{"_id":"62055f85b86ce022d91cf32b","slug":"politics-in-ranikhet-ranikhet-news-hld453375474","type":"story","status":"publish","title_hn":"रानीखेत विधानसभा में सीधे मुकाबले में मौन वोटरों की भूमिका अहम....","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रानीखेत विधानसभा में सीधे मुकाबले में मौन वोटरों की भूमिका अहम....
विज्ञापन
रानीखेत से कांग्रेस प्रत्याशी करन माहरा
- फोटो : RANIKHET
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नवीन भट्ट
रानीखेत (अल्मोड़ा)। रानीखेत में इस बार भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर होने जा रही है। चुनाव की घड़ी नजदीक आते ही वोटरों को साधने की कोशिश शुरू हो गई है। कड़ी टक्कर वाली इस सीट पर खामोश वोटरों की भूमिका अहम मानी जा रही है। कड़ी टक्कर इसलिए क्योंकि 2007 में यहां जीत का अंतर सिर्फ 256, 2012 में सिर्फ 78 और 2017 के चुनाव में 4981 का रहा है।
राज्य बनने के बाद रानीखेत विधानसभा सीट के बारे में यह मिथक है कि जो भी यहां से विधायक बना उसके दल की सरकार कभी नहीं बनी। इस बार कांग्रेस ने जहां सिटिंग विधायक करन माहरा पर दांव खेला है वहीं भाजपा ने 2017 में पार्टी से बागी होकर निर्दलीय लड़े डॉ. प्रमोद नैनवाल पर भरोसा जताया है। अजय भट्ट के केंद्र सरकार में मंत्री बनने के बाद इस बार रानीखेत से दावेदारों की संख्या 12 हो गई थी लेकिन भाजपा ने नैनवाल पर भरोसा जताया। 2017 में नैनवाल ने बागी होकर कद्दावर नेता अजय भट्ट के खिलाफ चुनाव लड़ा और अजय भट्ट चुनाव हार गए। इसके बाद अजय भट्ट समर्थकों में नैनवाल के खिलाफ भारी आक्रोश देखने को मिला। हालांकि वर्तमान में सभी विरोधी नैनवाल के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।
2002 के चुनाव में भाजपा के अजय भट्ट ने चुनाव जीता था। उन्होंने कांग्रेस के पूरन माहरा को दो हजार से अधिक मतों से हरा दिया। इस चुनाव में दो दमदार निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में थे। 2007 में कांग्रेस के करन माहरा ने भाजपा के अजय भट्ट को 256 मतों से मात दी। इस चुनाव में बसपा के कद्दावर नेता पूरन सिंह डंगवाल मैदान में थे। 2012 में भाजपा के अजय भट्ट ने कांग्रेस के करन माहरा को 78 मतों से हराया। चौबटिया, ताड़ीखेत आदि में वोटर खुलकर बोलने को तैयार नहीं हैं। यहां जिला, नगर पालिका, खेल स्टेडियम के मुद्दे प्रमुख हैं लेकिन इस चुनाव में जिले का मुद्दा अभी तक सुनाई नहीं दे रहा है।
विज्ञापन
कुल मतदाता 79225
पुरुष 40888
महिला 38337
संक्षिप्त इतिहास
भाजपा के अजय भट्ट 2002, 2012 में विधायक बने। कांग्रेस के करण मेहरा 2007, 2017 में विधायक बने। इस बार भाजपा से डॉ. प्रमोद नैनवाल और करण मेहरा सीधी टक्कर है।
स्थानीय मुद्दे
-रानीखेत जिला नहीं बन पाया।
-कांग्रेस सरकार में स्वीकृत खेल स्टेडियम नहीं बन सका।
-विधायक निधि के अलावा कोई बड़े काम नहीं हो सके।
-लघु, कुटीर उद्योग नहीं लग सके।
-पर्यटन विकास के लिए अपेक्षित कार्य नहीं हुए पूरे।
दावेदारों की बात
मैं पिछले पांच साल में किए गए विकास कार्यों के मुद्दों को लेकर जनता के बीच जा रहा हूं। जनता का आशीर्वाद भी मुझे मिल रहा है। हमारी सरकार आएगी तो क्षेत्र के विकास पर और जोर दूंगा। लगभग 95 गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ा है। तमाम प्राथमिक स्कूलों को फर्नीचर दिया है। रानीखेत डिग्री कॉलेज में कार्य कराए। रानीखेत, भिकियासैंण के अस्पतालों को ऑक्सीजनयुक्त किया है।
-करन माहरा, कांग्रेस प्रत्याशी
पिछले पांच साल में स्थानीय विधायक ने कोई काम नहीं किया। पांच सालों में कई आईटीआई बंद हो गईं। क्षेत्र का हर मतदाता अपने को ठगा सा महसूस करता रहा। हम केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियों को लेकर जनता के बीच जा रहे हैं। किसान, महिलाओं, गरीबों सहित हर वर्ग के लिए आई योजनाओं ने लोगों के जीवन स्तर को सुधारा है। इस बार यहां से भाजपा की जीत तय है।
-डॉ. प्रमोद नैनवाल, भाजपा प्रत्याशी
विज्ञापन
रानीखेत (अल्मोड़ा)। रानीखेत में इस बार भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर होने जा रही है। चुनाव की घड़ी नजदीक आते ही वोटरों को साधने की कोशिश शुरू हो गई है। कड़ी टक्कर वाली इस सीट पर खामोश वोटरों की भूमिका अहम मानी जा रही है। कड़ी टक्कर इसलिए क्योंकि 2007 में यहां जीत का अंतर सिर्फ 256, 2012 में सिर्फ 78 और 2017 के चुनाव में 4981 का रहा है।
राज्य बनने के बाद रानीखेत विधानसभा सीट के बारे में यह मिथक है कि जो भी यहां से विधायक बना उसके दल की सरकार कभी नहीं बनी। इस बार कांग्रेस ने जहां सिटिंग विधायक करन माहरा पर दांव खेला है वहीं भाजपा ने 2017 में पार्टी से बागी होकर निर्दलीय लड़े डॉ. प्रमोद नैनवाल पर भरोसा जताया है। अजय भट्ट के केंद्र सरकार में मंत्री बनने के बाद इस बार रानीखेत से दावेदारों की संख्या 12 हो गई थी लेकिन भाजपा ने नैनवाल पर भरोसा जताया। 2017 में नैनवाल ने बागी होकर कद्दावर नेता अजय भट्ट के खिलाफ चुनाव लड़ा और अजय भट्ट चुनाव हार गए। इसके बाद अजय भट्ट समर्थकों में नैनवाल के खिलाफ भारी आक्रोश देखने को मिला। हालांकि वर्तमान में सभी विरोधी नैनवाल के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।
विज्ञापन
2002 के चुनाव में भाजपा के अजय भट्ट ने चुनाव जीता था। उन्होंने कांग्रेस के पूरन माहरा को दो हजार से अधिक मतों से हरा दिया। इस चुनाव में दो दमदार निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में थे। 2007 में कांग्रेस के करन माहरा ने भाजपा के अजय भट्ट को 256 मतों से मात दी। इस चुनाव में बसपा के कद्दावर नेता पूरन सिंह डंगवाल मैदान में थे। 2012 में भाजपा के अजय भट्ट ने कांग्रेस के करन माहरा को 78 मतों से हराया। चौबटिया, ताड़ीखेत आदि में वोटर खुलकर बोलने को तैयार नहीं हैं। यहां जिला, नगर पालिका, खेल स्टेडियम के मुद्दे प्रमुख हैं लेकिन इस चुनाव में जिले का मुद्दा अभी तक सुनाई नहीं दे रहा है।
विज्ञापन
कुल मतदाता 79225
पुरुष 40888
महिला 38337
संक्षिप्त इतिहास
भाजपा के अजय भट्ट 2002, 2012 में विधायक बने। कांग्रेस के करण मेहरा 2007, 2017 में विधायक बने। इस बार भाजपा से डॉ. प्रमोद नैनवाल और करण मेहरा सीधी टक्कर है।
स्थानीय मुद्दे
-रानीखेत जिला नहीं बन पाया।
-कांग्रेस सरकार में स्वीकृत खेल स्टेडियम नहीं बन सका।
-विधायक निधि के अलावा कोई बड़े काम नहीं हो सके।
-लघु, कुटीर उद्योग नहीं लग सके।
-पर्यटन विकास के लिए अपेक्षित कार्य नहीं हुए पूरे।
दावेदारों की बात
मैं पिछले पांच साल में किए गए विकास कार्यों के मुद्दों को लेकर जनता के बीच जा रहा हूं। जनता का आशीर्वाद भी मुझे मिल रहा है। हमारी सरकार आएगी तो क्षेत्र के विकास पर और जोर दूंगा। लगभग 95 गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ा है। तमाम प्राथमिक स्कूलों को फर्नीचर दिया है। रानीखेत डिग्री कॉलेज में कार्य कराए। रानीखेत, भिकियासैंण के अस्पतालों को ऑक्सीजनयुक्त किया है।
-करन माहरा, कांग्रेस प्रत्याशी
पिछले पांच साल में स्थानीय विधायक ने कोई काम नहीं किया। पांच सालों में कई आईटीआई बंद हो गईं। क्षेत्र का हर मतदाता अपने को ठगा सा महसूस करता रहा। हम केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियों को लेकर जनता के बीच जा रहे हैं। किसान, महिलाओं, गरीबों सहित हर वर्ग के लिए आई योजनाओं ने लोगों के जीवन स्तर को सुधारा है। इस बार यहां से भाजपा की जीत तय है।
-डॉ. प्रमोद नैनवाल, भाजपा प्रत्याशी