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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Almora News ›   Puri and pilot projects in the country will start in Almora

देश में पुरी और अल्मोड़ा में शुरू होगा पॉयलट प्रोजेक्ट

Thu, 09 Jul 2015 11:26 PM IST
रमेश जोशी /अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा
रमेश जोशी /अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा Updated Thu, 09 Jul 2015 11:26 PM IST
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अतिवृष्टि, भूस्खलन और भूकंप की दृष्टि से अल्मोड़ा जिला काफी संवेदनशील है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट (एनआईडीएम) पिछले 30 सालों में आपदाओं के आंकड़ों का अध्ययन कर अल्मोड़ा नगर और जिले के अन्य क्षेत्रों के लिए अन्य विभागों के सहयोग से प्रभावी कार्ययोजना शुरूकरेगा। गृह मंत्रालय के विशेषज्ञों ने देश में पुरी(उड़ीसा) और अल्मोड़ा(उत्तराखंड) को इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना है।

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आपदा से देश में हर साल जानमाल का भारी नुकसान होता है। निर्माण के मानकों का पालन नहीं करने, पानी की निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने और तकनीक आधारित निर्माण कार्य नहीं होने से समस्या गहराते जा रही है। अब एनआईडीएम पिछले तील साल में अल्मोड़ा में घटी आपदाओं, बारिश, तापमान आदि आंकड़ों की कुंडली खंगालकर भविष्य के लिए निर्माण की उचित तकनीक, प्रबंधन, उपचार, बचाव और राहत के लिए वैज्ञानिक कार्ययोजना तैयार करेगा। ताकि भविष्य में घटित होने वाली संभावित आपदाओं का बेहतर प्रबंधन से नुकसान को कम किया जा सके।
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अपर जिलाधिकारी प्रकाश चंद्र ने बताया कि योजना के तहत देश में दो जिले ही चुने गए हैं। उन्होंने बताया कि इस काम की जिम्मेदारी केंद्र ने गोरखपुर इन्वायरलमेंटल एक्शन ग्रुप को सौंपी है। संस्था अल्मोड़ा में पिछले तीन दशकों में घटी आपदाओं का आंकड़ा केंद्रीय मौसम विज्ञान विभाग और अन्य पुख्ता स्रोतों से आंकड़े प्राप्त करेगी। आंकड़ों के आधार पर देश और विदेश के वैज्ञानिक अगले तीस सालों के लिए कार्ययोजना बनाएंगे। इस काम में सभी विभाग भी शामिल रहेंगे। उन्होंने बताया कि संस्था के प्रतिनिधियों ने अल्मोड़ा आकर प्रशासन के अधिकारियों से बैठक की है। जल्द ही इस योजना पर काम शुरू होगा।
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अल्मोड़ा। एनआईडीएम की योजना भविष्य में मील का पत्थर साबित हो सकती है। निर्माण की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर भी बेतरतीब बसासत हो रही है। पिछले तीन दशकों के आंकड़ों के आधार पर रूस और अमेरिका के वैज्ञानिक पता लगाएंगे कि बगैर उचित प्रबंधन के निर्माण जारी रहा तो अगले तीस सालों में कितना भारी नुकसान हो सकता है। योजना भी तैयार करेंगे जिस पर अमल करने से भविष्य के खतरों से बचा जा सके।
अपर जिलाधिकारी
प्रकाश चंद्र

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