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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Almora News ›   The death of 24-year-old Lieutenant in road accident

सड़क हादसे में 24 वर्षीय लेफ्टिनेंट की मौत

Sat, 01 Aug 2015 12:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/अल्मोड़ा।
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/अल्मोड़ा। Updated Sat, 01 Aug 2015 12:52 AM IST
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मकीड़ी निवासी नौ सेना में मुंबई में कार्यरत लेफ्टिनेंट कमल जोशी (24)उर्फ अंकित की मुंबई में सड़क हादसे में मौत हो गई।

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उनके शव को शुक्रवार को परिजन और सेना के जवान अल्मोड़ा लाए। 9 कुमाऊं रेजीमेंट के जवानों ने दिवंगत सेना ऑफीसर को विश्वनाथघाट में अंतिम सलामी दी।

एमईएस से सेवानिवृत्त त्रिभुवन जोशी और गीता जोशी के पुत्र कमल ने प्रारंभिक शिक्षा कूर्मांचल एकेडमी अल्मोड़ा से ली।

सैनिक स्कूल घोड़ाखाल से 2010 में 12वीं परीक्षा पास करने के बाद उनका चयन एनडीए में हो गया। खड़कवासला से ट्रेनिंग करने के बाद वह एक साल पहले ही नौ सेना में लेफ्टिनेंट बने।

वर्तमान में वह मुंबई में कार्यरत थे। परिजनों ने बताया कि 26 जुलाई रविवार को कमल और उसके  दो अन्य साथी आफिसर निजी कार से मुंबई में लोनावाला घूमने निकले।
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हाई-वे में उनकी कार ट्रक से टकरा गई। गंभीर हालत में तीनों को सेना अस्पताल में भर्ती  कराया गया, लेकिन गंभीर रूप से घायल कमल की 29 जुलाई को मौत हो गई।
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 सेना के हेलीकॉप्टर से 30 जुलाई को उनका शव दिल्ली लाया गया। शुक्रवार सुबह शव अल्मोड़ा लाया गया। लाडले का तिरंगे में लिपटा शव घर पर पहुंचते ही कोहराम मच गया।

कलेजे के टुकड़े को गंवा चुके माता-पिता और 86  वर्षीय दादी प्रेमा जोशी, बड़े भाई योगेश समेत अन्य परिजन बदहवाश हो गए।

 शवयात्रा  में उप जिलाधिकारी रिंकू बिष्ट, पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, तहसीलदार  प्रताप सिंह रौतेला के साथ ही काफी लोग शामिल थे। विधायक मनोज तिवारी ने भी सेना अधिकारी कमल की आकस्मिक मृत्यु पर शोक जताया है।

लेफ्टिनेंट कमल जून में अपने घर आए थे। कुछ दिन घर पर रहने  के बाद वह मां गीता जोशी को अपने साथ लेकर नागपुर में विवाहिता बहन के घर छोड़ कर कुछ दिन बाद अल्मोड़ा पहुंचाने का वादा कर मुंबई चले गए थे। नियति  के खेल से बेबस मां गीता को बेटे का शव लेकर अल्मोड़ा लौटना पड़ा। 

लेफ्टिनेंट कमल कुछ दिन पहले मां को नागपुर में रहने वाली बहन ममता तिवारी के पास लेकर गए थे। कुछ दिन पहले ही बहन ममता ने शिशु को जन्म दिया था।

इससे सभी परिजन बेहद खुश थे। कुछ दिन बाद ही मां गीता को बेटे के साथ अल्मोड़ा लौटना था पर इस बीच ही कमल का एक्सीडेंट हो गया। बेटे की  दुर्घटना की  खबर भी सेना ने मां गीता जोशी के मोबाइल पर ही दी।


खबर सुनकर मां बेहोश हो गई। इसके बाद हिम्मत बांधी और दामाद को साथ नागपुर से ही मुंबई गई। मां को बेटे के जीवित होने की उम्मीद थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। तिरंगे में लिपटे कमल का शव घर पहुंचने पर वहां मौजूद लोगों के आंसू नहीं थम रहे थे।

फोटो- 31एएलएम1पी से 4पी तक

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