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सोमेश्वर घाटी क्षेत्र में किसानों के लिए आफत बने बंदर
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Mon, 02 Jan 2017 10:59 PM IST
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फसलों को बर्बाद करते बंदर।
- फोटो : अमर उजाला
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सोमेश्वर घाटी क्षेत्र में बंदरों से किसान परेशान हैं। बंदरों के झुंड खेतों में बोई गेहूं की फसल के अलावा सब्जी और फलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस कारण घाटी क्षेत्र के काश्तकारों का खेती से मोहभंग हो रहा है।
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सोमेश्वर घाटी क्षेत्र के रैत, सर्प, पल्यूड़ा, हटयूड़ा, मल्लाखोली, टाना, नारंगतोली, बमनफल्यां, रतुराठ, दलमोड़ी, भानाराठ, भंडारी गांव, अर्जुनराठ, चनौदा, बनौड़ा, धूमडग़ांव समेत सभी क्षेत्रों में काश्तकार खेती पर ही निर्भर हैं।
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यहां गेहूं, धान, आलू का जहां बहुतायत में उत्पादन होता है वहीं काश्तकार प्लाज, लहसुन, मटर, टमाटर आदि सब्जियां भी उगाते हैं। काश्तकारों की आजीविका खेती पर ही निर्भर है, पर पिछले कुछ सालों से बंदर फसल को नष्ट कर दे रहे हैं।
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बंदरों के झुंड गेहूं के पौध उखाड़कर डंठल खा दे रहे हैं, वहीं अन्य फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। बंदरों के आतंक से कई काश्तकारों ने फसल की बुवाई करनी तक छोड़ दी है। काश्तकार घरों के आसपास अपने उपयोग के लिए फसल बो रहे हैं, लेकिन बंदरों के झुंड घरों के आसपास भी फसल बरबाद कर दे रहे हैं। भगाने पर बंदर काटने को आ रहे हैं। इससे बच्चों और महिलाओं को खतरा बना हुआ है।