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शिव के रंग में रंगा जिला
ब्यूरो/अमर उजाला/अमरोहा
Updated Mon, 07 Mar 2016 12:46 AM IST
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अमरोहा से गुजरता कांवड़तियों का जत्था
- फोटो : amar ujala
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महाशिवरात्रि सोमवार को मनाई जाएगी, मगर इससे पहले ही पूरा जिला शिव के रंग में रंगा नजर आ रहा है। हर तरफ केसरिया वस्त्रों में कांवड़िये दिखाई दे रहे हैं। जगह-जगह भजन और शिव की स्तुति में गीत बज रहे हैं।
शिवालय भी दुल्हन की तरह सजाए गए हैं। वहीं सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। सीसी टीवी कैमरे से सुरक्षा पर नजर रखी जाएगी। सिविल ड्रेस में भी पुलिसकर्मी शिवालयों के बाहर मुस्तैद रहेंगे।
महाशिवरात्रि पर सोमवार सुबह पांच बजे से जलाभिषेक का सिलसिला शुरू होकर दोपहर तक जारी रहेगा। इसके लिए शिवालयों में जलाभिषेक की सभी तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं। रविवार को भी अमरोहा-बिजनौर मार्ग पर कांवड़ियों की कतार लगी रही।
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अमरोहा से नेशनल हाईवे तक कांवड़िये ही कांवड़िये नजर आ रहे थे। भोले की भक्ति में सब कुछ भूले कांवड़िये तेजी से मंजिल की ओर आगे बढ़ रहे थे। नेशनल हाईवे पर भी यही नजारा रहा। ब्रजघाट से शिवभक्त जल लेकर इसी रास्ते लौट रहे थे।
नेशनल हाईवे पर तमाम लोगों ने सेवा के लिए कांवड़ शिविर भी लगाए थे। शाम तक सभी कांवड़िये गंतव्य पर पहुंच गए और जलाभिषेक को शिवालयों के बाहर डेरा डाल दिया था। अब सुबह से ही जलाभिषेक का सिलसिला शुरू हो जाएगा। वासुदेव तीर्थ स्थल समेत अन्य कई मंदिरों पर मेले का आयोजन होगा। इसके अलावा क्षेत्र के प्रसिद्ध शिवालयों पर भंडारे का भी आयोजन होगा।
11 बजे से 1.20 तक चढ़ाई जाएगी खड़ी कांवड़
पंडित आशीष त्रिवेदी ने बताया कि सोमवार को महाशिवरात्रि है। सुबह पांच बजे से जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त है, दोपहर तक जलाभिषेक किया जाएगा। पूर्वाह्न ग्यारह बजे से दोपहर 1.20 बजे तक खड़ी कांवड़ चढ़ाई जाएगी। वहीं, महाशिवरात्रि का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए पूरे दिन जलाभिषेक करने का शुभ मुहूर्त है। विधिविधान से आराध्य देव की पूजा अर्चना की जाए।
किंवदंती, श्री कृष्ण ने किया था तालाब में स्नान
अमरोहा। वासुदेव तीर्थ स्थल को लेकर किंवदंती है कि, भगवान श्री कृष्ण ने यहां आकर तालाब में स्नान किया था, तभी से यह वासुदेव तीर्थ स्थल कहलाया है। यहां, विशाल शिवलिंग आकर्षण का केंद्र हैं।
सोमवार को महाशिवरात्रि होने से विशेष महत्व
ज्योतिषाचार्य का कहना है कि महाशिवरात्रि सोमवार को होने से इसका महत्व और बढ़ गया है। भगवान शिव शंकर की विधिविधान के साथ पूजा-अर्चना करने और जलाभिषेक करने से विशेष फल की प्राप्ति होगी।
गंगाजल, दूध, दही, शहद, पुष्प आदि से भगवान शिव शंकर का अभिषेक किया जाए। धूप दीप के साथ ही बेलपत्र, भांग धतूरा, बैर, चौलाई के लड्डू का प्रसाद शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए। भगवान शिव के साथ ही शिव परिवार की पूजा भी करनी चाहिए।
मंदिरों में हुआ हवन यज्ञ, भंडारों का आयोजन
कैलसा। महाशिवरात्रि की पूर्व संध्या पर कैलसा बार्डर स्थित शिव मंदिर में हवन यज्ञ का आयोजन हुआ। शिवभक्तों ने हवन यज्ञ में भाग लेकर पूर्णाहुति दी। विश्व कल्याण और विश्व शांति की कामना की। यहां स्वामी बालक दास, राजकुमार अरुण, राजेंद्र सिंह, लक्ष्मी शर्मा, योगेश शर्मा, पिंटू शर्मा, पूनम अरुण आदि मौजूद रहे।
मंदिर में चल रहा निर्माण कार्य पूर्ण हुआ। यहां के अलावा बहलौलपुर, वारसपुर, पचौकरा, सिरसा आदि मंदिरों में भी हवन यज्ञ हुआ। इन मंदिरों के पास सोमवार को महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में मेले का आयोजन होगा। इन मंदिरों पर रविवार को भंडारों का भी आयोजन हुआ।
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शिवालय भी दुल्हन की तरह सजाए गए हैं। वहीं सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। सीसी टीवी कैमरे से सुरक्षा पर नजर रखी जाएगी। सिविल ड्रेस में भी पुलिसकर्मी शिवालयों के बाहर मुस्तैद रहेंगे।
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महाशिवरात्रि पर सोमवार सुबह पांच बजे से जलाभिषेक का सिलसिला शुरू होकर दोपहर तक जारी रहेगा। इसके लिए शिवालयों में जलाभिषेक की सभी तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं। रविवार को भी अमरोहा-बिजनौर मार्ग पर कांवड़ियों की कतार लगी रही।
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अमरोहा से नेशनल हाईवे तक कांवड़िये ही कांवड़िये नजर आ रहे थे। भोले की भक्ति में सब कुछ भूले कांवड़िये तेजी से मंजिल की ओर आगे बढ़ रहे थे। नेशनल हाईवे पर भी यही नजारा रहा। ब्रजघाट से शिवभक्त जल लेकर इसी रास्ते लौट रहे थे।
नेशनल हाईवे पर तमाम लोगों ने सेवा के लिए कांवड़ शिविर भी लगाए थे। शाम तक सभी कांवड़िये गंतव्य पर पहुंच गए और जलाभिषेक को शिवालयों के बाहर डेरा डाल दिया था। अब सुबह से ही जलाभिषेक का सिलसिला शुरू हो जाएगा। वासुदेव तीर्थ स्थल समेत अन्य कई मंदिरों पर मेले का आयोजन होगा। इसके अलावा क्षेत्र के प्रसिद्ध शिवालयों पर भंडारे का भी आयोजन होगा।
11 बजे से 1.20 तक चढ़ाई जाएगी खड़ी कांवड़
पंडित आशीष त्रिवेदी ने बताया कि सोमवार को महाशिवरात्रि है। सुबह पांच बजे से जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त है, दोपहर तक जलाभिषेक किया जाएगा। पूर्वाह्न ग्यारह बजे से दोपहर 1.20 बजे तक खड़ी कांवड़ चढ़ाई जाएगी। वहीं, महाशिवरात्रि का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए पूरे दिन जलाभिषेक करने का शुभ मुहूर्त है। विधिविधान से आराध्य देव की पूजा अर्चना की जाए।
किंवदंती, श्री कृष्ण ने किया था तालाब में स्नान
अमरोहा। वासुदेव तीर्थ स्थल को लेकर किंवदंती है कि, भगवान श्री कृष्ण ने यहां आकर तालाब में स्नान किया था, तभी से यह वासुदेव तीर्थ स्थल कहलाया है। यहां, विशाल शिवलिंग आकर्षण का केंद्र हैं।
सोमवार को महाशिवरात्रि होने से विशेष महत्व
ज्योतिषाचार्य का कहना है कि महाशिवरात्रि सोमवार को होने से इसका महत्व और बढ़ गया है। भगवान शिव शंकर की विधिविधान के साथ पूजा-अर्चना करने और जलाभिषेक करने से विशेष फल की प्राप्ति होगी।
गंगाजल, दूध, दही, शहद, पुष्प आदि से भगवान शिव शंकर का अभिषेक किया जाए। धूप दीप के साथ ही बेलपत्र, भांग धतूरा, बैर, चौलाई के लड्डू का प्रसाद शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए। भगवान शिव के साथ ही शिव परिवार की पूजा भी करनी चाहिए।
मंदिरों में हुआ हवन यज्ञ, भंडारों का आयोजन
कैलसा। महाशिवरात्रि की पूर्व संध्या पर कैलसा बार्डर स्थित शिव मंदिर में हवन यज्ञ का आयोजन हुआ। शिवभक्तों ने हवन यज्ञ में भाग लेकर पूर्णाहुति दी। विश्व कल्याण और विश्व शांति की कामना की। यहां स्वामी बालक दास, राजकुमार अरुण, राजेंद्र सिंह, लक्ष्मी शर्मा, योगेश शर्मा, पिंटू शर्मा, पूनम अरुण आदि मौजूद रहे।
मंदिर में चल रहा निर्माण कार्य पूर्ण हुआ। यहां के अलावा बहलौलपुर, वारसपुर, पचौकरा, सिरसा आदि मंदिरों में भी हवन यज्ञ हुआ। इन मंदिरों के पास सोमवार को महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में मेले का आयोजन होगा। इन मंदिरों पर रविवार को भंडारों का भी आयोजन हुआ।