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अल्मोड़ा में दी आपदा प्रबंधन की जानकारी
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Workshop For Disaster Managemant
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अल्मोड़ा। एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी थाइलैंड और सीओई फॉर एनआरडीएमएस इन उत्तराखंड एसएसजे विवि की ओर से जीआईएस और रिमोट सेंसिंग तकनीक पर आधारित आपदा प्रबंधन की पांच दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला हो रही है। इसका शुभारंभ विवि के कुलसचिव डॉ. डीएस बिष्ट ने किया। उन्होंने आपदा प्रबंधन के लिए विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ हुए करार की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन के लिए आधुनिकतम तकनीकों का उपयोग किया जाना चाहिए।
केंद्र के तकनीकी सलाहकार प्रो. जेएस रावत ने कार्यक्रम के उद्देश्य, प्रशिक्षण की आपदा प्रबंधन में जरूरत बताई। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. गिरीश चंद्र जोशी ने पर्यावरण संस्थान वाले राज्य की प्राकृतिक आपदाओं और उनके अत्याधुनिक प्रबंधन के लिए विकसित डाटाबेस और प्रशिक्षण कार्यक्रम की उपयोगिता बताई। एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के निदेशक डॉ. मंजुल कुमार हजारिका ने तकनीकी काल के प्रशिक्षण के लिए विकसित सॉफ्टवेयर की जानकारी दी।
जियो इन्फॉरमेटिक्स सेंटर थाइलैंड के तकनीकी विशेषज्ञों ने आपदा के वास्तविक समय में आपदा प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। एनआरडीएमएस केंद्र निदेशक डॉ. नंदन सिंह बिष्ट ने कहा कि पिछले डेढ़ दशक से केंद्र ने विभिन्न प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण किया है। कार्यशाला में प्रबंधक एचके बिरला, अतिरिक्त कार्यक्रम सचिव आपदा प्रबंधन विभाग डॉ. आनंद श्रीवास्तव, रवींद्र नाथ पाठक आदि रहे।
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केंद्र के तकनीकी सलाहकार प्रो. जेएस रावत ने कार्यक्रम के उद्देश्य, प्रशिक्षण की आपदा प्रबंधन में जरूरत बताई। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. गिरीश चंद्र जोशी ने पर्यावरण संस्थान वाले राज्य की प्राकृतिक आपदाओं और उनके अत्याधुनिक प्रबंधन के लिए विकसित डाटाबेस और प्रशिक्षण कार्यक्रम की उपयोगिता बताई। एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के निदेशक डॉ. मंजुल कुमार हजारिका ने तकनीकी काल के प्रशिक्षण के लिए विकसित सॉफ्टवेयर की जानकारी दी।
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जियो इन्फॉरमेटिक्स सेंटर थाइलैंड के तकनीकी विशेषज्ञों ने आपदा के वास्तविक समय में आपदा प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। एनआरडीएमएस केंद्र निदेशक डॉ. नंदन सिंह बिष्ट ने कहा कि पिछले डेढ़ दशक से केंद्र ने विभिन्न प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण किया है। कार्यशाला में प्रबंधक एचके बिरला, अतिरिक्त कार्यक्रम सचिव आपदा प्रबंधन विभाग डॉ. आनंद श्रीवास्तव, रवींद्र नाथ पाठक आदि रहे।
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