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बिना तकनीशियनों के कैसे चलेंगे वेंटिलेटर
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एम्बुलेंस
- फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। कोरोना की तीसरी लहर का प्रकोप बढ़ने लगा है। रविवार को जिले में 40 कोरोना केस आए। यदि संक्रमण की रफ्तार ऐसे ही बढ़ती रही तो आने वाले समय में कई लोगों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है। बेस अस्पताल (मेडिकल कॉलेज) में कोरोना से लड़ने के लिए इंतजाम की बात करें तो यहां उपकरण तो पूरे हैं, लेकिन तकनीशियनों का भारी अभाव है।
बेस में वर्तमान में पांच तकनीशियन तैनात हैं, लेकिन पांच पद रिक्त हैं। अस्पताल में कई उपकरण ऐसे हैं जिनको चलाने में डॉक्टर तकनीशियनों की मदद लेते हैं ऐसे में कोरोना का संक्रमण बढ़ा तो उस समय दिक्कत आ सकती है। हालांकि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आने का दावा कर रहा है। जिम्मेदारों का कहना है कि डॉक्टरों और तकनीशियनों की कमी है, लेकिन वेंटिलेटर व अन्य उपकरणों को चलाने के लिए स्टाफ के अन्य लोगों को प्रशिक्षित किया गया है, यदि किसी को वेंटिलेटर या अन्य उपकरण की जरूरत पड़ती है तो दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।
डॉक्टरों की भी कमी
अल्मोड़ा। मेडिकल कॉलेज में 52 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में यहां पर 42 डॉक्टर ही तैनात हैं। ऐसे में कोरोना संक्रमण जोर पकड़ता है तो उस समय दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, पहाड़ों में कई डॉक्टर सेवाएं देने के लिए तैयार नहीं हैं। कई डॉक्टर ऐसे हैं जिन्हें अल्मोड़ा के विभिन्न अस्पतालों में सेवाएं देने के लिए नियुक्त पत्र जारी भी किए, लेकिन आज तक उन्होंने न तो नियुक्ति ली है और न खुद के बारे में कोई जानकारी दी। ऐसे में जिले डॉक्टरों का भी संकट बढ़ता ही जा रहा है।
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कोरोना से लड़ने के लिए तैयारियां पूरी हैं। स्टाफ की कमी है, लेकिन कोरोना संक्रमण बढ़ता है तो स्टाफ की कमी को आड़े नहीं आने दिया जाएगा। किसी भी मरीज को वेटिंलेटर या अन्य किसी भी चीज की जरूरत पड़ती है तो वह आसानी से उपलब्ध करवाई जाएगी।
- डॉ. सीपी भैसोड़ा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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बेस में वर्तमान में पांच तकनीशियन तैनात हैं, लेकिन पांच पद रिक्त हैं। अस्पताल में कई उपकरण ऐसे हैं जिनको चलाने में डॉक्टर तकनीशियनों की मदद लेते हैं ऐसे में कोरोना का संक्रमण बढ़ा तो उस समय दिक्कत आ सकती है। हालांकि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आने का दावा कर रहा है। जिम्मेदारों का कहना है कि डॉक्टरों और तकनीशियनों की कमी है, लेकिन वेंटिलेटर व अन्य उपकरणों को चलाने के लिए स्टाफ के अन्य लोगों को प्रशिक्षित किया गया है, यदि किसी को वेंटिलेटर या अन्य उपकरण की जरूरत पड़ती है तो दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।
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डॉक्टरों की भी कमी
अल्मोड़ा। मेडिकल कॉलेज में 52 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में यहां पर 42 डॉक्टर ही तैनात हैं। ऐसे में कोरोना संक्रमण जोर पकड़ता है तो उस समय दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, पहाड़ों में कई डॉक्टर सेवाएं देने के लिए तैयार नहीं हैं। कई डॉक्टर ऐसे हैं जिन्हें अल्मोड़ा के विभिन्न अस्पतालों में सेवाएं देने के लिए नियुक्त पत्र जारी भी किए, लेकिन आज तक उन्होंने न तो नियुक्ति ली है और न खुद के बारे में कोई जानकारी दी। ऐसे में जिले डॉक्टरों का भी संकट बढ़ता ही जा रहा है।
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कोरोना से लड़ने के लिए तैयारियां पूरी हैं। स्टाफ की कमी है, लेकिन कोरोना संक्रमण बढ़ता है तो स्टाफ की कमी को आड़े नहीं आने दिया जाएगा। किसी भी मरीज को वेटिंलेटर या अन्य किसी भी चीज की जरूरत पड़ती है तो वह आसानी से उपलब्ध करवाई जाएगी।
- डॉ. सीपी भैसोड़ा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज