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महालक्ष्मी पूजा के दिन गन्ने से मूर्ति बनाने पर मां लक्ष्मी होती है प्रसन्न

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 03 Nov 2021 11:48 PM IST
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Sugarcane For Mahalakshmi
अल्मोड़ा में महालक्ष्मी की मूर्ति बनाने के लिए गन्ना खरीदता एक व्यक्ति। - फोटो : ALMORA
अल्मोड़ा। दिवाली पर गन्ने से मां लक्ष्मी की मूर्ति तैयार की जाती है। इस कारण गन्ने की मांग काफी बढ़ गई है। बढ़ती महंगाई ने गन्ने की कीमतों में तेजी ला दी है। नगर में एक गन्ना 80 से 100 रुपये में बिक रहा है। कल बृहस्पतिवार को दिवाली पर गन्ने की मांग अधिक रहने पर कीमतें और अधिक बढ़ सकती है।
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कुमाऊं में अधिकांश स्थानों पर महालक्ष्मी पूजा के दिन गन्ने से मां लक्ष्मी की मूर्ति बनाई जाती है। गन्ने से बनी मां लक्ष्मी की मूर्ति की लोग विधि विधान से पूजा करते हैं। पंडित नवीन चंद्र जोशी ने बताया कि मां लक्ष्मी को गन्ना बहुत प्रिय है। गन्ना उनके सबरस भोजन में शामिल हैं। गन्ने को मां लक्ष्मी, श्री, धन का स्वरूप माना जाता है। गन्ने से मां लक्ष्मी की मूर्ति बनाए जाने पर मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर भक्तों पर कृपा करती हैं। उन्होंने बताया कि इसलिए आज भी महालक्ष्मी के दिन गन्ने से मां लक्ष्मी की मूर्ति बनाए जाने का प्रावधान है। एक मान्यता यह है कि मां लक्ष्मी का जन्म इक्षु सागर से हुआ। इक्षु सागर का जल मीठा था। संस्कृत में इक्षु का अर्थ गन्ना है। इस वजह से भी मां लक्ष्मी की मूर्ति गन्ने से बनाई जाती है। उनके प्रतीक के रूप में गन्ने का पूजन होता है। पूजा के बाद गन्ने की मूर्ति को नदी या पानी में विसर्जित किया जाना चाहिए। यदि सिर्फ गन्ने के तने की पूजा की हो तो उसे प्रसाद के रूप में बांट सकते हैं। पहाड़ में गन्ने की खेती बहुत कम होती है। कुछ लोग घरों के आसपास गन्ना उगाते हैं। दिवाली पर गन्ने की मांग काफी बढ़ गई है। इस बार नगर में कुछ आसपास के गांवों के अलावा हल्द्वानी से काफी संख्या में गन्ना बिकने को आया है। पिछले साल एक गन्ना जहां 30-40 रुपये में आता था इस बार एक गन्ना 80 से 100 रुपये में बिका। संवाद
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रेडीमेड ऐपणों की मांग बढ़ी
अल्मोड़ा। दिवाली में गेरु और बिस्वार से ऐपण बनाने की सदियों पुरानी परंपरा अब धीरे-धीरे खत्म हो रही है। लोग हाथ के ऐपण बनाने के बजाए रेडीमेड ऐपणों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। अधिकांश लोग शुभ कार्यों अथवा तीज त्योहार पर ऐपण के स्टीकर लाकर चिपका देते हैं। जबकि हाथ से बनाए ऐपण ही शुभ माने जाते हैं। खजांची बाजार स्थित उत्तरांचल ऐपण के पंकज बिष्ट ने बताया कि रेडीमेड ऐपण 10 से 100 रुपये की कीमत में उपलब्ध है। लक्ष्मी पैर, देहरी ऐपण लोग काफी खरीद रहे हैं। लोगों का रुझान रेडीमेड ऐपणों के प्रति बढ़ा है।
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कुम्हारों के नसीब में कम आया उजाला
अल्मोड़ा। दिवाली पर नगर में तमाम बाहरी स्थानों से मिट्टी के दीये बेचने वाले आए हैं लेकिन अभी इनकी बिक्री ज्यादा नहीं हो रही है। कुम्हार कई माह पहले ही दीये बनाने शुरू कर देते हैं। उन्हें उम्मीद रहती है दिवाली पर मिट्टी के दीये बिकेंगे तो उनके घरों में बच्चे दिवाली मना सकेंगे। नगर के लाला बाजार में दीये बेच रहे रितिक पटेल ने बताया कि चकाचौंध में लोग परंपरा के नाम पर मिट्टी के चार-पांच दीये जला देते हैं।
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