वार्ड सदस्य के पदों पर भी पार्टी के दो ही प्रत्याशी जीत सके। भाजपा के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी गिरीश जोशी का चुनावी प्रदर्शन का हाल यह था कि वह सात वार्डों में से महज मंडलखेत में कांग्रेस से सिर्फ 27 मतों से आगे रहे। दरअसल इस हार की पटकथा सीट के आरक्षण के साथ ही लिखी जानी शुरू हो गई थी। इस बार अध्यक्ष पद फिर से सामान्य महिला के लिए आरक्षित किए जाने को पार्टी के कुछ नेता पचा नहीं सके। उन्होंने आपत्ति दर्ज की तो अध्यक्ष पद की यह सीट अनारक्षित हो गया।
इस बीच हाईकमान ने पूर्व सभासद गिरीश चंद्र जोशी पर भरोसा जताया। शुरूआती दौर में विरोध अंदर ही अंदर सामने आया। हालांकि बाद में भाजपा नेताओं ने सक्रियता दिखाते हुए असंतोष सुलझा दिया। इससे कोई बागी मैदान में नहीं उतरा। मतदान के 48 घंटे पहले भाजपा ने जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया। इससे हर कोई मानने लगा था कि यहां भाजपा का गढ़ कोई भी नहीं ढहा सकेगा। मंगलवार जैसे ही परिणाम निकला तो भाजपा चारों खाने चित्त हो गई।
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कोट
प्रदेश हाईकमान के निर्देश पर जल्द ही समीक्षा बैठक होगी। बैठक में हार के कारणों का पता लगाया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्यवाई की जाएगी। -शेर सिंह गढ़िया, जिलाध्यक्ष भाजपा बागेश्वर।
राज्य के अधिकांश निकायों के चुनाव परिणाम भाजपा के पक्ष में गए। लेकिन कपकोट में कांग्रेेेेस ने भाजपा का गढ़ ध्वस्त कर अपना परचम फहरा दिया। इतना ही नहीं वार्ड सदस्य के पदों पर भी पार्टी के दो ही प्रत्याशी जीत सके। भाजपा के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी गिरीश जोशी का चुनावी प्रदर्शन का हाल यह था कि वह सात वार्डों में से महज मंडलखेत में कांग्रेस से सिर्फ 27 मतों से आगे रहे। दरअसल इस हार की पटकथा सीट के आरक्षण के साथ ही लिखी जानी शुरू हो गई थी। इस बार अध्यक्ष पद फिर से सामान्य महिला के लिए आरक्षित किए जाने को पार्टी के कुछ नेता पचा नहीं सके। उन्होंने आपत्ति दर्ज की तो अध्यक्ष पद की यह सीट अनारक्षित हो गया।
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इस बीच हाईकमान ने पूर्व सभासद गिरीश चंद्र जोशी पर भरोसा जताया। शुरूआती दौर में विरोध अंदर ही अंदर सामने आया। हालांकि बाद में भाजपा नेताओं ने सक्रियता दिखाते हुए असंतोष सुलझा दिया। इससे कोई बागी मैदान में नहीं उतरा। मतदान के 48 घंटे पहले भाजपा ने जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया। इससे हर कोई मानने लगा था कि यहां भाजपा का गढ़ कोई भी नहीं ढहा सकेगा। मंगलवार जैसे ही परिणाम निकला तो भाजपा चारों खाने चित्त हो गई।
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प्रदेश हाईकमान के निर्देश पर जल्द ही समीक्षा बैठक होगी। बैठक में हार के कारणों का पता लगाया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्यवाई की जाएगी। -शेर सिंह गढ़िया, जिलाध्यक्ष भाजपा बागेश्वर।