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उत्तराखंड की लोक संस्कृति को बचाने की अनूठी पहल
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा।
Updated Sat, 21 Jul 2018 11:52 PM IST
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ठप्पे से बनाया गया गलोबंद।
- फोटो : अमर उजाला
बांज, बुरांश और काफल के जंगलों के बीच स्थापित मानिला मंदिर में उत्तराखंड के देवी-देवताओं की मूर्तियों का संग्रहालय बनाकर लोक संस्कृति को बचाने की अनूठी पहल की गई है। संग्रहालय में कई देवी-देवताओं की ऐसी मूर्तियां हैं, जिनके दर्शन तो दूर कल्पना करना भी मुश्किल है। मूर्तियों को बनाने में पुरातत्वविद् यशोधर मठपाल के रेखा चित्रों की मदद ली गई है।
समुद्र तल से करीब 5500 फुट की ऊंचाई पर हिमालय पर्वत की माला को निहारती चोटियों में 1488 में स्थापित मानिला मंदिर की भव्यता शब्दों से बयां करना संभव नहीं है। यह स्थान आत्मिक शांति के लिए ही नहीं, योग और ध्यान लिए भी किसी अनमोल धरोहर से कम नहीं है। मंदिर परिसर में देवी मां के मंदिर के साथ ही शिवजी, श्रीकृष्ण, गणेशजी, विष्णु, नारायण के अलावा मानिला मंदिर प्रबंधन ट्रस्ट की ओर से बनाया गया उत्तराखंड के देवी-देवताओं का संग्रहालय लोक संस्कृति को बचाने की अनूठी पहल है।
मंदिर में ग्वल देवता, नरसिंह देवता, सेम देवता, बधाण देवता, ग्वैल्देराणी (जल की देवी), बदरीनाथ, नागारझंण (नागार्जुन), नागराज, नवगृह, गायत्री, वडू सजेपाल, महारानी जिया, धामद्यौ, ब्रहमद्यौ, क्षेत्रपाल आदि देवताओं की मूर्तियां स्थापित की गई है। यह संग्रहालय जनता के लिए मार्च 2016 में खोला गया था।
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वैष्णो देवी की तर्ज पर विकसित करने की तैयारी
चौखुटिया (अल्मोड़ा)। मानिला मंदिर को वैष्णो देवी की तरह ही विकसित करने की तैयारी है। मंदिर समिति के अध्यक्ष नंदन सिंह मनराल ने बताया कि मंदिर में वर्षा जल के संचयन के लिए दो लाख लीटर क्षमता के दो टैंक बनाए गए हैं। परिसर में गोशाला भी है जहां करीब डेढ़ दर्जन गायें हैं। मध्य हिमालय क्षेत्र की वनस्पतियों को संरक्षित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। यहां रात्रि विश्राम और भोजन की व्यवस्था भी है। खीमसिंह बिष्ट आदि भी मंदिर के उत्थान में लगे हैं।
दिखता है हिमालय का अद्भुत नजारा
मानिला से हिमालय का कई किलोमीटर का लंबा भाग दिखाई देता है, जिसमें यमुनोत्री से नाभिढांग तक की चोटी शामिल हैं।
मेरी मानिले डानी मैं तेरी बलाई ल्यौंला : मानिला की पहाड़ियों की सुंदरता का बखान करता प्रसिद्ध लोक गायक हीरासिंह राणा का यह गीत मानिला पहुंचने वाला व्यक्ति स्वत: ही गुनगुनाने लगता है।
उड़ीसा में बनाई गईं हैं मूर्तियां : मानिला शक्तिपीठ में स्थापित उत्तराखंड के देवी-देवताओं की पंद्रह मूर्तियां उड़ीसा के भुवनेश्वर में बनवाई गईं। इन मूर्तियों में कुल दस लाख रुपये खर्च हुआ। इसके लिए लोगों ने दान दिया। मूर्तियों के विवरण के साथ ही संबंधित मूर्तियों में दानदाताओं का नाम भी लिखे गए हैं।
शक्तिपीठ की दूरी : मानिला जैनल से 19, भिकियासैंण से 22, मौलीखाल से 26 , रामनगर से 85, चौखुटिया से 49, गैरसैंण से 81 और रानीखेत से 76 किलोमीटर।
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समुद्र तल से करीब 5500 फुट की ऊंचाई पर हिमालय पर्वत की माला को निहारती चोटियों में 1488 में स्थापित मानिला मंदिर की भव्यता शब्दों से बयां करना संभव नहीं है। यह स्थान आत्मिक शांति के लिए ही नहीं, योग और ध्यान लिए भी किसी अनमोल धरोहर से कम नहीं है। मंदिर परिसर में देवी मां के मंदिर के साथ ही शिवजी, श्रीकृष्ण, गणेशजी, विष्णु, नारायण के अलावा मानिला मंदिर प्रबंधन ट्रस्ट की ओर से बनाया गया उत्तराखंड के देवी-देवताओं का संग्रहालय लोक संस्कृति को बचाने की अनूठी पहल है।
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मंदिर में ग्वल देवता, नरसिंह देवता, सेम देवता, बधाण देवता, ग्वैल्देराणी (जल की देवी), बदरीनाथ, नागारझंण (नागार्जुन), नागराज, नवगृह, गायत्री, वडू सजेपाल, महारानी जिया, धामद्यौ, ब्रहमद्यौ, क्षेत्रपाल आदि देवताओं की मूर्तियां स्थापित की गई है। यह संग्रहालय जनता के लिए मार्च 2016 में खोला गया था।
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वैष्णो देवी की तर्ज पर विकसित करने की तैयारी
चौखुटिया (अल्मोड़ा)। मानिला मंदिर को वैष्णो देवी की तरह ही विकसित करने की तैयारी है। मंदिर समिति के अध्यक्ष नंदन सिंह मनराल ने बताया कि मंदिर में वर्षा जल के संचयन के लिए दो लाख लीटर क्षमता के दो टैंक बनाए गए हैं। परिसर में गोशाला भी है जहां करीब डेढ़ दर्जन गायें हैं। मध्य हिमालय क्षेत्र की वनस्पतियों को संरक्षित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। यहां रात्रि विश्राम और भोजन की व्यवस्था भी है। खीमसिंह बिष्ट आदि भी मंदिर के उत्थान में लगे हैं।
दिखता है हिमालय का अद्भुत नजारा
मानिला से हिमालय का कई किलोमीटर का लंबा भाग दिखाई देता है, जिसमें यमुनोत्री से नाभिढांग तक की चोटी शामिल हैं।
मेरी मानिले डानी मैं तेरी बलाई ल्यौंला : मानिला की पहाड़ियों की सुंदरता का बखान करता प्रसिद्ध लोक गायक हीरासिंह राणा का यह गीत मानिला पहुंचने वाला व्यक्ति स्वत: ही गुनगुनाने लगता है।
उड़ीसा में बनाई गईं हैं मूर्तियां : मानिला शक्तिपीठ में स्थापित उत्तराखंड के देवी-देवताओं की पंद्रह मूर्तियां उड़ीसा के भुवनेश्वर में बनवाई गईं। इन मूर्तियों में कुल दस लाख रुपये खर्च हुआ। इसके लिए लोगों ने दान दिया। मूर्तियों के विवरण के साथ ही संबंधित मूर्तियों में दानदाताओं का नाम भी लिखे गए हैं।
शक्तिपीठ की दूरी : मानिला जैनल से 19, भिकियासैंण से 22, मौलीखाल से 26 , रामनगर से 85, चौखुटिया से 49, गैरसैंण से 81 और रानीखेत से 76 किलोमीटर।