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आजादी के बाद हर चुनाव में निकलता है खेल स्टेडियम का जिन्न
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रानीखेत का चाइनाव्यू बैरियर। संवाद
- फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। आजादी के बाद हुए हर चुनाव में रानीखेत स्टेडियम बनाने का मुद्दा प्रमुखता से उठा लेकिन आज तक स्टेडियम अस्तित्व में नहीं आ सका है। इससे युवा खेल प्रतिभाएं हताश और निराश हैं। नागरिक क्षेत्र के लिए स्टेडियम नहीं होने के कारण यहां तमाम खेल गतिविधियां ठप हैं। उत्सव तक नहीं लग पाते। 2016 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने स्टेडियम की स्वीकृति दी। इसके लिए राय स्टेट के पास भूमि का चयन किया गया। लेकिन डीपीआर बनने और शासन में फाइलें दौड़ने के बावजूद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
नागरिक क्षेत्र के लिए खेल स्टेडियम बनाने की मांग आजादी के बाद से उठ रही है लेकिन आज तक यह मांग पूरी नहीं हो सकी है। विधानसभा चुनाव हो या संसदीय चुनाव हर बार यह मुद्दा उठता है और चुनाव खत्म होने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। हालांकि सेना के पास मैदान हैं लेकिन नागरिकों को वह मैदान आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाते। इधर, मौजूदा विधायक करन माहरा ने बताया कि उन्होंने यह मामला सदन में उठाया। विधानसभा अध्यक्ष के आश्वासन पर समिति का गठन हुआ। खेल निदेशालय की टीम ने प्रस्तावित स्थल का जायजा भी लिया था। लेकिन पेड़ों की अधिकता का मामला बताकर इसे ठंडे बस्ते में डालने का काम किया गया है। पेयजल निर्माण निगम शाखा ने इसकी डीपीआर भी तैयार की थी।
-रानीखेत में नागरिकों के लिए स्टेडियम का नहीं बन पाना दुर्भाग्यपूर्ण है। पूर्ववर्ती सरकार ने घोषणा की थी, इसके बावजूद यह परियोजना आज तक परवान नहीं चढ़ सकी।-निलेश जोशी, कराटे खिलाड़ी, रानीखेत।
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-पर्यटन नगरी में खेल स्टेडियम का इंतजार करते करते कई पीढ़ियां गुजर गई। फुटबाल, हाकी, क्रिकेट जैसी प्रतियोगिताएं अब नहीं हो पा रही हैं। सरकार को यहां स्टेडियम निर्माण की कवायद शुरू करनी चाहिए।-ललित बिष्ट, हॉकी खिलाड़ी रानीखेत।
-रानीखेत में नागरिकों के लिए खेल मैदान तो बनना ही चाहिए। कब तक प्रतियोगिताओं के लिए सेना के मैदानों पर आश्रित रहना पड़ेगा। युवाओं का मनोबल टूट रहा है। इस बार प्रत्याशियों के समक्ष इसी बात को रखेंगे।- पायल, कराटे खिलाड़ी, रानीखेत।
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नागरिक क्षेत्र के लिए खेल स्टेडियम बनाने की मांग आजादी के बाद से उठ रही है लेकिन आज तक यह मांग पूरी नहीं हो सकी है। विधानसभा चुनाव हो या संसदीय चुनाव हर बार यह मुद्दा उठता है और चुनाव खत्म होने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। हालांकि सेना के पास मैदान हैं लेकिन नागरिकों को वह मैदान आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाते। इधर, मौजूदा विधायक करन माहरा ने बताया कि उन्होंने यह मामला सदन में उठाया। विधानसभा अध्यक्ष के आश्वासन पर समिति का गठन हुआ। खेल निदेशालय की टीम ने प्रस्तावित स्थल का जायजा भी लिया था। लेकिन पेड़ों की अधिकता का मामला बताकर इसे ठंडे बस्ते में डालने का काम किया गया है। पेयजल निर्माण निगम शाखा ने इसकी डीपीआर भी तैयार की थी।
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-रानीखेत में नागरिकों के लिए स्टेडियम का नहीं बन पाना दुर्भाग्यपूर्ण है। पूर्ववर्ती सरकार ने घोषणा की थी, इसके बावजूद यह परियोजना आज तक परवान नहीं चढ़ सकी।-निलेश जोशी, कराटे खिलाड़ी, रानीखेत।
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-पर्यटन नगरी में खेल स्टेडियम का इंतजार करते करते कई पीढ़ियां गुजर गई। फुटबाल, हाकी, क्रिकेट जैसी प्रतियोगिताएं अब नहीं हो पा रही हैं। सरकार को यहां स्टेडियम निर्माण की कवायद शुरू करनी चाहिए।-ललित बिष्ट, हॉकी खिलाड़ी रानीखेत।
-रानीखेत में नागरिकों के लिए खेल मैदान तो बनना ही चाहिए। कब तक प्रतियोगिताओं के लिए सेना के मैदानों पर आश्रित रहना पड़ेगा। युवाओं का मनोबल टूट रहा है। इस बार प्रत्याशियों के समक्ष इसी बात को रखेंगे।- पायल, कराटे खिलाड़ी, रानीखेत।