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नदी का मटमैला पानी छानकर पी रहे आपदा प्रभावित

Wed, 04 Jul 2018 10:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो  अल्मोड़ा।
अमर उजाला ब्यूरो  अल्मोड़ा। Updated Wed, 04 Jul 2018 10:57 PM IST
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 rive water drinking affected the disaster
खैरखेत का आपदा प्रभावित क्षेत्र। - फोटो : अमर उजाला
 भैंसियाछाना ब्लॉक के खैरखेत के आपदा प्रभावित आधा दर्जन परिवार पिछले कई सालों से जूनियर हाईस्कूल खैरखेत में शरण लिए हुए हैं। सरकार की तमाम घोषणाओं के बावजूद आपदा पीड़ित परिवार खानाबदोश जिंदगी जीने को मजबूर हैं। उन्हें केंद्र की उज्ज्वला योजना के गैस कनेक्शन भी नहीं मिले हैं। प्रभावित परिवारों को न तो बिजली का कनेक्शन मिला है और न ही स्कूल के लिए पानी की लाइन है। वह नदी का मटमैला पानी छानकर पीने को मजबूर हैं। 
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बता दें कि 2010 में आई आपदा के बाद भैंसियाछाना ग्राम सभा के खैरखेत तोक के आधा दर्जन परिवारों को घर छोड़ना पड़ा था। इसके बाद 2012 में एक बार फिर भूस्खलन हुआ और चार अन्य परिवारों को भी गांव से तब सुरक्षा के लिहाज से हटा दिया गया था। प्रभावितों में चार परिवार अपने प्रयासों से अन्यत्र बस गए, लेकिन छह परिवार पिछले कई सालों से जूनियर हाईस्कूल खैरखेत में शरण लिए हुए हैं। यहां रहने वाले आपदा प्रभावित काफी दिक्कतें झेल रहे हैं। आलम यह है कि बरसात में नदी के मटमैले पानी को कपड़े में छान कर पीना इनकी मजबूरी बन गई है।
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 आपदा से पूर्व प्रत्येक परिवार के पास लगभग सात-सात नाली जमीन थी, जो आपदा की भेंट चढ़ गई। जिससे प्रभावित परिवार अब राशन की दुकान पर निर्भर हैं। उनके पास गैस कनेक्शन भी नहीं हैं और खाना बनाने के लिए खुले में चूल्हे लगाए हैं। यही नहीं बरसात में मजबूरन सभी परिवारों को एक ही कमरे में खाना बनाना पड़ता है। एक जीर्ण शौचालय है वह भी कई सालों से बंद पड़ा है। जिससे प्रभावितों को खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है। यहां तक पहुंचने के लिए पूर्व जिलाधिकारी सविन बंसल के कार्यकाल के दौरान एक रास्ते का निर्माण शुरू किया गया था, लेकिन वह भी अधूरा पड़ा है। स्कूल परिसर के अलावा प्रभावितों के पास साग सब्जी उगाने के लिए भूमि नहीं हैं। जानवरों को रखने के लिए स्थान नहीं होने के कारण प्रभावित परिवार मुर्गी और बकरी पालन भी नहीं कर पा रहे हैं।  
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