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दो दो योजनाओं के बावजूद प्यासे रहने को मजबूर हैँ रानीखेत के ग्रामीण
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। ग्रामीण क्षेत्रों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 30 साल पहले बनी चिलियानौला ग्राम समूह पेयजल योजना को जल संस्थान को हस्तांतरित करने की मांग फिर से जोर पकड़ने लगी है।
ताड़ीखेत ब्लॉक के लिए 40 साल पहले बनी गगास पेयजल योजना जीर्णशीर्ण हो चुकी है, जिस कारण यहां आए दिन पानी का संकट बना रहता है।
जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंप सार्थक कार्रवाई न होने पर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। ताड़ीखेत के गांवों में पेयजल समस्या को दूर करने के लिए 2012 में चिलियानौला ग्राम समूह पेयजल योजना मंजूर हुई।
2019 में योजना बनकर तैैयार हुई लेकिन इस आज तक जल निगम की तरफ से जल संस्थान को हस्तांतरित नहीं किया गया है। जिस कारण योजना के संचालन में कई खामियां उजागर हो रही हैं।
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इस बार बारिश न होने के कारण अधिकांश वक्त पानी की किल्लत रही। चिलियानौला सहित तमाम इलाकों में लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि जल निगम और जल संस्थान के आपसी विवाद का खामियाजा लोगों को भोगना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि दो-दो योजनाएं, दो-दो ट्यूबवेल होने के बावजूद पानी की किल्लत है।
यदि जल्द योजना हस्तांतरित नहीं होती है तो जनप्रतिनिधि आंदोलन शुरू कर देंगे। इस संबंध में सभासदों ने यहां संयुक्त मजिस्ट्रेट अपूर्वा पांडेय से मुलाकात की। कहा कि योजना हस्तांतरित हो जाती तो लोगों को मानकों के अनुसार पानी उपलब्ध होता।
ज्ञापन सौंपने वाले में छावनी परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष मोहन नेगी, नगर पालिका सभासद नवल पांडेय, दीपक कुमार, मनोनीत सभासद मदन कुवार्बी शामिल रहे।
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ताड़ीखेत ब्लॉक के लिए 40 साल पहले बनी गगास पेयजल योजना जीर्णशीर्ण हो चुकी है, जिस कारण यहां आए दिन पानी का संकट बना रहता है।
जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंप सार्थक कार्रवाई न होने पर आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। ताड़ीखेत के गांवों में पेयजल समस्या को दूर करने के लिए 2012 में चिलियानौला ग्राम समूह पेयजल योजना मंजूर हुई।
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2019 में योजना बनकर तैैयार हुई लेकिन इस आज तक जल निगम की तरफ से जल संस्थान को हस्तांतरित नहीं किया गया है। जिस कारण योजना के संचालन में कई खामियां उजागर हो रही हैं।
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इस बार बारिश न होने के कारण अधिकांश वक्त पानी की किल्लत रही। चिलियानौला सहित तमाम इलाकों में लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि जल निगम और जल संस्थान के आपसी विवाद का खामियाजा लोगों को भोगना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि दो-दो योजनाएं, दो-दो ट्यूबवेल होने के बावजूद पानी की किल्लत है।
यदि जल्द योजना हस्तांतरित नहीं होती है तो जनप्रतिनिधि आंदोलन शुरू कर देंगे। इस संबंध में सभासदों ने यहां संयुक्त मजिस्ट्रेट अपूर्वा पांडेय से मुलाकात की। कहा कि योजना हस्तांतरित हो जाती तो लोगों को मानकों के अनुसार पानी उपलब्ध होता।
ज्ञापन सौंपने वाले में छावनी परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष मोहन नेगी, नगर पालिका सभासद नवल पांडेय, दीपक कुमार, मनोनीत सभासद मदन कुवार्बी शामिल रहे।