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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Almora News ›   water Scarcity in Tarikhet

कई चुनाव आए और गए, लेकिन दूर नहीं पाई ताड़ीखेत के गांवों की पेयजल समस्या

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 21 Jan 2022 11:57 PM IST
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water Scarcity in Tarikhet
प्रधान दीपेंद्र पांडेय - फोटो : RANIKHET
रानीखेत (अल्मोड़ा)। राज्य बनने के बाद तमाम चुनाव आए और गए, लेकिन ताड़ीखेत ब्लाक के गांवों की समस्या का स्थायी समाधान आज तक नहीं हो सका है। 1970 में बनी ताड़ीखेत-गगास पेयजल योजना का आज तक पुनर्गठन नहीं हो सका। इस योजना का 80 फीसदी पानी सेना को दिया जाता है, 20 प्रतिशत पानी से चिलियानौला नगर पालिका और 39 ग्राम सभाओं में आपूर्ति की जाती है। 2018 में तिपौला ग्राम समूह पेयजल योजना अस्तित्व में आई, जो आज तक जल संस्थान को हस्तांतरित ही नहीं हो पाई है। सिमोली, पथुली, गैरड़ सहित तमाम गांवों के लोग ठंड के मौसम में भी बूंद बूंद पानी के लिए परेशान हैं।
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ताड़ीखेत ब्लॉक् के गांवों में पेयजल की भारी किल्लत है। धूराफाट हो गया अन्य पट्टियां अक्सर लोग पानी के लिए परेशान रहते हैं। राज्य गठन के बाद चार चार सरकारें आई और गई, लेकिन ताड़ीखेत की इस बड़ी समस्या का समाधान नहीं करा पाई। 2018 में तिपौला ग्राम समूह योजना बनने के बाद उम्मीद थी कि संकट दूर होगा, लेकिन इसका भी फायदा ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं दिख पा रहा है। रानीखेत-भुजान पेयजल योजना भी स्वीकृत है, लेकिन उसका भी अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। सिमोली गांव निवासी सुरेश चंद्र का कहना है कि पानी के लिए अक्सर ग्रामीण परेशान रहते हैं। गैरड़ निवासी किशन सिंह बिष्ट का कहना है कि बार बार शिकायत करते करते परेशान हो गए हैं। सिमोली के प्रधान दीपेंद्र पांडे सीएम पोर्टल में भी शिकायत की गई लेकिन अधिकारी सुनने को तैयार नहीं हैं।
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वितरण व्यवस्था पर भी उठते रहे हैं सवाल
रानीखेत। पानी की किल्लत के पीछे ग्रामीण वितरण व्यवस्था को अक्सर कठघरे में खड़ा करते दिखे हैं। उनका कहना है कि ताड़ीखेत में वितरण व्यवस्था ठीक करने के लिए कई बार आंदोलन हुए, लेकिन व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है। असमान वितरण से कई लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता।
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-पानी का उत्पादन बढ़ ही नहीं रहा। ताड़ीखेत योजना से चिलियानौला नगर और 39 ग्राम सभाएं जुड़े हैं। सिमोली, पथुली आदि गांव दूरस्थ गांव हैं। यहां तीन दिन छोड़कर पानी दिया जाता है। जितना पानी जल संस्थान को मिलता है आपूर्ति करने के प्रयास किए जाते हैं। तिपौला योजना का अभी उन्हें हस्तांतरण नहीं हुआ है।-सुरेश ठाकुर, ईई, जल संस्थान रानीखेत।

सुरेश चंद्र

सुरेश चंद्र- फोटो : RANIKHET

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