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सुअरों को भगाने के लिए बनाया बायो एक्वास्टिक यंत्र
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
Updated Sun, 10 Apr 2016 01:00 AM IST
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सोलर खेती
- फोटो : अमर उजाला
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अल्मोड़ा। सुअर, बंदर समेत अन्य वन्य जीवों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाने से पहाड़ के किसान खेती छोड़ने लगे हैं। चुनौती बन चुके सुअरों को खेतों से दूर भगाने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) के विशेषज्ञों ने बायो एक्वास्टिक यंत्र बनाया है। बैटरी से संचालित लाउडस्पीकर सुअरों को डराने के लिए तेंदुए, बाघ, कुत्ते आदि जानवरों की रिकॉर्डेड आवाज बजाता है। आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल में इस यंत्र का परीक्षण कारगर रहा है।
वीपीकेएस के हवालबाग प्रक्षेत्र में भी इन दिनों इसका परीक्षण चल रहा है। सफल रहने पर जल्द ही खेती के लिए नासूर बन चुके सुअरों को खदेड़ना आसान हो जाएगा। जंगली जानवरों द्वारा खेती को पहुंचाए जा रहे नुकसान से आईसीएआर के विशेषज्ञ भी चिंतित हैं। संस्थान ने गुवाहाटी (असोम), जोधपुर (राजस्थान), हवालबाग (अल्मोड़ा) में सुअर अनुसंधान संस्थान केंद्र स्थापित किया है। आईसीएआर के विशेषज्ञों ने खेतों में पहुंच कर फसल को चौपट कर रहे सुअरों को भगाने के लिए बायो एक्वास्टिक यंत्र बनाया है।
सौर ऊर्जा पैनल से चार्ज होने वाली बैटरी के सहारे लाउडस्पीकर के माध्यम से तेंदुए, बाघ, कुत्ते आदि जानवरों की आवाज निकालने की व्यवस्था की गई है। जरूरत के मुताबिक इस यंत्र में समय निर्धारित किया जा सकता है। नियत समय पर रिकॉर्डेड आवाज गूंजने से सुअर खेतों से भाग जाते हैं। वीपीकेएएस के निदेशक डॉ. ए पटनायक ने बताया कि रिकॉर्डेड आवाज सुनाई देने से सुअर उस स्थान से भाग जाते हैं। आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल में इस यंत्र का परीक्षण कारगर रहा है। अल्मोड़ा में भी इसका परीक्षण किया जा रहा है।
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यहां के लिए कारगर पाए जाने पर यंत्र का व्यावसायिक उत्पादन कर किसानों तक पहुंचाने की योजना है। फिलहाल इसमें 25 हजार का खर्च आ रहा है। बड़े पैमाने पर उत्पादन होने से लागत में काफी कमी आएगी। सरकार से अनुदान मिलने पर कीमत कम होने से आम किसानों तक यह यंत्र पहुंच सकेगा। उन्होंने बताया कि परीक्षण के दौरान पाया गया कि यंत्र से निकलने वाली आवाज 2.5 एकड़ क्षेत्र में मौजूद सुअरों को खदेड़ने में कामयाब है।
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वीपीकेएस के हवालबाग प्रक्षेत्र में भी इन दिनों इसका परीक्षण चल रहा है। सफल रहने पर जल्द ही खेती के लिए नासूर बन चुके सुअरों को खदेड़ना आसान हो जाएगा। जंगली जानवरों द्वारा खेती को पहुंचाए जा रहे नुकसान से आईसीएआर के विशेषज्ञ भी चिंतित हैं। संस्थान ने गुवाहाटी (असोम), जोधपुर (राजस्थान), हवालबाग (अल्मोड़ा) में सुअर अनुसंधान संस्थान केंद्र स्थापित किया है। आईसीएआर के विशेषज्ञों ने खेतों में पहुंच कर फसल को चौपट कर रहे सुअरों को भगाने के लिए बायो एक्वास्टिक यंत्र बनाया है।
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सौर ऊर्जा पैनल से चार्ज होने वाली बैटरी के सहारे लाउडस्पीकर के माध्यम से तेंदुए, बाघ, कुत्ते आदि जानवरों की आवाज निकालने की व्यवस्था की गई है। जरूरत के मुताबिक इस यंत्र में समय निर्धारित किया जा सकता है। नियत समय पर रिकॉर्डेड आवाज गूंजने से सुअर खेतों से भाग जाते हैं। वीपीकेएएस के निदेशक डॉ. ए पटनायक ने बताया कि रिकॉर्डेड आवाज सुनाई देने से सुअर उस स्थान से भाग जाते हैं। आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल में इस यंत्र का परीक्षण कारगर रहा है। अल्मोड़ा में भी इसका परीक्षण किया जा रहा है।
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यहां के लिए कारगर पाए जाने पर यंत्र का व्यावसायिक उत्पादन कर किसानों तक पहुंचाने की योजना है। फिलहाल इसमें 25 हजार का खर्च आ रहा है। बड़े पैमाने पर उत्पादन होने से लागत में काफी कमी आएगी। सरकार से अनुदान मिलने पर कीमत कम होने से आम किसानों तक यह यंत्र पहुंच सकेगा। उन्होंने बताया कि परीक्षण के दौरान पाया गया कि यंत्र से निकलने वाली आवाज 2.5 एकड़ क्षेत्र में मौजूद सुअरों को खदेड़ने में कामयाब है।