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तीन बच्चों के लिए तैनात हैं तीन शिक्षक
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/चौखुटिया (अल्मोड़ा)।
Updated Wed, 15 Jul 2015 01:30 AM IST
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ब्लाक के एक उच्च प्राथमिक स्कूल में मात्र तीन बच्चों के लिए तीन शिक्षक तैनात हैं। इसके अलावा एक भोजन माता है। इनके वेतन आदि में ही हर माह करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च हो रहे हैं।
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इस हिसाब से देखा जाए तो एक बच्चे पर हर माह 50 हजार का रुपये खर्च हो रहा है। इन तीन बच्चों पर छह लाख रुपये के हिसाब से 18 लाख सालाना खर्च हो रहे हैं। यह स्कूल सरकारी धन के भारी दुरुपयोग का जीता जागता उदाहरण है।
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विकास खंड अंतर्गत उच्च प्राथमिक स्कूल सीरा में कक्षा छह से लेकर आठवीं तक प्रत्येक कक्षा में सिर्फ एक-एक छात्र पढ़ता है। इस तरह इस स्कूल में एक-एक बच्चे की तीन कक्षाएं चलती हैं।
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इन तीन बच्चों के लिए तीन शिक्षक तैनात हैं। मध्याह्न भोजन के लिए भोजन माता भी तैनात है। स्कूल का रखरखाव आदि अलग से है। इस तरह यदि मोटे तौर भी देखा जाए तो स्कूल में वेतन आदि मद में प्रतिमाह करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च हो रहे हैं।
इस तरह हर बच्चे में प्रति माह 50 हजार और साल भर में छह लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। यह तीन बच्चे भी रोज विद्यालय नहीं आ पाते।
बताया जाता है कि जिले और राज्य में ऐसे दर्जनों विद्यालय हैं जहां एक से लेकर सात-आठ बच्चे पढ़ रहे हैं। इनमें भी कुछ बच्चे जबरन कागजी खाना पूरी के लिए रखे गए हैं। ताकि शिक्षकों को सुविधा मिलती रहे।
लोगों का मानना है कि सरकारी धन का दुरुपयोग रोकने के लिए सरकार को 10 से कम बच्चे वाले विद्यालयों के बारे में कोई ठोस विकल्प पर विचार करना चाहिए।
फिजूल खर्च की जा रही इस धनराशि का सदुपयोग किया जाए तो जनता को काफी लाभ मिल सकता है। अन्यथा राज्य की हालत बिगड़ती चली जाएगी।
पूरे ब्लाक के 16 उच्च प्राथमिक स्कूलों में 23 शिक्षक और 315 बच्चे अध्ययनरत हैं। विकास खंड में कुल 16 उच्च प्राथमिक स्कूल हैं। इन स्कूलों में कुल 315 बच्चे अध्ययनरत हैं।
इतनेे बच्चों के लिए 23 शिक्षक तैनात हैं। हालांकि मानकों के आधार पर 48 शिक्षकों की दरकार है, परंतु यदि तैनात शिक्षकों के वेतन आदि के हिसाब से देखें तो हर बच्चे पर प्रति माह करीब 3500 रुपये से भी अधिक खर्च हो रहे हैं। ब्लाक के लालुरी, कबडोली और थापला में स्थित स्कूलों में छात्र संख्या 10 से भी कम है।